एमपी के मानसून सत्र में एक साथ 8 अहम विधेयक पास, अनुपूरक बजट भी पेश
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश विधानसभा में एक ही दिन में 8 विधेयक पास हुए हैं।
- इनमें यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता विधेयक भी शामिल है।
- कांग्रेस के बहिर्गमन के बीच 4 बिल एकतरफा पास हुए।
- हाईवे, फायर सेफ्टी, श्रम संहिता और धनवंतरी विवि बिल भी पास हुए।
- वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 7765.06 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को हंगामेदार माहौल देखने को मिला। एक ही दिन में सदन में आठ विधेयक पास हुए। इनमें यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता विधेयक भी शामिल रहा। कई बिलों पर कांग्रेस ने विरोध जताया और सदन से बहिर्गमन किया। वहीं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने अनुपूरक बजट भी पेश किया।
अब तक ये विधेयक पारित हो चुके हैं-
- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश कार्य स्थल सशक्तिकरण संहिता यानी श्रम शक्ति संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश धन्वन्तरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक, 2026
एकतरफा पास हुए 4 बिल
कांग्रेस के बहिर्गमन के कारण चार विधेयकों पर सिर्फ एकतरफा चर्चा हुई। इनमें मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक शामिल है। इसके अलावा मध्यप्रदेश उपकर संशोधन विधेयक भी इसी में आता है। धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक और मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक भी इसी सूची में हैं। इन चारों बिलों पर भाजपा के सिर्फ एक-एक विधायक ने अपनी बात रखी। इसके बाद इन्हें पास कर दिया गया। कांग्रेस के विधायकों ने इन बिलों पर वोट नहीं डाला।
कांग्रेस का साथ भी मिला
तीन अन्य विधेयकों पर कांग्रेस के विधायकों ने भी अपनी बात रखी। इनमें मध्यप्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक शामिल है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक भी इसी में आता है। साथ ही मप्र कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता विधेयक पर भी कांग्रेस ने मत रखा। इन बिलों पर कई बिंदुओं पर विरोध भी देखने को मिला। इसके बावजूद तीनों विधेयक सदन में पास हो गए।
यूसीसी बिल हुआ पास
इसी हंगामेदार सत्र में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता विधेयक भी पास हुआ। यह विधेयक भी उन आठ बिलों में शामिल है, जो एक ही दिन में पास हुए है। सदन में इस दौरान हंगामे का माहौल बना रहा। कुल मिलाकर एक ही दिन में सदन ने आठ अहम बिलों को मंजूरी दे दी।
हाईवे पर लगेगा टोल
सबसे पहले बात मप्र राजमार्ग विधेयक की। इस बिल से राज्य सरकार को नई ताकत मिलेगी। सरकार अब किसी भी सड़क को राजमार्ग घोषित कर सकेगी। इससे लगी जमीन के इस्तेमाल पर भी सरकार का नियंत्रण रहेगा। अतिक्रमण रोकने का अधिकार भी सरकार के पास होगा।
जरूरत पड़ने पर सरकार यूजर चार्ज भी लगा सकेगी। पहले राज्य सरकार के पास यह कानूनी अधिकार नहीं था। अब स्टेट हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए टोल वसूला जा सकेगा। इससे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाना आसान होगा। सीधी दूरी यानी एरियल डिस्टेंस के आधार पर भी नए हाईवे बन सकेंगे।
दुकानें अब 24 घंटे खुलेंगी
दूसरा बड़ा बिल कार्यस्थल से जुड़ा है। मप्र कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता, यानी श्रम शक्ति संहिता विधेयक भी पास हुआ। इस कानून के तहत दुकानें अब 24 घंटे खुल सकेंगी। शर्त यह है कि कर्मचारियों की ड्यूटी 8 घंटे में बदली जाए। हफ्ते में 4 दिन 48 घंटे की ड्यूटी का विकल्प भी रहेगा।
