MP ADPO और IBPS Law Mains की तारीख टकराई, अभ्यर्थी अब किसे चुनें? MPPSC से बदलाव की गुहार
1 नवंबर 2026 परीक्षा पर टकराव
1 नवंबर 2026 परीक्षा की तारीख ने विधि स्नातकों को दुविधा में डाला है। मामला दो अलग परीक्षाओं का है। एक परीक्षा मध्य प्रदेश के आयोग की है। दूसरी परीक्षा आईबीपीएस की है। MP ADPO exam date को लेकर अभ्यर्थियों की मुख्य आपत्ति टकराव की है। दोनों परीक्षाएं विधि स्नातकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सोचिए एक बार। जिसने दोनों की तैयारी की हो, वह एक ही दिन किसे चुने?
आईबीपीएस की तारीख पहले घोषित हुई थी
अभ्यर्थी का कहना है कि आईबीपीएस की तिथि पहले घोषित हो चुकी थी। MPPSC ADPO exam की तिथि बाद में घोषित हुई। क्रम देखें तो आईबीपीएस का कार्यक्रम पहले से तय था। एडीपीओ की तारीख उसके बाद आई।
एमपीपीएससी सचिव को पत्र: क्या मांगा
अभ्यर्थी ने एमपीपीएससी सचिव को पत्र लिखकर ध्यान देने की मांग की है। यह पत्र आयोग के सचिव के नाम है। पत्र में कहा गया है कि दोनों परीक्षाएं विधि स्नातकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक ही दिन होने से अभ्यर्थी किसी एक परीक्षा से वंचित रह सकते हैं।
परीक्षा तिथि बदलने की मांग कैसे रखी गई
परीक्षा तिथि बदलने की मांग व्यापक हित के आधार पर रखी गई है। अभ्यर्थियों ने समान अवसर का भी हवाला दिया है। वे चाहते हैं कि एडीपीओ परीक्षा किसी अन्य उपयुक्त तिथि पर हो। पुनर्निर्धारित (रीशेड्यूल) का मतलब है तारीख बदलकर नई तारीख तय करना। उपलब्ध जानकारी में किसी खास नई तारीख का नाम नहीं है। MPPSC exam date change का अनुरोध पत्र में साफ दर्ज है। मकसद साफ है। अभ्यर्थी दोनों परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं।
एमपी एडीपीओ 2026: अभ्यर्थियों पर असर
MP ADPO 2026 की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी विधि स्नातक हैं। इनमें से जो आईबीपीएस की परीक्षा भी देना चाहते हैं, उनके सामने सीधी दिक्कत है। यही वजह है कि वे एडीपीओ की तारीख बदलवाना चाहते हैं। आईबीपीएस एसओ लॉ मेन्स का पूरा नाम स्पेशलिस्ट ऑफिसर लॉ मुख्य परीक्षा है। यह परीक्षा भी विधि स्नातकों के लिए अहम बताई गई है।
अब अभ्यर्थियों के सामने दो रास्ते
फिलहाल हालात से दो रास्ते दिखते हैं। पहला, अभ्यर्थी किसी एक परीक्षा को चुन लें। दूसरा, आयोग तारीख बदल दे। अभ्यर्थी दूसरे रास्ते की मांग कर रहे हैं। पहले रास्ते में किसी एक परीक्षा का अवसर हाथ से जाएगा। यही बात उन्हें असमंजस में डाल रही है।
समान अवसर का सवाल क्यों उठा
समान अवसर का मतलब है कि हर अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने का बराबर मौका मिले। अभ्यर्थियों का तर्क है कि एक ही दिन की परीक्षाएं यह मौका घटा देती हैं। क्या एक ही दिन दोनों परीक्षाओं का मौका मिल सकता है? लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है। तारीख बदली, तो दोनों परीक्षाओं में बैठने का रास्ता खुल सकता है।
आयोग तक बात कैसे पहुंची
अभ्यर्थियों ने सीधे आयोग के सचिव को पत्र लिखा। पत्र में सचिव से इस मामले पर ध्यान देने को कहा गया है। आयोग की परीक्षा की तारीख आयोग ही बदल सकता है। इसी वजह से अभ्यर्थियों ने सीधे उसी से अपील की है।