MP बार काउंसिल चुनाव में बड़ा बदलाव: महाधिवक्ता प्रशांत सिंह बने अध्यक्ष
News in Short
- महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को बनाया गया स्टेट बार काउंसिल का अध्यक्ष।
- अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपेन्द्र कुशवाहा और DSG सुयश मोहन गुरु बने सदस्य।
- कुल 138 में से 19 नामांकन फॉर्म निरस्त, 119 प्रत्याशी बचे।
- 11 फॉर्म बार पदाधिकारियों के, 3 पर अनुशासनात्मक केस, 5 पर आपराधिक मामले।
- निरस्त अभ्यर्थियों को 1.25 लाख फीस वापसी और अपील का अधिकार।
News in detail
मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल की कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हुआ। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने नई व्यवस्था लागू की। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। ग्वालियर के महाधिवक्ता दीपेन्द्र कुशवाहा और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु को सदस्य बनाया गया। यह कदम चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
नामांकन प्रक्रिया पर कड़ी नजर
चुनाव प्रक्रिया के तहत अब तक 138 नामांकन फॉर्म की जांच की गई, जिसमें से 19 अधिवक्ताओं के फॉर्म निरस्त कर दिए गए हैं। इसके बाद 119 प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की गई है। निर्वाचन अधिकारी पूर्व जस्टिस एस.के. पालो के अनुसार यह कार्रवाई निर्धारित नियमों के आधार पर की गई है। पूरी प्रक्रिया पर हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की निगरानी बनी हुई है।
किन कारणों से खारिज हुए फॉर्म
निरस्त किए गए नामांकन फॉर्म में अधिकांश उन अधिवक्ताओं के हैं जो विभिन्न बार एसोसिएशन में पदाधिकारी थे। 11 फॉर्म "एक व्यक्ति-एक पद" नियम के तहत निरस्त किए गए। 3 अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने के कारण उन्हें अपात्र माना गया। 5 अन्य मामलों में आपराधिक प्रकरणों के कारण नामांकन खारिज किया गया। इससे साफ है कि इस बार चुनाव में पात्रता नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
निरस्त अभ्यर्थियों को फीस वापसी और अपील का मौका
निर्वाचन नियमों के तहत जिन अभ्यर्थियों के फॉर्म निरस्त किए गए हैं, उन्हें जमा की गई 1 लाख 25 हजार रुपए की राशि वापस करने का निर्देश दिया गया है। इन अभ्यर्थियों को हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी, जबलपुर के समक्ष अपील का अधिकार दिया गया है। इससे प्रभावित प्रत्याशियों को न्यायिक राहत का विकल्प उपलब्ध है।
पहले से चल रहे विवादों के बीच बढ़ी हलचल
चुनाव प्रक्रिया को लेकर वोटर लिस्ट में नाम काटे जाने और फॉर्म निरस्तीकरण को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। नए अध्यक्ष की नियुक्ति और बड़े स्तर पर फॉर्म खारिज होने के बाद बार राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
सबकी नजर चुनाव प्रक्रिया पर
अब पूरे मामले में अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों की नजर चुनाव प्रक्रिया पर है। एक ओर BCI के “एक व्यक्ति-एक पद” नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। दूसरी ओर पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि चुनाव प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी और क्या विवाद शांत होंगे या और गहराएंगे।
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