Synopsis: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है। सीएम मोहन यादव सरकार सत्र के पहले ही दिन यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश कर चुकी है। वहीं, विपक्ष विभिन्न घोटालों और मुआवजा धांधली पर सरकार को घेरने में लगा है।
सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विधानसभा से लेकर मुख्यमंत्री के चैंबर तक जमकर सियासी हंगामा हुआ। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक पर कांग्रेस के विरोध से हुई। वहीं शाम को पेपर लीक मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस विधायक धरने पर बैठ गए।
दूसरे ही दिन विधानसभा ने UCC समेत आठ विधेयकों को मंजूरी दे दी। आज बाकी छह विधेयकों पर चर्चा हो सकती है।
अब तक ये विधेयक पारित हो चुके हैं-
- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश कार्य स्थल सशक्तिकरण संहिता यानी श्रम शक्ति संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश धन्वन्तरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक, 2026
विधानसभा में 14 विधेयक पेश
- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश धन्वन्तरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, 2026
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सरकार पहले उन गांवों में भवन बनवाएगी जहां पंचायत भवन और सामुदायिक भवन नहीं हैं। इससे गांव के लोगों को जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकेंगी।
विधानसभा में मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन विधेयक-2026 भी पारित हो गया। प्रहलाद पटेल ने कहा कि इस बदलाव से पंचायत व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही गांवों के कामकाज में भी सुधार आएगा।
कांग्रेस ने निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए सरकार से पूछा कि यह बदलाव आखिर किसके दबाव में किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक-2026 सदन में पेश किया। चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि सरकार निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 25 एकड़ जमीन और 5 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट की शर्त खत्म कर रही है।
महेश परमार ने आशंका जताई कि नियमों में ढील मिलने से बड़ी संख्या में निजी विश्वविद्यालय खुल सकते हैं। इनमें से कई बाद में बंद हो सकते हैं और छात्रों की फीस लेकर गायब भी हो सकते हैं। इससे छात्रों के भविष्य और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से विधेयक को फिलहाल रोकने और इसका कानूनी परीक्षण कराने की मांग की। परमार ने तंज कसते हुए कहा, दो कमरों की यूनिवर्सिटी से निकले छात्रों से क्या नाले से गैस बनाएंगे। उन्होंने इस विधेयक को “काला विधेयक” बताया और कहा कि इससे शिक्षा का स्तर नीचे जाएगा।
निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक का कांग्रेस ने विरोध किया है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ जमीन की अनिवार्यता खत्म करना ठीक नहीं है। उनका कहना था कि ऐसा करने से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
महेश परमार ने सरकार से इस प्रावधान को लागू नहीं करने की मांग की।
विधानसभा में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक पारित हो गया है। इसके बाद सदन में मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा शुरू हुई।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों से मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इसी मामले को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था।
सिंघार ने आरोप लगाया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने छात्रों को “कीड़ा” कहा था। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराई जाए।
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि मामला मध्य प्रदेश से बाहर का है। विधानसभा के नियमों के मुताबिक इस पर चर्चा नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सूचना सुबह 9 बजे के बाद दी गई थी। इसलिए यह सूचना भी नियमों के अनुसार नहीं थी।
आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अनुपूरक बजट पर भी चर्चा होगी। सरकार ने 7,765.76 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया है।
इस बजट में सबसे ज्यादा 3,000 करोड़ रुपए नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए रखे गए हैं। यह पैसा सिंचाई परियोजनाओं और जमीन अधिग्रहण के भुगतान पर खर्च किया जाएगा।
इसके अलावा कई दूसरी जरूरी योजनाओं के लिए भी बजट में राशि रखी गई है। ऐसे में आज सदन में राजनीतिक बहस के साथ अनुपूरक बजट पर भी लंबी चर्चा हो सकती है।
दूसरे दिन विधानसभा ने UCC समेत आठ विधेयकों को मंजूरी दे दी। आज बाकी छह विधेयकों पर चर्चा हो सकती है।
अब तक ये विधेयक पारित हो चुके हैं-
- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश कार्य स्थल सशक्तिकरण संहिता यानी श्रम शक्ति संहिता विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश धन्वन्तरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक, 2026
दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। विधानसभा में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक रात 11.30 बजे तक धरने पर बैठे रहे। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे।
पटवारी पहले राजभवन (लोकभवन) के सामने धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वहां से हटाया। कुछ ही देर बाद वे विधानसभा पहुंचे।
पटवारी ने कहा, “मुझे अपने विधायकों और नेता प्रतिपक्ष के फैसले पर गर्व है। छात्रों को देशद्रोही और राजद्रोही कहने वाले मंत्री को माफी मांगनी होगी। जब तक माफी नहीं मांगी जाती, कांग्रेस विधायक धरने से नहीं उठेंगे। पार्टी उनके इस फैसले के साथ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले और उन्हें संरक्षण देने वाले ही असली देशद्रोही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
15 मिनट बाद विधानसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है। अब मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही है।
मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधायक आरिफ मसूद से कहा कि अगर वे अपने संशोधन प्रस्ताव पर बहस करना चाहते हैं तो अपनी सीट पर जाकर अपनी बात रखें। इसके बाद सदन में मसूद की ओर से दिया गया संशोधन प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
इस दौरान कांग्रेस विधायक लगातार हंगामा और विरोध करते रहे। विपक्ष के विरोध के बीच ही विधानसभा अध्यक्ष ने समान नागरिक संहिता बिल को पारित घोषित कर दिया।
मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने नजर आए और दोनों तरफ से तीखी नोक-झोंक हुई।
इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में मुस्लिम तुष्टीकरण बंद करो और जय श्रीराम के नारे लगवाए। दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक लगातार यूसीसी विधेयक का विरोध करते रहे।
हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो भी सदस्य इस विधेयक पर अपनी राय देना चाहते हैं, वे सीधे सदन के पटल पर अपना वक्तव्य रख सकते हैं।
इसके बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी और विरोध का सिलसिला जारी रहा।
15 मिनट के स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बीजेपी विधायक सीतासरन शर्मा को यूसीसी विधेयक पर बोलने के लिए आमंत्रित किया। वहीं, उनके बोलते ही कांग्रेस विधायकों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक बार फिर यूसीसी विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग दोहराई। वहीं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत आग्रह किया कि सीतासरन शर्मा को बिना व्यवधान अपनी बात रखने दी जाए।
दूसरी ओर कांग्रेस विधायक 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच भी सीतासरन शर्मा ने अपना भाषण जारी रखा और आखिर में कहा, धिक्कार है ऐसे लोगों पर।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदस्यों से कहा कि मतभिन्नता लोकतंत्र का हिस्सा है, सभी अपनी-अपनी सीटों पर बैठ जाएं, लेकिन जब कांग्रेस विधायक शांत नहीं हुए तो उन्होंने बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा को यूसीसी विधेयक पर अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित कर दिया।
यूसीसी विधेयक पर विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी के विधायकों के बीच जमकर नोकझोंक और हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए, जबकि बीजेपी विधायक और मंत्री चर्चा जारी रखने की मांग पर अड़े रहे। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
यूसीसी विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार लगातार अड़े रहे। इसी बात पर सदन का माहौल गरमा गया और कांग्रेस-भाजपा विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
विरोध जताते हुए कांग्रेस के सभी विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और यूसीसी विधेयक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। वहीं भाजपा के विधायक और मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर डटे रहे। उनका कहना था कि हंगामे की बजाय विधेयक पर चर्चा आगे बढ़नी चाहिए।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आज मंगलवार को दूसरा दिन है। आज सदन में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। कांग्रेस विधायक इस बिल का विरोध कर रहे हैं।सत्र के पहले दिन सोमवार को जब यह बिल सदन में पेश किया गया था, तब कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसका विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि जब विधानसभा की कार्यसूची में यह बिल शामिल नहीं था, तो इसे अचानक कैसे पेश कर दिया गया।इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सहमति बनने के बाद अनुपूरक कार्यसूची जारी की गई थी। इसी कार्यसूची में शामिल और सहमति वाले विधेयकों को सदन में पेश किया गया।आज सदन में हंगामे के आसार हैं। समान नागरिक संहिता समेत करीब 14 विधेयकों पर चर्चा होनी है। कांग्रेस विधायक यूसीसी का विरोध कर रहे हैं, जबकि बीजेपी इसके खुले समर्थन में है।https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/mp-assembly-monsoon-session-ucc-bill-debate-12183034