MP में ‘कमेटी पॉलिटिक्स’ का बड़ा गेम : भाजपा करेगी चुनाव से पहले 10 हजार+ चेहरों की सिस्टम में एंट्री

Ramanand Tiwari | May 04, 2026, 20:43 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश भाजपा अपने जमीनी नेटवर्क को मजबूत करेगी। 55 जिलों में सरकारी समितियों में 10 हजार 500 से अधिक कार्यकर्ताओं को नियुक्त कर रही है। इसका उद्देश्य राजनीतिक प्रभाव बनाना और पार्टी की पहुंच को सभी प्रशासनिक स्तरों पर बढ़ाना है।

मध्यप्रदेश में चुनावी माहौल भले कुछ दूर हो, लेकिन सियासी तैयारी तेज हो गई है। भाजपा ने 55 जिलों में सरकारी समितियों के जरिए 10 हजार 500 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मकसद साफ है, संगठन को जमीनी स्तर पर इतना मजबूत करना कि वह प्रशासनिक फैसलों में भी प्रभावी भूमिका निभा सके।



‘पोस्टिंग’ नहीं, ग्राउंड कंट्रोल की रणनीति

यह सिर्फ नियुक्तियों का मामला नहीं है, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच तालमेल को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है। पंचायत से लेकर जिला स्तर तक ऐसे चेहरों को आगे लाया जा रहा है, जो सीधे पार्टी लाइन से जुड़े हैं। सीधा संकेत है, अब सरकारी तंत्र में भी राजनीतिक पकड़ और गहराई तक जाएगी।



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कैसे चल रहा है पूरा ऑपरेशन?

जिलों में कोर ग्रुप की बैठकें लगातार हो रही हैं। प्रभारी मंत्रियों को नाम तय करने की जिम्मेदारी दी गई है, जो स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर चयन कर रहे हैं। पूरी प्रक्रिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय नजर बनाए हुए है, ताकि संतुलन और समन्वय बना रहे।



मुख्य बातें

  • 55 जिलों में एक साथ नियुक्तियों की प्रक्रिया
  • 31 विभागों की 70+ समितियों में भागीदारी
  • हर जिले में 190-200 सदस्यों की नियुक्ति
  • कुल 10,500+ कार्यकर्ताओं को मौका
  • पंचायत से जिला स्तर तक सीधा कनेक्शन
  • प्रभारी मंत्रियों को चयन का अधिकार
  • CM कार्यालय द्वारा सतत निगरानी
  • लक्ष्य: चुनाव से पहले मजबूत जमीनी नेटवर्क

किन-किन विभागों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी?

इस रणनीति में लगभग सभी प्रमुख विभाग शामिल किए गए हैं।



  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास: जल, स्वच्छता, ग्राम समितियां
  • शिक्षा विभाग: स्कूल और कॉलेज स्तर की समितियां
  • नगरीय निकाय: नगर निगम और परिषद समितियां
  • सामाजिक न्याय: कल्याणकारी योजनाओं में भागीदारी
  • पुलिस व जेल: शिकायत बोर्ड और निगरानी समितियां
  • खाद्य आपूर्ति: राशन प्रणाली तक नेटवर्क
  • कृषि-उद्यानिकी: योजनाओं और मिशनों में सहभागिता

यानी प्रशासन के हर स्तर पर संगठन की मौजूदगी सुनिश्चित करने की कोशिश।



10,500 का आंकड़ा क्यों अहम?

हर जिले में औसतन 200 के करीब लोगों की भागीदारी से गांव-गांव तक नेटवर्क तैयार होगा। यह मॉडल चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट को मजबूत करेगा, जहां हर स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद रहेगा।



सियासी संदेश क्या है?

यह कदम केवल जिम्मेदारी बांटने का नहीं, बल्कि संगठन को एक्टिव मोड में लाने का है।



  • निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को नई भूमिका
  • स्थानीय स्तर पर संतुलन और समन्वय
  • चुनाव से पहले कैडर को मजबूत करना

आगे क्या?

अगले कुछ हफ्तों में सभी जिलों की सूची फाइनल होने की संभावना है। नियुक्तियों की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और जल्द ही बड़े पैमाने पर नामों का ऐलान हो सकता है।



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भाजपा का आधिकारिक पक्ष

मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के मुताबिक, राज्यभर में विभिन्न समितियों में कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया वर्तमान में प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि संगठन और सरकार के समन्वय से योग्य एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर काम किया जा रहा है।



यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चयन प्रक्रिया संतुलित, पारदर्शी और सर्वसम्मति आधारित हो। आने वाले समय में सभी समितियों में नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से पूरी कर ली जाएंगी, जिससे संगठनात्मक ढांचे को और मजबूती मिलेगी।



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