बरगी डैम साइट पर 3 साल से हो रही थी AMC की अनदेखी, हादसे ने खोली पोल, सैलानियों को लुभाने में भूले सेफ्टी ऑडिट

Sanjay Sharma | May 05, 2026, 23:15 IST
Photograph: (the sootr)
जबलपुर बरगी डैम में क्रूज पलटने से दर्जनभर मौतें। 3 साल से AMC नहीं, सेफ्टी ऑडिट बंद। ओंकारेश्वर, हनुवंतिया, भोपाल, सागर के वॉटर स्पोर्ट साइट्स भी खतरे में। क्रूज-बोट के नियम नहीं, निगरानी एजेंसी नहीं।

News in Short :

1. बरगी डैम: 3 साल से AMC नहीं, क्रूज डूबने की यह भी वजह


2. एमपी में क्रूज- बोट संचालन के लिए कोई इंफोर्समेंट एजेंसी नहीं


3. ओंकारेश्वर, हनुवंतिया जैसी पयर्टन साइट पर जोखिम में सैलानी


4. सैलानियों से कमाई में कंपनियां सुरक्षा इंतजाम को ही भूल गईं


5. बांध और तालाबों में वॉटर स्पोर्ट बढ़ाने पर ध्यान, सुरक्षा पर सवाल



News in Detail :

BHOPAL. मध्य प्रदेश में टूरिज्म बढ़ाने पर हर साल करोड़ों खर्च हो रहे हैं। ऐसे में बरगी में हुए हादसे ने सैलानियों की सुरक्षा को सवालों में ला दिया है। बरगी डैम में क्रूज पलटने से हुई मौतों ने पर्यटन निगम की लापरवाही उजागर कर दी। सामने आया है कि तीन साल से इस ट्ररिज्म साइट का एन्युअल मेंटेनेंस कांट्रेक्ट(AMC) नहीं कराया गया था।



हादसे के बाद ओंकारेश्वर डेम, हनुवंतिया टापू, भोपाल का बड़ा तालाब, ओरछा, सागर समेत सभी वॉटर स्पोर्ट साइट्स पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक मध्य प्रदेश में क्रूज और पावर बोट संचालन के लिए कोई नियम ही नहीं बने। किसी विभाग या सरकारी एजेंसी को निगरानी तक नहीं सौंपी गई है।



हादसे के बाद वॉटर स्पोर्ट्स पर सवाल

बरगी डैम में क्रूज पलटने से हुई मौत की जांच शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय होगी, लेकिन इस बीच कुछ अहम तथ्य उजागर हुए हैं। पता चला है कि मध्य प्रदेश पर्यटन निगम तीन साल से बरगी साइट की AMC यानी एन्युअल मेंटेनेंस कांट्रेक्ट को अनदेखा कर रहा था। AMC के तहत सेफ्टी ऑडिट और जरूरी इंतजामों का परीक्षण करने वाली एजेंसी तय होती है। यह एजेंसी क्रूज-बोट की जांच कर जोखिम रोकती है। बरगी में यह व्यवस्था ही नहीं थी।



न नियम, न निगरानी के लिए एजेंसी

मध्य प्रदेश में भोपाल के बड़े तालाब से लेकर ओंकारेश्वर, ओरछा, हनुवंतिया, सागर और अन्य बांधों में क्रूज और पावर बोट बढ़ाए गए हैं। हांलाकि इन्हें नियंत्रित करने और सेफ्टी ऑडिट की कोई व्यवस्था नहीं है। बांध-तालाबों में सैलानियों को घुमाने वाले क्रूज-बोट्स के लिए कोई नियम नहीं बने। इनकी निगरानी के लिए किसी विभाग या एजेंसी को जिम्मेदारी तक नहीं दी गई है। नतीजा—क्रूज या मोटर बोट का न नियमित परीक्षण हो रहा, न सेफ्टी ऑडिट।



टूरिज्म कंपनियों की मनमानी

सुरक्षा प्रबंधों की निगरानी न होने से पर्यटन स्थलों पर निजी कंपनियां सिर्फ सैलानियों की भीड़ बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। बरगी बांध में भी यही चूक हुई। क्रूज की क्षमता से ज्यादा लोग बैठाए गए, लाइफ जैकेट पूरे नहीं थे, आपात इंतजाम नहीं थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओंकारेश्वर डेम में क्रूज, हनुवंतिया टापू पर वॉटर स्पोर्ट, भोपाल बोट क्लब—सब जगह यही हाल है।



करोड़ों खर्च, सुरक्षा की अनदेखी

सरकार हर साल पर्यटन बढ़ाने पर करोड़ों खर्च कर रही है। नए पर्यटन स्थल डेवलप हो रहे हैं। पर सैलानियों की सुरक्षा के नाम पर जीरो इंतजाम हैं। बरगी हादसे के बाद दर्जन भर जिलों में योजनाओं की जांच शुरू हुई है, पर अंजाम तक कोई नहीं पहुंची। जानकारों के अनुसार हर साइट पर AMC अनिवार्य होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रदेश भर में क्रूज या मोटर बोट संचालन की गाइड लाइन बनाकर इन्फोर्समेंट एजेंसी तय करने की जरूरत है।



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