अभय जोधपुरकर ने बढ़ाया एमपी का मान, 72वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड से हुए सम्मानित

Kaushiki | Sept 23, 2026, 08:53 IST
national film award
मध्य प्रदेश के सेंधवा निवासी गायक अभय जोधपुरकर को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का सम्मान मिला है। गुजरात में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मराठी गीत के लिए रजत कमल प्रदान किया।

National Film Award: मध्य प्रदेश के छोटे से शहर सेंधवा के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। यहां के प्रतिभाशाली गायक अभय जोधपुरकर ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्हें 22 सितंबर को देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया।



येग्रैंड इवेंट गुजरात में बहुत ही शानदार तरीके से आयोजित हुआ। इस समारोह में देश के महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद अभय को सम्मानित किया। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक के रूप में चुना गया और रजत कमल दिया गया।



अभय को यह राष्ट्रीय सम्मान मराठी फिल्म 'घरात गणपति' के बहुत ही सुंदर गीत 'नवसाची गौरी माझी' के लिए मिला है। इस खास मौके पर अभय के माता-पिता भी वहीं मौजूद थे। बेटे को इतना बड़ा पुरस्कार मिलता देख उनकी आंखें खुशी से छलक उठीं।



यह पल न केवल अभय के परिवार के लिए बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व से भरा हुआ था। सेंधवा शहर में जैसे ही यह खबर पहुंची, लोग सड़कों पर उतर आए। हर तरफ आतिशबाजी हुई और मिठाइयां बांटकर इस जीत का जश्न मनाया गया।



दिल्ली से बाहर हुआ पहला बड़ा आयोजन

72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। यह पहली बार हुआ जब यह आयोजन दिल्ली से बाहर किसी दूसरे राज्य में किया गया।



इस कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां और तकनीक से जुड़े दिग्गज पहुंचे थे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक-एक करके सभी विजेताओं को पुरस्कार बांटे। अभय जोधपुरकर जब मंच पर पहुंचे तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।



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एआर रहमान के म्यूजिक स्कूल से शुरुआत

अभय जोधपुरकर का संगीत का यह सफर बहुत ही संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है। उन्होंने संगीत की बारीकियां महान संगीतकार ए.आर. रहमान के संगीत विद्यालय से सीखी हैं। उन्होंने चेन्नई स्थित केएम म्यूजिक कंजरवेटरी से पढ़ाई पूरी की।



इसके बाद उन्होंने साल 2012 में कन्नड़ फिल्म गॉड फादर से अपने प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत की। उन्हें असली पहचान मशहूर डायरेक्टर मणिरत्नम की तमिल फिल्म 'कदल' के गाने 'मूंगिल थोट्टम' से मिली। इस गाने ने अभय के गायन करियर को एक नई ऊंचाई दी।



बॉलीवुड में मेरे नाम तू से जमाया कब्जा

तमिल और कन्नड़ गानों में सफलता के बाद अभय ने हिंदी सिनेमा का रुख किया। यहां उन्हें शाहरुख खान की बड़ी फिल्म 'जीरो' में गाने का मौका मिला। फिल्म 'जीरो' का उनका गाना 'मेरे नाम तू' आज भी लोगों की जुबान पर है।



इस रोमांटिक ट्रैक ने रिलीज होते ही चार्टबस्टर में अपनी जगह बना ली थी। साल 2019 में इस गाने के लिए अभय को मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड्स में अपकमिंग मेल वोकलिस्ट ऑफ द ईयर चुना गया। इस गाने ने उन्हें बॉलीवुड का चमकता सितारा बना दिया।



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अभय की मल्टी-लैंग्वेज सिंगिंग जर्नी

अभय जोधपुरकर केवल एक भाषा तक सीमित रहने वाले गायकों में से नहीं हैं। उन्होंने भारतीय संगीत की विविधता को बहुत ही खूबसूरती से अपने गले में उतारा है। उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और मराठी भाषाओं में सुपरहिट गाने गाए हैं।



हर भाषा के शब्दों को सही उच्चारण के साथ गाना उनकी सबसे बड़ी खासियत है। इसी खासियत की वजह से उन्हें मराठी फिल्म इंडस्ट्री में भी खूब प्यार मिला। उनका मराठी गीत 'नवसाची गौरी माझी' आज हर किसी के दिल को छू रहा है।



पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े अवॉर्ड्स

राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले भी अभय की अलमारी कई ट्रॉफी से सज चुकी है। साल 2013 में उन्हें फिल्म 'कदल' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला था। इसके बाद साल 2017 में फिल्म 'वनमगन' के तमिल गाने के लिए भी उन्हें सम्मानित किया गया था।



2019 में मेरे नाम तू गाने के लिए उन्हें मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड दिया गया। साल 2022 में भी उन्हें मराठी गानों के लिए मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड मिला था। अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने से उनके करियर में एक नया इतिहास जुड़ गया है।



सेंधवा में जश्न का माहौल

जैसे ही टीवी पर अभय को राष्ट्रपति से अवॉर्ड लेते देखा गया, सेंधवा झूम उठा। स्थानीय लोगों और संगीत प्रेमियों ने इसे शहर का सबसे बड़ा सम्मान बताया। अभय के पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों ने फोन कर पूरे परिवार को बधाइयां दीं।



हर कोई अभय की इस लगन और संगीत के प्रति उनके प्यार की तारीफ कर रहा है। कम उम्र में ही अभय ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी छोटे शहर की मोहताज नहीं होती। उनकी यह सफलता आज के नए युवा कलाकारों को बहुत प्रेरित करेगी।



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