एयर एंबुलेंस से उड़े 159 मरीज, 32 बीजेपी से जुड़े, 44 प्रतिशत मरीज डिप्टी CM के इलाके से
मध्य प्रदेश की पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा मई 2024 में शुरू हुई थी। अब तक इससे 159 मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें से 32 लोग बीजेपी नेता या उनके परिजन हैं। सरकार अब तक इस सेवा पर 36 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। सिर्फ 13 लाभार्थियों ने ही इसका भुगतान किया है।
एमपी की पीएम (प्रधानमंत्री) श्री एयर एंबुलेंस सेवा को स्वास्थ्य विभाग चलाता है। इस सेवा का मकसद हादसों और गंभीर बीमारियों में मरीजों को जल्दी अस्पताल पहुंचाना है। लेकिन अब इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
एक अंग्रेजी अखबार ने इस योजना के दस्तावेज खंगाले। साथ ही 159 में से 119 लाभार्थियों से सीधी बातचीत की। इसी पड़ताल में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
योजना कैसे करती है काम
इस योजना के तहत सड़क हादसों, औद्योगिक दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के मरीजों को मुफ्त उड़ाया जा सकता है। आयुष्मान कार्डधारकों को कहीं भी मुफ्त सेवा मिलती है। बिना कार्ड वालों को राज्य के भीतर सरकारी अस्पताल तक ही मुफ्त सुविधा मिलती है। राज्य से बाहर भेजने पर तय दर से भुगतान करना होता है।
इसके लिए जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की सिफारिश जरूरी होती है। हेलीकॉप्टर का किराया 2.35 लाख रुपए प्रति घंटा है। छह सीटर विमान का किराया 3.90 लाख रुपएप्रति घंटा तय है।
119 लाभार्थियों में से 95 को राज्य के भीतर ही उड़ाया गया। इनमें से 55 सरकारी अस्पताल पहुंचे। इनमें से 47 मरीज एम्स भोपाल गए। बाकी 40 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हुए।
सेवा भोपाल एयरपोर्ट के स्टेट हैंगर से चलती है। यह हैंगर 24 घंटे काम करता है। यह सेवा निजी कंपनी फ्लायोला चलाती है। कंपनी के पास कुल 22 विमान हैं। इनमें से एक हेलीकॉप्टर और एक छह सीटर विमान एयर एंबुलेंस के लिए हैं।
रीवा संभाग को सबसे ज्यादा फायदा
कुल लाभार्थियों में से 44 प्रतिशत यानी 70 लोग रीवा संभाग से हैं। इसमें रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, सतना और मैहर जिले शामिल हैं। यह इलाका उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह क्षेत्र है।
मंत्री राजेंद्र शुक्ल इस पर कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि ज्यादातर लाभार्थी उनके इलाके से हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने भुगतान इसलिए नहीं किया, क्योंकि सरकार कई बार मानवीय आधार पर खर्च खुद उठाती है।
जिन्होंने भुगतान किया
159 में से सिर्फ 13 लोगों ने सेवा का पैसा चुकाया। इनमें बीजेपी नेता राम सज्जन शुक्ल भी शामिल हैं। बाकी लोग इंदौर, भोपाल, उज्जैन, रीवा और जबलपुर के कारोबारी हैं। सभी ने 5 से 10 लाख रुपए के बीच भुगतान किया।
बाहर भेजे गए 64 लोगों में से 31 के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। इनमें से भी सिर्फ 7 लोगों ने भुगतान किया। सात मामले दुर्घटना के विशेष मामलों में गिने गए। कई लाभार्थियों ने कहा कि उनसे कभी पैसे मांगे ही नहीं गए।
पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल भेजा गया था। उन्होंने बताया कि उनसे कोई पैसा नहीं मांगा गया। बीजेपी विधायक चंदन सिंह के बेटे को भी अहमदाबाद मुफ्त में भेजा गया।
बड़ा सवाल- लिस्ट में नाम लेकिन वे उड़े ही नहीं
जांच में तीन ऐसे नाम सामने आए, जिन्हें कभी उड़ाया ही नहीं गया। इसके बावजूद कंपनी को भुगतान किया गया। इनमें कारोबारी मधु वाधवानी, उमेश गुप्ता और पूर्व सांसद राम विलास दास वेदांती शामिल हैं।
वाधवानी और वेदांती के परिजनों ने बताया कि उड़ान से पहले ही उनकी मौत हो गई थी। गुप्ता के परिवार ने विमान की हालत देखकर सफर से इनकार कर दिया था। इस बारे में मंत्री शुक्ल का कहना है कि कंपनी एक बार बुकिंग होने पर तय शुल्क लेती है, चाहे सेवा इस्तेमाल हो या नहीं।
विमानों की हालत पर सवाल
कई लाभार्थियों ने विमान की हालत पर भी सवाल उठाए। घनश्याम त्रिपाठी ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर बिना लॉक के था। उन्होंने कहा कि ज्यादातर उपकरण जंग लगे हुए थे। उनके मुताबिक कोई भी साथ जाने को तैयार नहीं था, फिर भी वे साथ गए।
मंत्री ने दी सफाई
मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने माना कि बेड़े में नए विमान नहीं हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि सभी विमानों के इंजन ठीक हालत में हैं। उन्होंने कहा कि यह सेवा असरदार तरीके से काम कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में मंत्री और विधायक मुख्यमंत्री के स्वेच्छानुदान फंड का इस्तेमाल करते हैं। यह फंड मुख्यमंत्री मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत आर्थिक मदद देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। बाद में इन मामलों को कैबिनेट की मंजूरी भी मिलती है।
योजना में कुछ ऐसे भी मामले हैं जिनमें अंगदान के लिए विमान का इस्तेमाल हुआ। बलिराम कुशवाहा का हृदय और लिवर जबलपुर से भोपाल और इंदौर भेजा गया। सतेंद्र सिंह का हृदय इंदौर से भोपाल पहुंचाया गया।
एक्सपर्ट कोट्स
फ्लायोला की डायरेक्टर कॉर्पोरेट अफेयर्स मोनिका तिवारी ने कहा, "हमारे पास 22 विमान हैं। इनमें से दो एयर एंबुलेंस सेवा के लिए आरक्षित हैं। हम स्वास्थ्य विभाग से मंजूरी लेते हैं।"
FAQ
- एमपी एयर एंबुलेंस योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना मई 2024 में शुरू हुई थी। इसे पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा कहा जाता है। इसे मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग चलाता है। - एयर एंबुलेंस सेवा किसे मुफ्त मिलती है?
आयुष्मान कार्डधारकों को कहीं भी मुफ्त सेवा मिलती है। बिना कार्ड वालों को सिर्फ राज्य के भीतर मुफ्त सुविधा मिलती है। राज्य से बाहर जाने पर तय दर देनी पड़ती है। - अब तक कितना पैसा खर्च हुआ है?
जुलाई तक 36 करोड़ रुपएखर्च हो चुके हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने दी है। इस दौरान 159 मरीजों को सेवा मिली।
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