बागेश्वर धाम को विदेश से मिलेगा चंदा, पंडित धीरेंद्र शास्त्री की संस्था को केंद्र से मिली मंजूरी
News In Short
- बागेश्वर धाम की संस्था को केंद्र सरकार ने विदेशी दान लेने की मंजूरी दे दी है।
- यह मंजूरी FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत मिली है।
- यह अनुमति गृह मंत्रालय ने जारी की है।
- अब संस्था विदेश में बसे अनुयायियों से कानूनी तरीके से दान ले सकेगी।
- दान का पूरा हिसाब सरकार को देना अनिवार्य होगा।
News In Detail
बागेश्वर धाम को मिली बड़ी मंजूरी
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम अब विदेश से दान लेने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत हो गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने FCRA के तहत यह अनुमति दी है। इससे पहले विदेश से दान लेने के लिए हर बार खास इजाजत लेनी पड़ती थी। अब यह बाधा दूर हो गई है।
यह मंजूरी बागेश्वर जन सेवा समिति को मिली है। यह समिति ग्राम गड़ा, जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश में पंजीकृत है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की देखरेख में यह संस्था काम करती है।
विदेश में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुयायी
बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पिछले कुछ वर्षों में देशभर में चर्चित हुए हैं। उनके धार्मिक कार्यक्रमों में लाखों की भीड़ जुटती है। उनके अनुयायी केवल भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और अन्य देशों में भी हैं।
ऐसे में FCRA की मंजूरी उनकी संस्था के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब तक विदेशी अनुयायी चाहकर भी सीधे संस्था को दान नहीं दे पाते थे। इस मंजूरी के बाद यह रास्ता खुल गया है।
क्या काम करती है यह संस्था
बागेश्वर जन सेवा समिति केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है। यह संस्था धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी काम करती है।
दान से मिलने वाले फंड का उपयोग शिक्षा, सेवा और सामाजिक योजनाओं पर किया जाता है। अब विदेश से मिलने वाली राशि भी इन्हीं कामों में लगाई जाएगी।
FCRA क्या है और क्यों जरूरी है
FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम एक केंद्रीय कानून है। इसके तहत कोई भी संस्था, संगठन या व्यक्ति विदेश से पैसा तभी ले सकता है जब उसे सरकार से अनुमति मिली हो।
इस कानून को गृह मंत्रालय लागू करता है। अनुमति मिलने के बाद संस्था को हर साल अपनी विदेशी आमदनी और खर्च का पूरा ब्यौरा सरकार को देना होता है। यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहती है।
क्या नियम मानने होंगे
FCRA की मंजूरी के साथ कई सख्त शर्तें भी जुड़ी होती हैं। विदेश से आने वाली हर राशि एक तय बैंक खाते में ही जमा होनी चाहिए। साथ ही विदेश से आए पैसे का स्रोत और उपयोग दोनों का रिकॉर्ड रखना होगा।
समय-समय पर सरकार को रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ती है। संस्था को पारदर्शिता के साथ काम करना अनिवार्य है।
धाम की गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
इस मंजूरी के बाद बागेश्वर धाम की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। विदेशों में बसे लाखों अनुयायी अब सीधे संस्था को आर्थिक सहयोग दे सकेंगे। इससे शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ज्यादा संसाधन जुट सकेंगे।
FAQ
- बागेश्वर धाम को FCRA मंजूरी क्यों मिली और इसका क्या मतलब है?
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने बागेश्वर जन सेवा समिति को FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत विदेश से दान लेने की मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि अब यह संस्था विदेश में रहने वाले अनुयायियों से कानूनी तरीके से दान ले सकती है। पहले हर बार इसके लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ती थी। - FCRA के तहत विदेशी दान लेने पर कौन से नियम लागू होते हैं?
FCRA के तहत मंजूरी प्राप्त संस्था को एक तय बैंक खाते के जरिए ही विदेशी दान लेना होता है। पैसे का स्रोत और उपयोग दोनों का पूरा हिसाब रखना अनिवार्य है। समय-समय पर सरकार को रिपोर्ट जमा करनी होती है। नियमों का उल्लंघन होने पर मंजूरी रद्द की जा सकती है। - बागेश्वर जन सेवा समिति किन क्षेत्रों में काम करती है?
बागेश्वर जन सेवा समिति धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में काम करती है। यह संस्था मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम गड़ा में स्थित है। दान से मिलने वाले फंड का उपयोग शिक्षा, सेवा और अन्य सामाजिक कार्यों में किया जाता है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इस संस्था की देखरेख करते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए..
बाबा बागेश्वर ने मुस्लिम परिवार को बनाया सनातनी, बोले हिंदुओं को कटने बंटने मिटने नहीं देंगे
मध्यप्रदेश न्यूज: धीरेंद्र शास्त्री ने खोला चेलों का पर्चा, बोले- लड़कियों के चक्कर में बन रहे सेवादार
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बोले- हमें चार बच्चे पैदा करने चाहिए, मेरी शादी हुई तो मैं भी दूंगा योगदान
एमपी न्यूज: बाबा बागेश्वर की कथा को लेकर दो नेताओं में भिड़ंत