मध्यप्रदेश के बैगाओं के लिए न प्राधिकरण बना न बटालियन, क्या ऐसे होगा आदिवासियों का विकास ?

Atul Dwivedi | Oct 26, 2026, 19:19 IST
एमपी में बैगाओं को विकास प्राधिकरण का इंतजार
मध्यप्रदेश में बैगा विकास प्राधिकरण के गठन का इंतजार जारी है। बैगा समाज ने सरकारी घोषणाओं के अमल पर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि संबंधित फाइल भोपाल में लंबित है। सीधी और सिंगरौली को प्राधिकरण में शामिल करने की मांग भी उठी है। समाज ने 28 अक्टूबर को प्रदर्शन की तैयारी की है। विशेष पिछड़ी जनजातियों की प्रस्तावित बटालियन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बैगा विकास प्राधिकरण के गठन की फाइल अटकी!

दो दो मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की, उसके बाद भी आज तक कुछ नहीं हुआ। ये कहना है विजय बहादुर का। विजय बहादुर सिंगरौली के रहने वाले हैं। बैगा समाज से आते हैं। इन्हें उम्मीद थी कि बैगा विकास प्राधिकरण बनने से इनके लोगों को रोजगार मिलेगा। बैगा समाज के कल्याण के लिए अलग से बजट मिलेगा। लेकिन आलम ये है कि बैगा विकास प्राधिकरण के गठन की फाइल आज भी सामान्य प्रशासन विभाग के पास पड़ी है। 2011 की जनगणना कहती है कि आदिवासी आबादी के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले नंबर पर है। आदिवासियों की कुल आबादी का 14 फीसदी हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश में है। उसके बाद भी आदिवासी सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया है।



क्या है बैगा विकास प्राधिकरण ?

मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश कि विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल, बैगा के लिए बैगा विकास प्राधिकरण के गठन का फैसला किया था। प्राधिकरण बनने से उम्मीद थी कि बैगा समुदाय(Baiga community) का सर्वांगीण विकास होगा। उनका उत्थान किया जाएगा। उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उनकी संस्कृति के लिए काम किया जाएगा। लेकिन सरकारी दावों की पड़ताल में पता चला कि बैगा समुदाय आज भी प्राधिकरण बनने का सिर्फ इंतजार कर रहा है।



बैगा विकास प्राधिकरण में जिन जिलों को शामिल किया गया था, उनमें मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, शहडोल, अनुपपूर और उमरिया शामिल थे। लेकिन सीधी और सिंगरौली में रहने वाली बैगा जनजाति ने भी इस प्राधिकरण में शामिल होने की मांग उठाई। बैगा समाज संघ मध्यप्रदेश का कहना है कि सीधी और सिंगरौली में लगभग 1 लाख बैगा आबादी रहती है। इसलिए इन दोनों जिलों को भी बैगा विकास प्राधिकरण में जगह मिलनी चाहिए। इसके लिए सीधी और सिंगरौली के बैगा 28 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन भी करने वाले हैं।



प्राधिकरण में शामिल होने की मांग क्यों ?

द सूत्र की पड़ताल में पता चला कि प्राधिकरण में जो जिले शामिल होंगे, वहां रहने वाली बैगा जनजाति को कई फायदे हैं। बैगा समाज संघ के विजय बहादुर का कहना है कि प्राधिकरण में शामिल होने के बाद उनके लोगों को सीधे सरकारी नौकरी में फायदा मिलेगा। तृतीय श्रेणी की नौकरी में सीधे भर्ती होगी। आजीविका के लिए मदद आसानी से मिलेगी। बैगा विकास प्राधिकरण में जो जिले शामिल होंगे वहां के लोगों के लिए मछली पालन, बकरी पालन जैसी योजनाओं के लिए लोन आसानी से मिलेगा। इसलिए सीधी और सिंगरौली के बैगा भी प्राधिकरण में शामिल होना चाहते हैं।



द सूत्र की पड़ताल में पता चला कि बैगा विकास प्राधिकरण का मुद्दा आज का नहीं बल्कि सालों पुराना है। 1997 में दिग्विजय सिंह ने बैगा विकास प्राधिकरण (Baiga Development Authority) का प्रपोजल तैयार करवाया था। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान की सरकार में काम थोड़ा आगे बढ़ा। 2011 में शिवराज ने ही घोषणा की थी कि सीधी और सिंगरौली के बैगा को भी प्राधिकरण का फायदा मिलेगा। बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बैगा विकास प्राधिकरण के गठन को तेजी से करने के निर्देश दिए। लेकिन दावा किया जाता है कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद भी फाइल सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के पास पेंडिंग है।



बटालियन भी नहीं बनी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आदिवासियों के लिए एक और ऐलान किया था। सीएम ने कहा था कि राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं के लिए बटालियन बनाई जाएगी। इस बटालियन में विशेष पिछड़ी जनजाति के युवा ही शामिल होंगे। ताकि उन्हें सीधे रोजगार मिल सके। शौर्य संकल्प योजना के तहत आदिवासी युवाओं को आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की ट्रेनिंग देने की बातें कही गई थीं। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी काफी काम होना बाकी है। क्योंकि घोषणा अपनी जगह है घोषणा के बाद काम कितना हुआ ये ज्यादा जरूरी है।

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