एमपी में बनेंगे 5 नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, 63 हजार करोड़ खर्च करेगी सरकार, भोपाल-मंदसौर समेत इन शहरों को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़कें किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक जीवन रेखा होती हैं। सरकार की यही सोच है कि मध्यप्रदेश का कोई भी गांव, कस्बा या बड़ा शहर बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से पीछे न छूटे। सरकार का मुख्य लक्ष्य यही है कि प्रदेश के हर इलाके को बारहमासी मजबूत सड़कों से सीधे जोड़ा जाए।
सीएम ने आगे बताया कि प्रदेश में स्टेट हाईवे, फोर लेन, सिक्स लेन, 8 लेन और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के जरिए एक बेहद आधुनिक सड़क तंत्र तैयार किया जा रहा है। इससे पूरे राज्य का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
निर्माण कार्यों में ढिलाई नहीं
बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में जिन सड़कों का निर्माण चल रहा है, उनकी रफ्तार तुरंत बढ़ाई जाए। सभी सड़कों को तय समय पर पूरा किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पूरे मध्यप्रदेश में सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है। इसके लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा। सीएम ने लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उद्योग विभाग और मप्र हाउसिंग बोर्ड को एक टीम की तरह काम करने के निर्देश दिए। इससे सड़क निर्माण का काम तेजी से होगा और बीच में कोई रुकावट नहीं आएगी।
किन शहरों के बीच बनेंगे ये ग्रीनफील्ड कॉरिडोर्स
बैठक में बताया गया कि करीब 63 हजार 296 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इन पांचों कॉरिडोर की कुल लंबाई 1,398 किलोमीटर होगी। ये सभी 4 लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होंगे। इन पर गाड़ियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए सड़क के किनारों पर पेव्ड शोल्डर भी बनाए जाएंगे। इन सभी कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
ये 5 बड़े ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इन शहरों को आपस में जोड़ेंगे...
- भोपाल से मंदसौर कॉरिडोर: मालवा क्षेत्र के प्रमुख हिस्से को सीधे राजधानी भोपाल से जोड़ने का काम करेगा।
- सागर से सतना कॉरिडोर: बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र को आपस में जोड़ेगा। इसकी कुल लंबाई 227 किलोमीटर होगी।
- जबलपुर से आशापुर कॉरिडोर: महाकौशल और निमाड़ क्षेत्र के बीच तेज सफर तय कराएगा। इसकी कुल लंबाई 358 किलोमीटर होगी।
- भोपाल से ग्वालियर कॉरिडोर: राजधानी भोपाल से चंबल-ग्वालियर अंचल को सीधा और सुगम बनाएगा। इसकी कुल लंबाई 320 किलोमीटर होगी।
- कटनी से सिंगरौली कॉरिडोर: प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और कोयलांचल क्षेत्र को सीधी कनेक्टिविटी देगा। इसकी कुल लंबाई 235 किलोमीटर होगी।
बैठक में इन प्रस्तावों को भी मिली हरी झंडी
सड़क निर्माण के अलावा मुख्यमंत्री ने निगम के कामकाज को बेहतर बनाने और आम लोगों को राहत देने से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए हैं।
जावरा-नयागांव परियोजना में हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी: बीओटी (BOT) योजना के तहत 4 लेन जावरा-नयागांव सड़क परियोजना में निगम की पूरी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दे दी गई है।
निगम में नए पदों को मंजूरी: सड़क विकास निगम का कामकाज बेहतर बनाने के लिए मुख्य अभियंता के 2, महाप्रबंधक के 3 और उप महाप्रबंधक के 5 नए पद बनाए जाएंगे।
विधि सहायकों का मानदेय बढ़ेगा: निगम में काम करने वाले विधि सहायकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
भोपाल में नए भवन का अधिग्रहण: अरेरा हिल्स स्थित मप्र तिलहन संघ के पीएएम भवन को अधिग्रहित करने की मंजूरी दी गई है। यह भवन लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के अधीन आता है।
स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति और परियोजनाओं का हस्तांतरण: निगम में एक स्वतंत्र संचालक नियुक्त किया जाएगा। साथ ही बैंक या वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेकर अपग्रेड होने वाले राज्य राजमार्गों और अन्य परियोजनाओं का मालिकाना हक सड़क विकास निगम को सौंपा जाएगा।