MP में अग्निवीरों को वर्दी का रास्ता साफ: होमगार्ड और पूर्व सैनिकों का कोटा घटाकर मिलेगा आरक्षण
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में अग्निवीरों को आरक्षण देने की तैयारी तेज हो गई है।
- पुलिस भर्ती में होमगार्ड और पूर्व सैनिकों का कोटा घटाया जाएगा।
- इससे बनी जगह अग्निवीरों के लिए आरक्षित होगी।
- यह प्रस्ताव कई विभागों की सहमति के बाद शासन को भेजा गया है।
- सितंबर में इसे कैबिनेट में पेश करने की तैयारी है।
मध्य प्रदेश में अग्निवीरों को यूनिफॉर्म सर्विस में आरक्षण देने की घोषणा करीब दो साल पहले हुई थी। अब यह घोषणा लागू होने की तरफ आगे बढ़ गई है। सरकार इसके लिए मौजूदा आरक्षण का पूरा गणित बदलने जा रही है। इसका सीधा असर पुलिस, जेल और वन विभाग की भर्तियों पर पड़ेगा।
कैसे बनेगी अग्निवीरों के लिए जगह
मध्यप्रदेश सरकार पुलिस में अग्निवीरों के लिए अलग से नए पद नहीं बढ़ा रही है। इसके बजाय मौजूदा आरक्षण में कटौती कर जगह बनाई जाएगी। यह कटौती मुख्य रूप से होमगार्ड और भूतपूर्व सैनिकों के कोटे में होगी। यानी दोनों वर्गों का हिस्सा घटाकर अग्निवीरों को समायोजित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह तरीका बिना नई भर्ती संख्या बढ़ाए अग्निवीरों को मौका देगा।
पुलिस आरक्षक भर्ती में बदलाव
पुलिस की सामान्य आरक्षक भर्ती में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। फिलहाल इसमें होमगार्ड को 15 फीसदी आरक्षण मिलता है। नए प्रस्ताव के तहत इसे घटाकर 10 फीसदी किया जाएगा। इसी तरह पूर्व सैनिकों का आरक्षण भी घटेगा।
अभी उन्हें 10 फीसदी आरक्षण मिलता है, जिसे घटाकर 7.5 फीसदी किया जाएगा। इन दोनों कटौतियों से कुल 7.5 फीसदी पद खाली होंगे। यही पद सीधे अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिए जाएंगे।
जेल प्रहरी और वनरक्षक में भी असर
यह बदलाव सिर्फ पुलिस आरक्षक भर्ती तक सीमित नहीं है। जेल प्रहरी और वनरक्षक के पदों पर भी आरक्षण का गणित बदलेगा। फिलहाल इन पदों पर होमगार्ड को 30 फीसदी आरक्षण मिलता है। नए प्रस्ताव में इसे घटाकर 20 फीसदी किया जाएगा। इससे निकलने वाले 10 फीसदी पद अग्निवीरों के लिए आरक्षित होंगे। यानी यहां भी होमगार्ड के हिस्से में सीधी कमी आएगी।
एसएएफ और आबकारी में अलग व्यवस्था
हर जगह मौजूदा कोटे में कटौती नहीं होगी। एसएएफ (Special Armed Force) और आबकारी आरक्षक भर्ती में अलग व्यवस्था रखी गई है। इन दोनों भर्तियों में मौजूदा आरक्षण के कोटे में कोई कटौती नहीं की जाएगी। यहां अग्निवीरों के लिए सीधे 10 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण दिया जाएगा। यानी इन दो भर्तियों में अग्निवीरों को अलग से मौका मिलेगा।
कई विभागों ने दी सहमति
गृह विभाग के इस पूरे प्रस्ताव को कई अन्य विभागों की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। इसके अलावा जेल विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग और परिवहन विभाग भी इस पर राजी हो चुके हैं। अब यह प्रस्ताव शासन की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। सरकार की योजना है कि इसे सितंबर महीने में कैबिनेट के सामने पेश किया जाए।
क्यों है इतनी जल्दी
इस पूरी कवायद के पीछे एक अहम वजह है। अग्निवीरों का पहला बैच दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में अपनी चार साल की सेवा पूरी करेगा। सरकार चाहती है कि इससे पहले यह पूरी आरक्षण व्यवस्था लागू हो जाए। इसी वजह से प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को इंतजार करना पड़े।
जनवरी-फरवरी में शुरू होंगी भर्तियां
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी समयसीमा तय कर रखी है। योजना के मुताबिक प्रदेश की यूनिफॉर्म सर्विस की भर्तियां जनवरी-फरवरी में शुरू करने की तैयारी है। इसके पीछे मकसद साफ है। चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले मध्य प्रदेश के मूल निवासी अग्निवीर इन भर्तियों में शामिल हो सकें। इसी कड़ी में प्रस्तावित पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की तैयारी भी साथ-साथ चल रही है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर सितंबर में होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी है। अगर वहां से मंजूरी मिल जाती है, तो नया आरक्षण ढांचा औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसके बाद जनवरी-फरवरी में शुरू होने वाली भर्तियों में यह व्यवस्था सीधे दिखाई देगी। यह बदलाव प्रदेश के हजारों युवाओं के करियर पर असर डाल सकता है, खासकर उन अग्निवीरों पर जो जल्द ही अपनी सेवा पूरी करने वाले हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर देश की सेवा कर चुके अग्निवीरों के भविष्य और रोजगार से जुड़ी है। भारतीय संविधान समान अवसर और सम्मानजनक आजीविका के अधिकार की बात करता है। साथ ही यह खबर होमगार्ड और पूर्व सैनिकों जैसे मौजूदा वर्गों के हितों से भी जुड़ी है, जिनके आरक्षण में बदलाव होने जा रहा है।
नागरिकों को यह जानना जरूरी है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की नीति किस आधार पर बदल रही है। यह खबर पूरी तरह तथ्यात्मक है और किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि नीतिगत बदलाव की स्पष्ट और संतुलित जानकारी देती है, जो पारदर्शी शासन व्यवस्था के लिए जरूरी है।
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