हाईटेक होगा एमपी विधानसभा का शीतकालीन सत्र, NeVA ऐप से पूछ सकेंगे सवाल, एक क्लिक पर दिखेगा स्टेटस
इतना ही नहीं सवाल का डायरी नंबर क्या है यह भी दिख जाएगा। साथ ही उसकी तारीख कौन सी है और वह किस स्थिति में है यह सब भी मोबाइल पर ही साफ-साफ दिख जाएगा।
इस पांच दिन के सत्र में सरकार अपना दूसरा अनुपूरक बजट पेश करेगी और कुछ जरूरी बिल भी पास कराएगी। शुरुआती चार दिनों में सवाल-जवाब और सरकारी कामकाज निपटाए जाएंगे। वहीं आखिरी दिन यानी 11 दिसंबर को गैर-सरकारी कामकाज के लिए तय किया गया है।
आइए जानते हैं कि इस डिजिटल पहल से इस बार विधायकों को क्या-क्या सीधे फायदे मिलने वाले हैं...
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र
बता दें कि यह मध्य प्रदेश की 16वीं विधानसभा का 12वां शीतकालीन सत्र (Madhya Pradesh Assembly Winter Session) है। इस 5 दिवसीय सत्र के दौरान कोई अवकाश नहीं रहेगा।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार इस संक्षिप्त सत्र में दूसरा अनुपूरक बजट और महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराएगी।
कार्यसूची के अनुसार पहले चार दिन प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य होंगे। 11 दिसंबर को दोपहर डेढ़ बजे के बाद अशासकीय कार्य लिए जाएंगे।
विधानसभा पेपरलेस होगी, NeVA से चलेगा कामकाज
इस बार विधानसभा का सत्र तकनीकी रूप से बहुत खास होने जा रहा है। अब विधानसभा की कार्यवाही में सालों से चली आ रही कागजों की प्रक्रिया खत्म होने वाली है। नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के जरिए पूरी कार्यवाही ऑनलाइन होगी। यानी पूरा सिस्टम पेपरलेस हो जाएगा।
पहले हर सत्र में विधायकों के हजारों सवाल, नोटिस और उनके जवाब छापने में कई टन कागज खर्च होता था। इस पर लाखों रुपए भी खर्च होते थे। नई व्यवस्था के लिए विधायकों, उनके निजी सहायकों और विभागों के नोडल अफसरों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।
इस ऑनलाइन व्यवस्था से विभागों के बीच फाइलें भेजने में लगने वाला समय बचेगा। अब सवालों के जवाब तय समय पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। इससे विधानसभा की पूरी कार्यवाही में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
NeVA ऐप या पोर्टल पर लॉगिन कैसे होगा
विधायक अपने टैबलेट पर दिए गए NeVA ऐप आइकन या आधिकारिक पोर्टल mpla.neva.gov.in पर जाकर लॉगिन करेंगे। इसके लिए व्यक्तिगत यूजर आईडी और पासवर्ड जरूरी होगा।
लॉगिन करते ही विधायक के सामने डैशबोर्ड खुलेगा है। इसमें वे पिछले पांच दिनों की अपनी डिजिटल गतिविधियां देख सकते हैं। प्रोफाइल और भेजे गए सवालों का ब्योरा भी इसी पर दिखेगा।
ऑनलाइन सवाल दर्ज करने का तरीका और सुधार
डैशबोर्ड में दिए गए Online Submission विकल्प पर जाकर विधायक तारांकित और अतारांकित सवाल दर्ज कर सकते हैं। इसी विकल्प से शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, स्थगन प्रस्ताव, अशासकीय संकल्प और याचिकाएं भी भेजी जा सकेंगी। इसके लिए New बटन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद विभाग, संबंधित मंत्री और सवाल से जुड़ी जानकारी भरनी होगी।
जब तक विधायक सवाल को सिर्फ Save करके रखते हैं, तब तक वह ड्राफ्ट में रहेगा। स्क्रीन पर ऐसा सवाल लाल रंग की पट्टी में दिखाई देगा। इसका मतलब है कि सवाल अभी विधानसभा सचिवालय तक नहीं पहुंचा है। इस दौरान विधायक एडिट विकल्प पर जाकर सवाल में बदलाव कर सकते हैं। बदलाव करने के बाद Update पर क्लिक करना होगा।
सवाल भेजने पर मिलेगी पुष्टि और PDF रसीद
जैसे ही विधायक Send बटन दबाएंगे, सवाल तुरंत सचिवालय के सर्वर पर पहुंच जाएगा। उसी सेकंड सिस्टम एक आधिकारिक डायरी नंबर जारी करेगा। तारीख और समय भी दर्ज हो जाएंगे।
सिस्टम उस सवाल की आधिकारिक PDF फाइल भी तैयार करेगा। इसे रिकॉर्ड के लिए डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकता है।
सवाल की स्थिति अब ऑनलाइन दिखेगी
पहले किसी सवाल की स्थिति जानने के लिए विधायकों को सचिवालय की अलग-अलग शाखाओं में संपर्क करना पड़ता था। अब यह जानकारी ऑनलाइन मिल सकेगी। Question Statistical Report और Question Status Report मेनू में सवालों का ताजा स्टेटस देखा जा सकेगा। स्क्रीन पर ही पता चल जाएगा कि सवाल अभी विचाराधीन है, मंजूर हुआ है, खारिज हो गया है या उसका जवाब आ चुका है।
वहीं Question List में यह जानकारी भी मिलेगी कि सदन की किस तारीख को किस विभाग का कौन सा सवाल पूछा जाना है। इसके साथ सवाल का क्रमांक भी दर्ज रहेगा।
नोटिस की सीमा सिस्टम खुद रोकेगा
सदन के नियमों के मुताबिक हर सदस्य के लिए नोटिस की एक सीमा तय होती है। NeVA में यह सीमा अपने आप लागू होती है। नोटिस भेजते ही सिस्टम स्क्रीन पर अलर्ट दिखाता है। अलर्ट बताता है कि कुल कोटे में से कितने नोटिस खर्च हो चुके हैं। अब कितनी सीमा बची है। सीमा खत्म होते ही सिस्टम अतिरिक्त नोटिस स्वीकार नहीं करेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है?
विधानसभा जनता के मुद्दों का सबसे बड़ा मंच है। अब सवालों की प्रक्रिया कागज की फाइलों से निकलकर ऑनलाइन हो रही है। हर सवाल का डायरी नंबर और स्थिति सामने रहेगी, इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। कागज, समय और सरकारी पैसे की बचत भी होगी। पहले छपाई में हर सत्र में लाखों रुपए तक खर्च होते थे। बदलाव से सदन का कामकाज आसान और साफ होने की उम्मीद है।