27% ओबीसी आरक्षण पर सांसद तन्खा और मंत्री राकेश सिंह आमने-सामने, आंकड़ों से लेकर कानून तक उठे सवाल

Neel Tiwari | Oct 17, 2026, 20:27 IST
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण का मामला फिर चर्चा में है।
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण का मुद्दा सियासत के केंद्र में आ गया है। जबलपुर में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बयान दिए हैं। इन बयानों से आरक्षण का विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। कांग्रेस मौजूदा सरकार की कानूनी पैरवी और पिछड़ा वर्ग के आंकड़ों पर सवाल उठा रही है। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है।
MP Vivek Tankha and Minister Rakesh Singh face-off over 27% OBC reservation, questions raised over data and legal stand

विवेक तन्खा ने आंकड़ों पर उठाए सवाल

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आरक्षण बढ़ाने के लिए कानून लाया गया था। इस कानून के जरिए ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था।



तन्खा के मुताबिक, मौजूदा सरकार हाई कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख सकी। उन्होंने अदालत में आरक्षण के समर्थन में जरूरी आंकड़े पेश नहीं करने पर सवाल उठाए। तन्खा ने पूछा कि सरकार ने अदालत में पर्याप्त डेटा क्यों नहीं रखा? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक ओबीसी वर्ग का जरूरी डेटा तैयार नहीं किया। ओबीसी आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।



राकेश सिंह बोले, कांग्रेस ने जल्दबाजी की

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के मामले में जल्दबाजी की थी। कांग्रेस पर्याप्त तैयारी के बिना ही विधेयक लेकर आई थी। राकेश सिंह ने अपने बयान में हाई कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया।



राकेश ने कहा कि कानून बनाने की प्रक्रिया में जरूरी तैयारी का अभाव था। राकेश सिंह के मुताबिक, सरकार की मंशा सभी वर्गों के साथ न्याय करने की है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों को भी अनुचित बताया। सिंह ने कहा कि अदालत के आदेश में कई बातें स्पष्ट की गई हैं। इसके बावजूद इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।



याचिका दायर करने के अधिकार पर सवाल

जैसा कि द सूत्र ने आपको पहले ही बताया था, सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी होगी। बीजेपी विधायक या अन्य राजनीतिक दल कानूनी तौर पर याचिका दायर करने के योग्य नहीं हैं। विवेक तन्खा ने भी अदालत में याचिका दायर करने के अधिकार पर सवाल उठाए।



तन्खा ने राजनीतिक दलों और उनके पदाधिकारियों की कानूनी हैसियत के बीच अंतर बताया। तन्खा के अनुसार, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी व्यक्तिगत हैसियत से अदालत का रुख कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न संगठनों के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के अधिकार पर भी सवाल उठाए।



सरकार की पैरवी पर टिकी नजरें

राज्य सरकार ने शुक्रवार को ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। इस बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरक्षण को लेकर बयानबाजी जारी है। इस विवाद में अब दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। कांग्रेस सरकार की कानूनी पैरवी और आरक्षण के समर्थन में जरूरी आंकड़ों पर सवाल उठा रही है।



वहीं, बीजेपी कांग्रेस के कार्यकाल में कानून बनाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। इस बीच पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की कानूनी स्थिति पर भी चर्चा तेज हो गई है। आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी है।



27% आरक्षण की बहाली के लिए आगे क्या?

ओबीसी आरक्षण पर जारी सियासी बहस के बीच अब कई अहम सवाल सामने हैं। सरकार सुप्रीम कोर्ट में कौन-से आंकड़े और कानूनी तर्क पेश करेगी? क्या पिछड़ा वर्ग से जुड़ा जरूरी डेटा जुटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे? क्या सरकार अदालत में आरक्षण के पक्ष में मजबूत कानूनी पैरवी कर पाएगी?



फिलहाल सांसद विवेक तन्खा और मंत्री राकेश सिंह के बयानों से राजनीतिक बहस तेज है। 27% ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। इस मामले की आगे की दिशा सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से तय होगी।

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