यह फैसला कर्मचारी और मालिक आपसी सहमति से ले सकेंगे। गिग वर्कर भी अब इस श्रम संहिता के दायरे में आएंगे। महिला सुरक्षा के लिए कार्यस्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है। जब तक श्रम ट्रिब्यूनल नहीं बनता, तब तक मौजूदा श्रम न्यायालय काम करते रहेंगे।
आग से लापरवाही पर जेल
तीसरा जरूरी बिल फायर सेफ्टी एक्ट से जुड़ा है। इसके तहत आग बुझाने के लिए नया सर्विस कैडर बनेगा। इसका संचालन नगरीय निकाय करेंगे, जबकि निगरानी राज्य सरकार करेगी। नया सर्विस कैडर फायर सेफ्टी डायरेक्टर के अधीन काम करेगा। सेफ्टी नियम तोड़ने पर पांच लाख रुपए तक जुर्माना लगेगा।
आग लगने की झूठी सूचना देने पर 20 हजार रुपए का जुर्माना होगा। हर जगह फायर प्लान और फायर सर्टिफिकेट लेना जरूरी होगा। आग बुझाने में लापरवाही करने वाले कर्मियों को सजा भी मिलेगी। ऐसे कर्मियों को तीन महीने की जेल हो सकती है। या फिर तीन महीने के वेतन के बराबर जुर्माना लगेगा।
उज्जैन में नई यूनिवर्सिटी
यह बिल धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय से जुड़ा है। इस विधेयक के तहत उज्जैन में नई मेडिकल यूनिवर्सिटी बनेगी। इसका नाम धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय रखा गया है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर और चंबल जिलों का अधिकार क्षेत्र इसी को मिलेगा।
यहां कुलपति की जगह अब कुलगुरु नियुक्त होंगे। कुलगुरु बनने के लिए किसी मेडिकल कॉलेज में 10 साल प्रोफेसर रहने का अनुभव जरूरी होगा। राज्य सरकार तीन नामों का पैनल कुलाधिपति को भेजेगी। इन्हीं में से एक नाम कुलगुरु के रूप में चुना जाएगा।
7765 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश
बिलों के अलावा सदन में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया। यह बजट कुल 7765.06 करोड़ रुपए का है। यह मौजूदा बजट के अलावा अतिरिक्त खर्च के लिए मांगा गया है। सरकार को कई योजनाओं के लिए यह अतिरिक्त राशि चाहिए।
बजट में किसे कितना पैसा
इस अनुपूरक बजट में कई अहम प्रावधान किए गए हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप देने के लिए 58.07 करोड़ रुपए रखे गए हैं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए 101 करोड़ रुपए दिए गए हैं। सबसे ज्यादा राशि नर्मदा घाटी विकास विभाग को मिली है। इस विभाग को सिंचाई परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण के लिए 3000 करोड़ रुपए दिए गए हैं। गृह विभाग के तहत भी कई अहम प्रावधान हुए हैं।
इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम, यानी आईसीजेएस (Inter Operable Criminal Justice System) के लिए 98.83 करोड़ रुपए दिए गए हैं। पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 58.32 करोड़ रुपए रखे गए हैं। एनडीआरएफ यानी एनडीआरएफ (National Disaster Response Force) से मिले 397.54 करोड़ रुपए राजस्व विभाग को दिए जाएंगे।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम नागरिकों के लिए जरूरी है क्योंकि यह सीधे उनके अधिकारों और सुविधाओं से जुड़ी है। हाईवे टोल, दुकानों के समय, महिला सुरक्षा और आग से बचाव जैसे कानून जनता के रोजमर्रा जीवन को प्रभावित करते हैं। विधानसभा में पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से बिल पास होना संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है।
नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके प्रतिनिधि किस तरह कानून बना रहे हैं। सरकारी खर्च और बजट की जानकारी भी जनता के प्रति जवाबदेही का हिस्सा है। यह खबर तथ्यों पर आधारित है और किसी दल या व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाती। इसका मकसद सिर्फ सही और संतुलित जानकारी देना है।
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