MP के 4 आयोग को मिले नए अध्यक्ष, CM ने लगाई मुहर
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- CM मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के चार बड़े आयोग के अध्यक्ष तय किए हैं।
- अनुसूचित जाति आयोग की जिम्मेदारी कैलाश जाटव को मिली है।
- महिला आयोग की कमान रेखा यादव के हाथ में दी गई है।
- अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष रामलाल रौतेल को बनाया गया है।
- बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा होंगी।
CM मोहन यादव का बड़ा फैसला
लंबे इंतजार के बाद मध्यप्रदेश में एक साथ चार बड़े आयोगों को नया नेतृत्व मिला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इन नियुक्तियों पर अपनी मुहर लगाई है। यह फैसला राज्य के सामाजिक न्याय और कल्याण से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
खास बात यह है कि ये चारों आयोग अलग-अलग वर्गों की देखरेख करते हैं। इनमें दलित, आदिवासी, महिला और बच्चे जैसे संवेदनशील वर्ग शामिल हैं। एक साथ चारों की नियुक्ति होना अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक कदम है।
अनुसूचित जाति आयोग: कैलाश जाटव
मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) आयोग का अध्यक्ष पद कैलाश जाटव को सौंपा गया है। 23 अप्रैल 2026 को इस संबंध में सरकारी आदेश भी जारी हो चुका है। आदेश क्रमांक CAB/0001/2026-Sec-5-63(SCW) के तहत यह नियुक्ति अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम 1995 की धारा 3 के तहत की गई है।
जाटव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू है और तीन साल के लिए है। यह आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किया गया और उप सचिव शंकरलाल सिंगाड़े के डिजिटल हस्ताक्षर इस पर हैं। आयोग में रामलाल मालवीय और बारेलाल अहिरवार को सदस्य बनाया गया है।
दो सदस्य भी नियुक्त हुए
SC आयोग मेंअध्यक्ष के साथ-साथ दो और नियुक्तियां भी की गई हैं। रामलाल मालवीय को आयोग का सदस्य बनाया गया है। बारेलाल अहिरवार को भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इन दोनों की नियुक्ति भी तीन वर्ष के लिए है और तत्काल प्रभाव से मानी जाएगी। आयुक्त या संचालक, अनुसूचित जाति विकास विभाग को पदेन (Ex-Officio) सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह एक स्थायी व्यवस्था है, जो पद के साथ जुड़ी रहती है।
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महिला आयोग: रेखा यादव
मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग (State Women Commission) की नई अध्यक्ष रेखा यादव होंगी। यह आयोग प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी शिकायतों पर सुनवाई के लिए बना है। रेखा यादव की नियुक्ति से उम्मीद है कि आयोग और ज्यादा सक्रिय होगा।
महिलाओं से जुड़े मामले जैसे घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और अन्य शिकायतें इस आयोग के दायरे में आती हैं। नई अध्यक्ष के साथ इन मुद्दों पर तेजी से काम होने की संभावना है।
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अनुसूचित जनजाति आयोग: रामलाल रौतेल
मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) आयोग की बागडोर रामलाल रौतेल को दी गई है। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी रहती है। इस आयोग की जिम्मेदारी है कि वह उनके संवैधानिक अधिकारों की निगरानी करे और जरूरत पड़ने पर सरकार को सिफारिशें दे।
रौतेल के अलावा भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को आयोग का सदस्य बनाया गया है। ST आयोग मेंरौतेल की नियुक्ति से आदिवासी इलाकों में आयोग की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। प्रदेश के कई जिलों में जनजातीय समुदाय के मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे हैं।
बाल संरक्षण आयोग: डॉ. निवेदिता शर्मा
मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (State Commission for Protection of Child Rights) की नई अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा को बनाया गया है। यह आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल श्रम, बाल विवाह और बच्चों से जुड़े अपराधों पर नजर रखता है। डॉ. शर्मा की नियुक्ति इस संदर्भ में काफी अहम मानी जा रही है।
बच्चों से जुड़े मामले बेहद संवेदनशील होते हैं और इस आयोग को मजबूत नेतृत्व की जरूरत हमेशा रहती है। डॉ. निवेदिता शर्मा के अनुभव और योग्यता से इस आयोग को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव तो 2023 में हो चुके हैं। अब 2028 का चुनावी दौर नजदीक आने लगा है। ऐसे में इन आयोगों को मजबूत करना सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।