एमपी विधानसभा में बहस से ज्यादा टकराव, कांग्रेस का वॉकआउट, किसान मुद्दा भी गरमाया

Ramanand Tiwari | Apr 27, 2026, 20:07 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. महिला आरक्षण पर मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा हुआ। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बाद, समाधान के बिना विशेष सत्र समाप्त हुआ।

News In Short

  • महिला आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाया गया।
  • भाजपा ने परिसीमन के बाद आरक्षण की बात रखी।
  • कांग्रेस ने तुरंत आरक्षण लागू करने की मांग की।
  • प्रस्ताव पर चर्चा न होने पर कांग्रेस का वॉकआउट।
  • सदन के बाहर कांग्रेस की नारेबाजी।
  • भाजपा ने कांग्रेस पर “मुद्दे से भागने” का आरोप लगाया।

News In Detail

मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र महिलाओं के आरक्षण पर बुलाया गया था, लेकिन पूरा दिन राजनीति की भेंट चढ़ गया। चर्चा कम हुई, आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा। कांग्रेस वॉकआउट कर गई, भाजपा ने इसे “भागना” बताया। बीच में किसान और गेहूं का मुद्दा भी उछला—लेकिन असली सवाल वही रह गया, महिलाओं को आरक्षण मिलेगा कब?



क्या हुआ सदन में?

सत्र का मकसद ‘नारी शक्ति वंदन’ पर चर्चा था, जिसमें परिसीमन के बाद 33% आरक्षण की बात रखी गई, लेकिन कांग्रेस ने मौजूदा स्थिति में ही आरक्षण लागू करने की मांग उठाई। जब उनकी बात पर चर्चा नहीं हुई, तो उन्होंने सदन छोड़ दिया।



भाजपा vs कांग्रेस: आरोपों की बारिश

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और सदन से भाग रही है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि सरकार जानबूझकर महिला आरक्षण को टाल रही है और चर्चा से बच रही है। साफ है दोनों तरफ आरोप हैं, लेकिन समाधान गायब है।



किसान मुद्दे ने मचाया बवाल

कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा पहुंचने निकले। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया, जिससे तीखी बहस और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। इसके बाद विधायक गेहूं की बोरियां लेकर सदन पहुंचे, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने अंदर ले जाने से रोक दिया।



किसानों का मुद्दा क्यों उठा?

अभिजीत शाह का आरोप था कि किसानों को गेहूं का सही दाम नहीं मिल रहा। उनका कहना था कि मजबूरी में किसान 2000 रुपये में गेहूं बेच रहे हैं और व्यापारियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है, तो किसानों के साथ यह स्थिति क्यों?



CM की गैरमौजूदगी पर सियासत

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इतने अहम मुद्दे पर चर्चा हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं। हालांकि, सत्ता पक्ष ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री अपने कार्यालय से कार्यवाही पर नजर रखे हुए हैं।



विशेष सत्र पर ही उठे सवाल

कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने सत्र के औचित्य पर ही सवाल उठा दिए। उनका कहना था कि जब कानून पहले ही पास नहीं हो पाया या लागू नहीं हुआ, तो इस चर्चा का क्या मतलब? उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कई अन्य गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा ज्यादा जरूरी है।



क्या यह विशेष सत्र वास्तव में महिलाओं के अधिकार के लिए था, या फिर सिर्फ राजनीतिक मंच बनकर रह गया? एक तरफ आरक्षण को भविष्य से जोड़ा जा रहा है, दूसरी तरफ तत्काल लागू करने की मांग है। लेकिन दोनों के बीच महिला अधिकार कहीं खोता दिख रहा है।



पूरे दिन की बहस, हंगामा और आरोपों के बाद भी नतीजा शून्य रहा। महिला आरक्षण फिर “वादा बनाम राजनीति” के बीच अटक गया। अगर यही हाल रहा, तो ‘नारी शक्ति’ सिर्फ नारे में मजबूत रहेगी, जमीन पर नहीं।



ये खबरें भी पढ़ें...



“नारी शक्ति पर सियासत: विधानसभा में ‘आरक्षण’ बहाना, असली खेल टालमटोल का?”



एमपी विधानसभा का विशेष सत्र : ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे MLA, पुलिस से झूमाझटकी, विपक्ष का वॉक आउट



कांग्रेस नेता केके मिश्रा का तंज- रामराज्य में अधिकारी अपमानित, MP में सत्ता का दुरुपयोग



नारी शक्ति पर क्रेडिट वॉर: सदन में महिला आरक्षण बना राजनीतिक हथियार, हकीकत फिर गायब









Tags:
  • कांग्रेस
  • भाजपा
  • महिला आरक्षण
  • मध्य प्रदेश विधानसभा
  • नारी शक्ति