बैतूल में बैंक फ्रॉड का बड़ा खुलासा, जिंदा लोगों को मृत बताकर FD से निकाले 1.50 करोड़, 15 साल का नाबालिग निकला मास्टरमाइंड
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को पकड़ा है। इनमें बैंक का असिस्टेंट मैनेजर और एक टैक्सी ड्राइवर भी शामिल हैं।
बैतूल में कैसे हुआ बैंक फ्रॉड?
बैतूल जिले के मोरखा में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा है। यहां करीब डेढ़ करोड़ रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने उन लोगों को निशाना बनाया जिनकी बैंक में एफडी थी। ये लोग जिंदा थे। लेकिन आरोपियों ने बैंक के रिकॉर्ड में इन्हें मृत दिखा दिया। इसके बाद उनकी एफडी तुड़वाकर पैसे निकाल लिए।
इस धोखाधड़ी में बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे का नाम भी सामने आया है। पुलिस ने उन्हें भी आरोपी बनाया है।
बैतूल पुलिस ने शनिवार 24 अक्टूबर 2026 को इस मामले का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक तीन लोग इस धोखाधड़ी में शामिल थे।
15 साल का नाबालिग निकला मास्टरमाइंड
बैतूल के एसपी वीरेंद्र जैन ने इस मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पूरी धोखाधड़ी के पीछे 15 साल का नाबालिग है। यह नाबालिग मोरखा बैंक शाखा के पास ऑनलाइन कियोस्क सेंटर चलाता था। इसलिए उसका बैंक में अक्सर आना-जाना होता था।
धीरे-धीरे उसे बैंक के कामकाज की जानकारी हो गई। उसे यह भी पता चल गया कि किन लोगों के खातों में ज्यादा पैसा है।
पुलिस के मुताबिक नाबालिग ने ऐसे लोगों के पैसे निकालने की योजना बनाई। इसके लिए उसने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे को अपने साथ मिला लिया।
आरोप है कि दोनों ने मिलकर खाताधारकों के पैसे निकालने शुरू कर दिए।
बैंक अधिकारी की ID से बदलते थे मोबाइल नंबर
पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी कैसे धोखाधड़ी करते थे। इसके लिए वे बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की ID इस्तेमाल करते थे। सबसे पहले खाताधारकों के बैंक में दर्ज मोबाइल नंबर बदल देते थे।
पुलिस के मुताबिक जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच करीब 10 बार मोबाइल नंबर बदले गए। इससे आरोपियों को खातों से लेनदेन करने का रास्ता मिल जाता था।
इसके बाद आरोपी नेट बैंकिंग से पैसे निकालते थे। वे ग्राहकों की एफडी भी समय से पहले तुड़वा देते थे। यह सब खाताधारकों की जानकारी और अनुमति के बिना किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक इसी तरीके से आरोपियों ने बड़ी रकम दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर की।
टैक्सी ड्राइवर के खाते में मिले सवा करोड़ रुपए
इस मामले में तीसरा आरोपी गौरव सूर्यवंशी है। वह टैक्सी चलाता है। पुलिस के मुताबिक धोखाधड़ी का पैसा गौरव के बैंक खाते में भेजा जाता था। जांच में उसके खाते में करीब सवा करोड़ रुपए मिले हैं। पुलिस ने यह बैंक खाता फ्रीज करवा दिया है।
गौरव और 15 साल का नाबालिग एक ही गांव के रहने वाले हैं। दोनों आपस में दोस्त भी बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक नाबालिग ने ही गौरव को बैंक अधिकारी से मिलवाया था। इसके बाद धोखाधड़ी के पैसे गौरव के खाते में ट्रांसफर किए जाने लगे।
पुलिस अब पता लगा रही है कि इस धोखाधड़ी में और किन बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ है।
शिकायत करने पर लौटा देते थे पैसे
आरोपियों ने धोखाधड़ी छिपाने का भी तरीका निकाल रखा था। पुलिस के मुताबिक जब किसी ग्राहक के खाते से पैसे निकलते थे तो वह बैंक में शिकायत करता था। शिकायत मिलते ही आरोपी उसके खाते में पैसे वापस जमा कर देते थे।
इससे ग्राहक को लगता था कि बैंक की गड़बड़ी ठीक हो गई है। वह आगे शिकायत नहीं करता था। आरोपी भी यही चाहते थे कि मामला पुलिस तक न पहुंचे।
इस तरह आरोपी लंबे समय तक पैसों की हेराफेरी करते रहे। फिलहाल यह साफ नहीं है कि कितने लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है।
रिटायर्ड टीचर की शिकायत से खुला मामला
इस बैंक फ्रॉड का खुलासा एक रिटायर्ड टीचर की शिकायत के बाद हुआ। गेंदाराम सोनी नाम के रिटायर्ड टीचर के खाते से बिना उनकी जानकारी के 7 लाख रुपए निकाल लिए गए थे।
