SRS 2024: बड़े परिवार में MP देश में नंबर वन, तेजी से बढ़ रही आबादी
समझें क्या है पूरा मामला...
- एसआरएस रिपोर्ट 2024 मेंमध्यप्रदेश को लेकर चौंकाने वाला खुलासाहुआ है।
- चौथे या उससे अधिक बच्चे के जन्मके मामले में MP देश में पहले नंबर परहै।
- यहां जन्म दर 6.5% है जो पूरे देशमें सबसे ज्यादा है।
- प्रदेश में हर घंटे257 बच्चे जन्म लेते हैं यानी रोज 5600से ज्यादा।
- मातृ मृत्यु दर यानी एमएमआर135 हैजो देश के औसत 87 से काफी अधिक है।
MP में जन्म दर सबसे ज्यादा क्यों?
पूरे देश में छोटे परिवार का चलन बढ़ रहा है। इसीलिए चौथे या उससे बाद जन्म लेने वाले बच्चों का राष्ट्रीय औसत घटकर 3.5% रह गया है। वहीं, मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 6.5% है, जो देश में सबसे ज्यादा है।
यह खुलासा हाल में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) बुलेटिन 2024 में हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में साक्षरता और जागरूकता की कमी इसकी बड़ी वजह है।
हर घंटे 257 बच्चे, रोज 5600
मध्यप्रदेश में प्रति एक हजार लोगों पर 22.5 बच्चे जन्म लेते हैं। यह आंकड़ा तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। तमिलनाडु व केरल में यह आंकड़ा 11 से 12 प्रति हजार के बीच है, जबकि आंध्र प्रदेश में 14 प्रति हजार है।
प्रदेश की ग्रामीण जन्म दर 24.3 प्रति हजार है जो देश में तीसरे नंबर पर है। कुल मिलाकर प्रदेश में हर घंटे 257 बच्चे जन्म ले रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि रोजाना करीब 5600 नए बच्चे प्रदेश में पैदा हो रहे हैं।
राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है यहां की जन्म दर
देश में जन्म दर का राष्ट्रीय औसत 18.3 प्रति हजार है। वहीं, मध्यप्रदेश में यह काफी ज्यादा है। यह बड़े परिवारों की परंपरा और परिवार नियोजन की कम पहुंच को दर्शाता है।
बड़े परिवारों में बिहार दूसरे नंबर पर है। मध्यप्रदेश में हर 100 बच्चों में 6.1 बच्चे चौथे या उससे बाद जन्मे हैं। देश का यह आंकड़ा 5.1% है।
28.2% माताएं रखती हैं दो बच्चों में 3 साल का अंतर
एक राहत की बात यह है कि राज्य में 28.2% माताएं ऐसी हैं जो दो बच्चों के बीच तीन साल या उससे ज्यादा का अंतर रखती हैं। यह स्वास्थ्य के नजरिए से एक सकारात्मक पहलू है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी उतना नहीं है जितना होना चाहिए।
हर हजार लोगों पर 16 नए सदस्य जुड़ रहे
मध्यप्रदेश की प्राकृतिक विकास दर यानी जन्म और मृत्यु का अंतर 15.8 है। राष्ट्रीय औसत 11.9 है। इसका मतलब है कि प्रति एक हजार लोगों पर हर साल लगभग 16 लोग आबादी में शुद्ध रूप से जुड़ रहे हैं। आंध्र प्रदेश की यह दर सिर्फ 7.7 है।
शिशु मृत्यु दर के आंकड़े भी चिंताजनक
बड़ी जन्म दर के साथ-साथ मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर के आंकड़े भी परेशान करने वाले हैं। प्रदेश की कुल शिशु मृत्यु दर 35 है। शहरी शिशु मृत्यु दर 28 है जो देश में दूसरे नंबर पर आती है। ग्रामीण शिशु मृत्यु दर 37 है जो छग और यूपी के बाद देश में सबसे ज्यादा है।
मातृ मृत्यु दर देश के औसत से डेढ़ गुना
प्रदेश में मातृ मृत्यु दर यानी एमएमआर 135 है। देश का औसत 87 है। यानी प्रदेश में प्रसव के दौरान माताओं की जान जाने का खतरा देश के औसत से लगभग डेढ़ गुना अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि जन्म दर बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार उसी रफ्तार से नहीं हो पाया है।
आने वाले समय में क्या होगा असर?
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में स्कूलों, अस्पतालों, नौकरियों और शहरों पर दबाव और बढ़ेगा। दक्षिणी राज्य जन्म दर नियंत्रित करने में कामयाब रहे हैं क्योंकि वहां साक्षरता और जागरूकता ज्यादा है। मध्यप्रदेश को इस दिशा में ज्यादा काम करने की जरूरत है।
FAQ
- एसआरएस 2024 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश को लेकर क्या खुलासा हुआ?
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी एसआरएस 2024 बुलेटिन के मुताबिक मध्यप्रदेश में चौथे या उससे अधिक बच्चे के जन्म का आंकड़ा 6.5% है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। राष्ट्रीय औसत 3.5% है। प्रदेश में हर घंटे 257 बच्चे जन्म लेते हैं और प्राकृतिक विकास दर 15.8 है जो राष्ट्रीय औसत 11.9 से काफी अधिक है। - मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर कितनी है?
मध्यप्रदेश की मातृ मृत्यु दर 135 है जबकि देश का औसत 87 है। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग डेढ़ गुना अधिक है। इसके अलावा कुल शिशु मृत्यु दर 35, शहरी शिशु मृत्यु दर 28 और ग्रामीण शिशु मृत्यु दर 37 है। ग्रामीण शिशु मृत्यु दर में प्रदेश छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के बाद देश में तीसरे नंबर पर है। - मध्यप्रदेश में जन्म दर ज्यादा क्यों है?
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में साक्षरता और जागरूकता की कमी इसकी मुख्य वजह है। दक्षिणी राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल में जन्म दर 11 से 12 प्रति हजार है क्योंकि वहां शिक्षा और परिवार नियोजन की पहुंच बेहतर है। मध्यप्रदेश में यह दर 22.5 प्रति हजार है।
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