मुरैना के लाखों किसानों की जमीन पर फिर संकट के बादल, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
ऐसे समझें पूरा मामला..
- भूमि संकट: अटल प्रोग्रेस-वे से मुरैना के 61 गांवों की उपजाऊ जमीन पर संकट गहराया।
- भारी विरोध: किसानों की 90% बहुफसली खेती बचाने के लिए सड़क बीहड़ से निकालने की मांग।
- बयानों में अंतर: पीडब्ल्यूडी मंत्री ने एलाइनमेंट बदलने का वादा किया, पर एनएचएआई पुराने गजट पर अड़ी
- सख्त पाबंदियां: प्रशासन ने इन प्रभावित गांवों में जमीनों की रजिस्ट्री और नई बोरिंग पर रोक लगाई।
- आंदोलन की चेतावनी: मांग पूरी न होने पर किसान सभा ने दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करने की धमकी दी।
मुरैना जिले के 61 गांवों की जमीन पर संकट आ गया है। अटल प्रोग्रेस वे सड़क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण होना है। एनएचएआई ने पुराने गजट नोटिफिकेशन के आधार पर आदेश दे दिया है। इससे पहले मंत्री ने विधानसभा में एलाइनमेंट बदलने का आश्वासन दिया था। अब किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
मुरैना जिले में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। जौरा क्षेत्र के 61 गांवों के करीब एक लाख, सात हजार किसान परेशान हैं। वजह है अटल प्रोग्रेस वे यानी चंबल एक्सप्रेस वे परियोजना।
अटल प्रोग्रेस वे क्या है
यह एक ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना है। यह राजस्थान के कोटा से शुरू होती है। मध्य प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड से गुजरते हुए यह उत्तर प्रदेश के इटावा तक जाएगी। इसकी लंबाई 72.035 किलोमीटर से 378.170 किलोमीटर तक प्रस्तावित है।
इस निर्माण के लिए बीच में आने वाली जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। यह अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ – National Highways Authority of India) अधिनियम 1956 की धारा 3(A) के तहत होगा।
पहले क्या हुआ था
किसानों ने इस एलाइनमेंट का पुरजोर विरोध किया था। उनका कहना था कि इस रूट में 90 प्रतिशत किसानों की भूमि जा रही थी। किसानों की मांग थी कि सड़क को चंबल के बीहड़ों के बीच से निकाला जाए। इससे उनकी जमीन बच सकती थी।
चंबल घाटी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने आंदोलन किया। यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुंचा।
22 अप्रैल 2026 को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी – Public Works Department) के मंत्री राकेश सिंह ने विधानसभा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस बैठक में एलाइनमेंट बदलने का फैसला लिया गया था। सरकार ने कहा था कि सड़क बीहड़ों से निकाली जाएगी। साथ ही दोनों तरफ औद्योगिक गलियारा नहीं बनाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद किसानों ने विरोध रोक दिया था।
अब क्यों भड़का विवाद
हाल ही में एनएचएआई के परियोजना निदेशक भरत सिंह जोईमा ने एक पत्र भेजा। यह पत्र अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, जौरा को भेजा गया। पत्र में 12 अक्टूबर 2022 के पुराने गजट नोटिफिकेशन का हवाला दिया गया। इसी पुराने आधार पर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश विधानसभा में दी गई जानकारी से बिलकुल अलग है। इसी वजह से किसानों की नींद उड़ गई है। उन्हें लगता है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है।
किसानों की मांग
किसानों का आरोप है कि यह कार्रवाई अनुचित और अवैधानिक है। उनका कहना है कि यह विधानसभा की अवमानना का मामला बनता है। किसानों ने इसे विशेषाधिकार हनन का प्रकरण बताया है।
उन्होंने स्थानीय विधायक से मांग की है कि वे विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएं। चंबल घाटी बचाओ संघर्ष समिति और किसान सभा के पदाधिकारियों ने भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि सड़क को समतल और बहुफसली जमीनों से निकाला गया तो वे फिर आंदोलन करेंगे। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुरूप ही कार्रवाई हो।
रजिस्ट्री-बोरिंग पर रोक
इस बीच एसडीएम ने भी एक पत्र जारी किया है। यह पत्र तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को भेजा गया है। इसके अनुसार 61 गांवों की जमीनों की न रजिस्ट्री होगी, न बोरिंग होगी और न बंटाकन होगा। इस आदेश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
61 गांवों की सूची
जिन गांवों की जमीन पर असर पड़ेगा उनमें वराहना, गलैथा, सिहोरी, बरेड, सिंगरौली, बिरखापुर, डिडौखर, तिलौआ, जारह, होलापुरा, बंधा, हेतमपुर, मेथाना, जखौना, तिलौछा, गौसपुर, मृगपुरा, खसखेड़ा, सिकरौदा, जतावर, बरेथा, पिपरखेड़ा, पचोखरा, जौहा, खिरेटा, इडोली, रिठौना, ककराली, बान का पुरा, बिचौला, रूपा का तौर, भाट का तौर, बाला का तौर खालसा, केरला, खेरली जागीर, डोंगरपुर गिर्द, केमारी, पिपरघान, देवपुर, झुंडपुरा, चिन्नौनी चंबल, तिन्दोखर, हुसैनपुर, जापथाप, मिलौआ कोटरा, रन्छौरपुरा, रजौदा, महदेवा, कोल्हू डांडा, मोहनपुर, छिनवरा, उत्तमपुरा, ताजपुर, सुखपुरा, सरसैनी, विंडवा देवगढ़, मथुरापुरा, बावड़ी, दादनपुरा और गुढ़ा चंबल शामिल हैं।
FAQ
- अटल प्रोग्रेस वे परियोजना क्या है?
यह राजस्थान के कोटा से शुरू होकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक जाने वाली एक ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना है। इसे चंबल एक्सप्रेस वे भी कहा जाता है। - मुरैना के कितने गांव प्रभावित होंगे?
जौरा क्षेत्र के 61 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जानी है। इससे करीब एक लाख, सात हजार किसान प्रभावित होंगे। - किसान विरोध क्यों कर रहे हैं?
सरकार ने विधानसभा में एलाइनमेंट बदलने का आश्वासन दिया था। लेकिन एनएचएआई ने पुराने गजट के आधार पर आदेश जारी कर दिया, जिससे किसान नाराज हैं।
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