गेंदाराम ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस में इसकी शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि दूसरे लोगों के खातों से भी पैसे निकाले गए हैं। पुलिस ने बैंक खातों और पैसों के लेनदेन का रिकॉर्ड खंगाला। इसी दौरान धोखाधड़ी में शामिल आरोपियों की पहचान हुई।
छह खाताधारकों ने दर्ज कराई FIR
पुलिस के मुताबिक अब तक छह खाताधारक शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इनमें रिटायर्ड शिक्षक गेंदाराम सोनी के 7 लाख रुपए निकाले गए। ज्योति रघुवंशी के खाते से 4 लाख 86 हजार रुपए निकाले गए। फूलवंती के 2 लाख 74 हजार रुपए की हेराफेरी हुई।
इसी तरह इंद्रेश रघुवंशी के 1 लाख 85 हजार रुपए निकाले गए। भोजराज सोनी के खाते से 5 लाख 50 हजार रुपए गायब हुए। रागिनी साहू के खाते से भी 1 लाख 55 हजार रुपए निकाले गए।
इन छह लोगों के कुल 23 लाख 50 हजार रुपए की हेराफेरी सामने आई है। पुलिस अब दूसरे खाताधारकों का पता लगा रही है।
पुलिस ने 22.33 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की
बोरदेही पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों को पकड़ लिया है। इनमें बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे और टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी शामिल हैं। तीसरा आरोपी 15 साल का नाबालिग है।
पुलिस ने आरोपियों से छह मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा 8 लाख 28 हजार रुपए का सोना और 1 लाख 40 हजार रुपए की चांदी मिली है। करीब 12 लाख रुपए की एक कार भी जब्त की गई है।
पुलिस के मुताबिक जब्त सामान की कुल कीमत 22 लाख 33 हजार रुपए है। अब पुलिस आरोपियों से जुड़े दूसरे बैंक खातों की भी जांच कर रही है।
बैंक अधिकारी को पहले ही किया जा चुका था निलंबित
इस मामले में बैंक प्रबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक बैंक को गड़बड़ी का पता पहले ही चल गया था। इसके बाद असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे को निलंबित कर दिया गया था।
मामले की जानकारी बैंक के रीजनल ऑफिस तक भी पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद बैंक प्रबंधन ने पुलिस में शिकायत नहीं की।
आखिर में परेशान खाताधारकों ने खुद पुलिस से शिकायत की। इसके बाद बोरदेही पुलिस ने 24 अक्टूबर को तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
पुलिस अब दूसरे बैंक खातों की भी जांच कर रही
बैतूल पुलिस अब इस बैंक धोखाधड़ी की जांच आगे बढ़ा रही है। पुलिस पता लगा रही है कि कितने लोगों के साथ ठगी हुई है। करीब डेढ़ करोड़ रुपए किन-किन खातों में भेजे गए, इसकी भी जांच जारी है।
टैक्सी ड्राइवर के खाते में सवा करोड़ रुपए मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब दूसरे खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन शामिल है। अभी तक छह खाताधारकों की शिकायत सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद पता चलेगा कि कितने लोग ठगी के शिकार हुए हैं।
बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानी
यह मामला बैंक खातों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।
धोखाधड़ी में बैंक अधिकारी की ID के गलत इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भी बदल दिए गए थे।
इसलिए ग्राहकों को अपने बैंक खातों की जानकारी नियमित जांचनी चाहिए।
एफडी और अन्य जमा राशि का विवरण भी समय-समय पर देखना जरूरी है।
बिना अनुमति कोई लेनदेन दिखे तो तुरंत बैंक को लिखित शिकायत दें। जरूरत पड़ने पर पुलिस को भी सूचना दें।
बैतूल में सामने आए इस मामले ने बैंक की अंदरूनी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
अब पुलिस जांच से स्पष्ट होगा कि इतनी बड़ी रकम की हेराफेरी कैसे होती रही। इसके साथ ही बैंक स्तर पर किसकी कितनी जिम्मेदारी थी, यह भी जांच का विषय है।
FAQ
- बैतूल में डेढ़ करोड़ रुपए का बैंक फ्रॉड कैसे हुआ?
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जीवित खाताधारकों को बैंक रिकॉर्ड में मृत दिखाया और फिर उनकी एफडी तुड़वाकर पैसे निकाल लिए। - इस बैतूल बैंक फ्रॉड का मुख्य आरोपी कौन है?
पुलिस के मुताबिक, इस मामले का मुख्य आरोपी 15 साल का नाबालिग है, जो बैंक शाखा के पास एक ऑनलाइन कियोस्क सेंटर चलाता था। - कौन-कौन से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे, टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी और एक 15 वर्षीय नाबालिग को पकड़ा है।