भाजपा में दल बदलकर आए दिग्गजों को आमंत्रण, लेकिन कमान किसे? कांग्रेस की घरवापसी मुहिम के बीच 2028 की सियासी परीक्षा
पार्टी में प्रवेश आसान, कमान तक पहुंच कितनी?
मध्यप्रदेश भाजपा की नई कार्यसमितियों में कांग्रेस से आए दिग्गजों को औपचारिक पहचान मिली है। हालांकि, स्थायी आमंत्रित सदस्य बनने और संगठन संचालन की जिम्मेदारी संभालने में बड़ा अंतर है। इन नियुक्तियों से समर्थकों की उम्मीदें और अगली चुनावी दावेदारी प्रभावित हो सकती है। भाजपा के सामने पुराने कार्यकर्ताओं की वरिष्ठता और नए नेताओं की महत्वाकांक्षाओं में संतुलन बनाना चुनौती है।
सुरेश पचौरी: कभी केंद्रीय मंत्री, अब दो समितियों में आमंत्रित
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी मार्च 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। जून 2026 में उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया। सितंबर में भोपाल जिला कार्यसमिति की स्थायी आमंत्रित सूची में भी उनका नाम शामिल हुआ। हालांकि, उन्हें संगठन संचालन से जुड़ा कोई प्रमुख पद नहीं दिया गया है।
कमलनाथ के करीबी से भाजपा के आमंत्रित सदस्य
दीपक सक्सेना छिंदवाड़ा में कमलनाथ के पुराने सहयोगी रहे हैं। वे अप्रैल 2024 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। जून 2026 की प्रदेश कार्यसमिति में उन्हें स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया। सक्सेना ने हालिया बातचीत में अपनी स्थिति पर संतुष्टि जताई है। ऐसे में उन्हें नाराज मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, उनके पुराने क्षेत्रीय प्रभाव और मौजूदा संगठनात्मक जिम्मेदारी की तुलना राजनीतिक चर्चा का विषय है।
संजय शुक्ला: इंदौर में जगह, लेकिन फैसलों में कितनी ताकत?
इंदौर के पूर्व कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे। सितंबर 2026 में उन्हें इंदौर नगर कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया। ऐसे में उन्हें संगठन से पूरी तरह बाहर बताना जारी सूची के विपरीत होगा। हालांकि, नगर स्तर की समिति में जगह मिलने से प्रदेश नेतृत्व में भूमिका सुनिश्चित नहीं होती। इससे अगले विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की गारंटी भी नहीं मिलती।
सिंधिया समर्थकों का अनुभव
ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए समर्थकों का असंतोष भी पहले सामने आया था। वर्ष 2023 में कुछ समर्थकों की कांग्रेस वापसी ने संगठनात्मक स्वीकार्यता पर सवाल खड़े किए थे। मई 2026 में ग्वालियर के पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक ने इस्तीफा दिया था। उन्होंने संगठन में अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, इन घटनाओं के आधार पर पूरे सिंधिया खेमे की उपेक्षा मानना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस का नया दांव: 600 से ज्यादा आवेदन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 600 से ज्यादा घरवापसी आवेदन मिलने का दावा किया है। उनके मुताबिक पुराने नेताओं की वापसी पर संबंधित जिला कांग्रेस समितियों से चर्चा होगी। इसके बाद ही वापसी को लेकर फैसला किया जाएगा। हालांकि, आवेदन करने वाले नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में किसी विशेष भाजपा नेता की कांग्रेस वापसी का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। फिर भी यह अभियान दल बदलने वाले नेताओं की राजनीतिक उपयोगिता पर नई बहस छेड़ेगा।
दीपक जोशी की स्थिति अलग, सदस्यता पर भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी मई 2023 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद उनकी भाजपा वापसी की चर्चा भी चली थी। हालांकि, उनकी औपचारिक सदस्यता की पुष्टि नहीं हो सकी। हालिया बातचीत में जोशी ने खुद को दोनों दलों से अलग बताया है। इससे उनकी मौजूदा राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए उनका मामला भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियां पाने वाले नेताओं से अलग है।
2028 में असली परीक्षा: सूची में नाम या जमीन पर पकड़?
भाजपा के सामने चुनौती केवल समितियों में नेताओं को जगह देने की नहीं है। पार्टी को इन नेताओं की संगठनात्मक सक्रियता भी बनाए रखनी होगी। पुराने कार्यकर्ता महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी वर्षों की मेहनत का सम्मान चाहेंगे। वहीं, दूसरे दलों से आए दिग्गज समर्थकों के लिए टिकट और संगठनात्मक भूमिका चाहेंगे। वे अपना राजनीतिक भविष्य भी सुरक्षित करने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस की घरवापसी मुहिम के बीच दोनों दलों की परीक्षा स्थानीय भरोसे पर होगी। जमीनी संगठन की मजबूती भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधानसभा चुनाव 2028 में नेताओं की सक्रियता और चुनावी प्रभाव असली तस्वीर सामने लाएंगे।