एमपी में बदलेंगे अनुकंपा नियुक्ति के नियम, माता-पिता का भरण-पोषण न करने पर जाएगी नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है।
- सामान्य प्रशासन विभाग ने नए नियमों का प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग से मंजूरी ले ली है।
- अनुकंपा नियुक्ति के लिए CPCT परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी।
- नौकरी मिलने के भी आश्रित को नौकरी से हटाया जा सकता है।
- दैनिक वेतनभोगियों के निधन पर मिलने वाली राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
एमपी में बदलेंगे अनुकंपा नियुक्ति के नियम
मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी खबर आई है। राज्य सरकार अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब नए नियम पहले के मुकाबले बहुत आसान और कर्मचारियों के पक्ष में होंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। साथ ही इस प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति भी मिल चुकी है। अब बहुत जल्द इस प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक (मोहन कैबिनेट) में मंजूरी के लिए लाया जाएगा।
नए नियम लागू होने के बाद कोई भी विभाग बिना किसी गंभीर कारण के किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा नौकरी से नहीं हटा पाएगा।
CPCT की अनिवार्यता होगी खत्म
इस नए बदलाव में सबसे बड़ी राहत कंप्यूटर दक्षता प्रमाण-पत्र यानी सीपीसीटी को लेकर दी गई है। अभी के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिए सीपीसीटी पास करना जरूरी होता है।
इसके लिए तीन से चार साल का समय मिलता है। वहीं यदि कोई इस समय में परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसकी नौकरी चली जाती है। अब नए नियमों से इस अनिवार्यता को पूरी तरह से हटाया जा रहा है।
इसके साथ ही पहले चर्चा के दौरान यह सुझाव आया था। कोई कर्मचारी तीन साल में सीपीसीटी पास नहीं कर पाता है, तो उसे बाबू या लिपिक के पद से हटाकर चपरासी (चौथी श्रेणी) के पद पर डिमोट कर दिया जाए।
सरकार ने इस विचार को खारिज कर दिया है। यानी अब कर्मचारियों का डिमोशन भी नहीं होगा।
क्या बदलाव हुए और क्या पहले जैसा ही रहेगा?
सरकार के भीतर इस बात पर भी चर्चा चल रही थी कि जो परिवार अनुकंपा नौकरी नहीं लेते हैं, उन्हें मिलने वाला पांच साल का भरण-पोषण भत्ता बंद कर दिया जाए।
बता दें कि यह भत्ता कर्मचारी के आखिरी वेतन के बराबर होता है। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग दोनों ही इसे बंद करने के पक्ष में नहीं थे। इसलिए नए नियमों में भी इस भत्ते को पहले की तरह जारी रखा जाएगा।
वहीं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के निधन पर उनके परिवार को दो लाख रुपए की एकमुश्त सहायता राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारियों की मांग थी कि इस राशि को बढ़ाया जाए। नए नियमों में इसे पहले की तरह ही रखा गया है। साल 2014 से यह राशि इतनी ही मिल रही है।
इन दो मामलों में सख्त रहेगी सरकार
नए नियमों में जहां एक तरफ राहत दी गई है। वहीं कुछ मामलों में नियमों को सख्त भी किया गया है।
परिवार को छोड़ा तो जाएगी नौकरी
कोई बेटा या बेटी अपने माता-पिता के बदले अनुकंपा नियुक्ति पा लेता है, और नौकरी मिलने के बाद अपने परिवार को छोड़ देता है या उनका पेट पालने (भरण-पोषण) से मना करता है, तो उसे सीधे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
लापता कर्मचारियों के नियम
पहले नियम था कि कोई कर्मचारी सात साल तक लापता रहता है, तो उसे मृत मानकर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नौकरी दे दी जाती थी। नए नियमों के मुताबिक यदि नौकरी मिलने के बाद (7 साल बाद भी) उस लापता कर्मचारी का पता चल जाता है, तो आश्रित को मिली अनुकंपा नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
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