मास्टर प्लान में पिछड़ गए भोपाल-इंदौर, सीहोर-विदिशा जैसे शहरों ने मारी बाजी
मध्य प्रदेश में विकास का नया रोडमैप तैयार हो रहा है। सबसे बड़ा सवाल भोपाल और इंदौर को लेकर खड़ा है। जहां छोटे और मध्यम शहरों के मास्टर प्लान तेजी से जारी किए जा रहे हैं, वहीं प्रदेश के दोनों बड़े शहरों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह सरकार की नई मेट्रोपॉलिटन रीजन रणनीति बताई जा रही है।
छोटे शहरों पर सरकार का फोकस क्यों?
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने आने वाले 20 से 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई शहरों के मास्टर प्लान पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। आधुनिक सैटेलाइट इमेज और ड्रोन सर्वे की मदद से विकास का नया खाका तैयार किया जा रहा है।
सबसे पहले बड़वानी का ड्राफ्ट मास्टर प्लान सार्वजनिक किया गया है। अब इस पर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे, ताकि अंतिम योजना स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सके।
दिसंबर तक 10 जिलों का विकास ब्लूप्रिंट
विभाग का लक्ष्य दिसंबर तक करीब 10 जिलों के ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी करने का है। इनमें कई ऐसे जिले शामिल हैं, जहां भविष्य में उद्योग, आवास और आधारभूत ढांचे के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।
किन जिलों पर सबसे ज्यादा काम चल रहा है?-
- बड़वानी (ड्राफ्ट जारी)
- खंडवा (ड्राफ्ट लगभग तैयार)
- रतलाम (ड्राफ्ट अंतिम चरण में)
- सीहोर
- विदिशा
- शाजापुर
- रीवा
- कटनी
- नरसिंहपुर
- शहडोल
रीवा-कटनी-शहडोल क्यों बने खास?
सरकार औद्योगिक निवेश बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। इसी वजह से रीवा, कटनी और शहडोल के मास्टर प्लान को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इन जिलों की भौगोलिक कनेक्टिविटी और औद्योगिक संभावनाओं को देखते हुए भविष्य के निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
सीहोर को मिल रही विशेष प्राथमिकता
सीहोर की स्थिति भोपाल और देवास कॉरिडोर के बीच होने के कारण तेजी से व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
इसी वजह से यहां के मास्टर प्लान को प्राथमिकता देकर भविष्य के शहरी विस्तार, सड़क नेटवर्क और व्यावसायिक विकास को ध्यान में रखा जा रहा है।
भोपाल-इंदौर का मास्टर प्लान फिर क्यों अटका?
सियासी और प्रशासनिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है। जानकारी के मुताबिक सरकार पहले भोपाल, इंदौर और उज्जैन को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाने की तैयारी कर रही है। इसके बाद इन शहरों के लिए नया और व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यही कारण है कि वर्षों से लंबित मास्टर प्लान पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
ग्वालियर और जबलपुर की भी बदलेगी तस्वीर
सरकार की दीर्घकालिक योजना में ग्वालियर और जबलपुर को भी भविष्य में मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शामिल है।
इससे इन शहरों में भी आधुनिक शहरी विकास, परिवहन और निवेश की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
क्या कहते हैं संकेत?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकार फिलहाल छोटे और उभरते शहरों के विकास को प्राथमिकता देती दिख रही है, जबकि भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों के लिए नई प्रशासनिक संरचना बनने का इंतजार किया जा रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर को नया मास्टर प्लान मिलने में अभी और समय लगेगा? आने वाले महीनों में सरकार की मेट्रोपॉलिटन रीजन नीति इस सवाल का जवाब तय करेगी।
मुख्य बातें एक नजर में-
- 20-25 वर्षों को ध्यान में रखकर नए मास्टर प्लान तैयार।
- बड़वानी का ड्राफ्ट जारी, सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित।
- खंडवा और रतलाम के ड्राफ्ट अंतिम चरण में।
- दिसंबर तक करीब 10 जिलों के मास्टर प्लान सार्वजनिक होंगे।
- रीवा, कटनी और शहडोल को औद्योगिक विकास के लिहाज से प्राथमिकता।
- सीहोर के विकास पर विशेष फोकस।
- भोपाल, इंदौर और उज्जैन के लिए पहले मेट्रोपॉलिटन रीजन की तैयारी।
- ग्वालियर और जबलपुर भी भविष्य की योजना में शामिल।
FAQ
- भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान अभी क्यों नहीं आया?
सरकार पहले भोपाल, इंदौर और उज्जैन को मिलाकर मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाना चाहती है। इसके बाद ही नया मास्टर प्लान तैयार होगा। यही देरी की मुख्य वजह है। - दिसंबर तक कितने जिलों के मास्टर प्लान आएंगे?
विभाग का लक्ष्य करीब 10 जिलों के ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी करना है। इनमें बड़वानी, खंडवा, रतलाम, सीहोर, रीवा जैसे जिले शामिल हैं। बड़वानी का ड्राफ्ट पहले ही जारी हो चुका है। - सीहोर को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
सीहोर भोपाल और देवास कॉरिडोर के बीच स्थित है। यहां व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसलिए इसके मास्टर प्लान को प्राथमिकता मिली है।
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