5 दिन का मानसून सत्र, 3 दिन में खत्म: विपक्ष के हंगामे के बीच 14 विधेयक पास

Amresh Kushwaha | Jul 23, 2026, 10:58 IST
एमपी विधानसभा का मानसून सत्र खत्म
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तीन दिन में ही खत्म हो गया है। सरकार ने रिकॉर्ड 14 विधेयक पास कराए है। मेडिकल यूनिवर्सिटी बंटवारे और अनुपूरक बजट पर सदन में हंगामा हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तय समय से पहले खत्म हो गया है।
  • पांच दिन का सत्र सिर्फ तीन दिन में समाप्त कर दिया गया है।
  • सरकार ने इस दौरान रिकॉर्ड 14 विधेयक पेश करके पास कराए हैं।
  • मेडिकल यूनिवर्सिटी बंटवारे और अनुपूरक बजट पर जमकर हंगामा हुआ।
  • कांग्रेस ने गुजरात को पैसा देने के मुद्दे पर सरकार को घेरा था।

भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार, 22 जुलाई को खत्म हो गया है। यह सत्र पांच दिन के लिए बुलाया गया था। वहीं, सरकार ने इसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया। इस दौरान सदन में कुल 14 विधेयक पेश हुए हैं।



सभी 14 विधेयक सरकार ने पास भी करा लिए हैं। यह अब तक का रिकॉर्ड माना जा रहा है। तीन दिन के इस सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव हुआ था। कई बार सदन में तीखी नोक-झोंक भी देखने को मिली थी।



मेडिकल यूनिवर्सिटी पर बहस

सदन में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर तीखी बहस हुई। जबलपुर के विधायक इस बंटवारे से नाराज नजर आए। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि 15 साल पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी को बांटने की क्या जरूरत है।



घनघोरिया ने इसे जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र की उपेक्षा बताया। उन्होंने कहा कि यह मेडिकल विशेषज्ञों का अपमान है। वहीं कांग्रेस के ही विधायक महेश परमार ने अलग रुख अपनाया। परमार ने उज्जैन में नई मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलने का समर्थन किया। घनघोरिया ने सवाल किया।



क्या इस फैसले से पहले एक्सपर्ट और छात्रों से राय ली गई? उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की मर्जी से लिया गया। घनघोरिया ने एक तर्क दिया। देश के किसी भी राज्य में दो मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि मध्य प्रदेश में ऐसा क्यों किया जा रहा है।



घनघोरिया ने यह भी बताया कि एक-एक डॉक्टर तीन-तीन जगह सेवाएं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इसका कोई ठोस समाधान नहीं है। घनघोरिया ने एक और मुद्दा भी उठाया। 18 पीएचसी (Primary Health Centre) को निजी संस्थाओं को सौंपा जा रहा है।



सदन में हंगामा

बहस के दौरान सदन में कई बार हंगामा हुआ। विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। हंगामा इतना बढ़ा कि सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में स्पीकर के हस्तक्षेप के बाद कार्यवाही फिर शुरू हो सकी। पूरे तीन दिन के सत्र में यह टकराव कई बार देखने को मिला।



7455 करोड़ का बजट पेश

सदन में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा मौजूद रहे। उन्होंने 7455 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट पर करीब तीन घंटे चर्चा हुई। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने बजट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट में एससी, एसटी और ओबीसी को नजरअंदाज किया गया। यहां एससी का मतलब Scheduled Caste है। एसटी का मतलब Scheduled Tribe और ओबीसी का मतलब Other Backward Classes है।



जवाब में वित्त मंत्री देवड़ा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। देवड़ा ने कहा कि मुख्य बजट में पहले ही पर्याप्त राशि रखी गई थी। उन्होंने माना कि कुछ व्यावहारिक दिक्कतें जरूर हैं। वहीं, उन्होंने कहा कि सरकार राजधर्म निभाते हुए काम कर रही है। देवड़ा ने भरोसा दिलाया। विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।



कांग्रेस का गुजरात वाला आरोप

बाला बच्चन ने अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधा। बच्चन ने कहा कि इससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा राशि नर्मदा घाटी विकास विभाग को मिली है। यह राशि करीब 38 प्रतिशत है।



बच्चन ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार पर गुजरात का पैसा बकाया है। यह रकम 231 करोड़ रुपए है। जबकि गुजरात से मध्य प्रदेश को सात हजार करोड़ रुपए से ज्यादा मिलने थे। उन्होंने कहा कि अब हालात उल्टे हो गए हैं। बच्चन के मुताबिक अब मध्य प्रदेश को ही पैसा देना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया। सरकार ने कर्ज लेने की सारी सीमाएं पार कर दी हैं।



बच्चन ने बताया कि सरकार को ब्याज चुकाना पड़ रहा है। यह रकम करीब 80 करोड़ रुपए है। उन्होंने आरएसएस का मुद्दा भी उठाया। यह डॉ. हेडगेवार का संग्रहालय बनाने से जुड़ा मामला है। बच्चन ने कहा कि इसके लिए पांच करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। वहीं, सरकार अब तक सिर्फ 50 लाख रुपए ही खर्च कर पाई है।



सीएम मोहन यादव का बयान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश को फायदा हुआ है। यादव के मुताबिक राज्य को अतिरिक्त पानी और बिजली मिल रही है।



मुख्यमंत्री ने श्रम संहिता विधेयक को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। यह मामला 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा है। सरकार इसे विधिसम्मत तरीके से आगे बढ़ा रही है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि सरकार सभी वर्गों के हित में काम करेगी।



विधानसभा का यह सत्र तीन दिन में सिमट गया। लेकिन इसमें कई अहम मुद्दे उठे। मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आई। वहीं अनुपूरक बजट पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। गुजरात को लेकर लगाए गए आरोपों ने चर्चा को और गरमा दिया।



सरकार ने हर आरोप का जवाब देने की कोशिश की। विपक्ष ने भी अपनी बात मजबूती से रखी। अब देखना यह होगा कि इन मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। जनता की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर जरूरी है क्योंकि यह जनता के पैसे और अधिकारों से जुड़ी है। विधानसभा जनता की आवाज उठाने की जगह है। सत्र का समय से पहले खत्म होना लोकतांत्रिक बहस के लिए ठीक नहीं माना जाता। मेडिकल यूनिवर्सिटी का बंटवारा सीधे स्वास्थ्य सेवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। बजट में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के हक की बात भी जनहित का मुद्दा है।



सरकार पर लगे कर्ज और गुजरात को पैसा देने के आरोप का असर राज्य की आर्थिक सेहत पर पड़ता है। नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि सदन में कैसे काम कर रहे हैं। यह जानकारी संविधान के पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत के अनुरूप जनता तक पहुंचाई जा रही है।



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