पीएम की अपील के बावजूद काफिला: MP BJP के नेताओं को पार्टी ने किया तलब

Amresh Kushwaha | May 16, 2026, 11:58 IST
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पीएम मोदी की अपील के बावजूद सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालने पर मध्यप्रदेस की भाजपा संगठन ने सात नेताओं को तलब किया है। 17-18 मई को भोपाल बुलाकर सफाई मांगी जाएगी। वहीं, संतोषजनक जवाब न मिला तो कार्रवाई होगी।

शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...

  1. पीएम मोदी ने नेताओं से सादगी से रहने की अपील की थी।
  2. अपील के बावजूद कई नेताओं ने सैकड़ों गाड़ियों के काफिले निकाले थे।
  3. काफिलों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।
  4. भाजपा संगठन और सरकार ने सात नेताओं को भोपाल तलब किया है।
  5. 17-18 मई को सफाई देनी होगी, जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई होगी।

पीएम की बात, नेताओं का काफिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कह दिया था कि नेता सादगी से काम करें और बड़े-बड़े काफिले न निकालें। वहीं, मध्यप्रदेश में कई भाजपा नेताओं ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया। सैकड़ों गाड़ियों के साथ दौरे किए, जेसीबी से फूल बरसवाए और पूरे इलाके में जाम जैसे हालात बना दिए थे। इन सबके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं।



अब पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। मध्यप्रदेश भाजपा सरकार और संगठन ने ऐसे सात नेताओं को दिल्ली से फटकार लगाने के बाद भोपाल तलब किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 17 मई को इन नेताओं को बुलाया है। वन टू वन बात होगी और संतोषजनक जवाब न मिला तो कार्रवाई होगी।



द सूत्र ने उठाए थे ये सवाल-



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किन नेताओं को बुलाया गया?

जिन नेताओं को तलब किया गया है उनमें महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव, सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल, ओबीसी मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष पवन पाटीदार, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी, विधानसभा उपाध्यक्ष राकेश जादौन, किसान मोर्चा देवास के अध्यक्ष टिकेंद्र प्रताप सिंह और लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण के नाम शामिल हैं।



इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने पीएम मोदी की अपील की अनदेखी करते हुए बड़े काफिलों के साथ दौरे किए हैं।



तीन मामले जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहे

सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने हाल ही में पदभार ग्रहण किया था। इस दौरान उनके पीछे-पीछे सैकड़ों गाड़ियों का काफिला चलता रहा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भाजपा संगठन ने उन्हें भोपाल तलब कर लिया है।



महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव पहली बार छतरपुर पहुंचीं तो उनके स्वागत में पीएम मोदी की अपील की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। स्वागत कार्यक्रम में कई गाड़ियां चलती रहीं जिससे पूरे क्षेत्र में जाम जैसी स्थिति बन गई थी। इस घटना का वीडियो भी संगठन के पास पहुंच गया है।



पिछड़ा वर्ग मोर्चे के अध्यक्ष पवन पाटीदार के काफिले का मामला भी विवादास्पद रहा। बुधवार, 13 मई को वे दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ लहार विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर गए थे। हद तो यह हो गई कि उनके स्वागत में जेसीबी से फूल उड़ाए गए थे। इसका वीडियो वायरल होने के बाद संगठन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।



अकेले नहीं हैं ये मामले

यह पहली बार नहीं है। इससे पहले पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह और किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह पर भी कार्रवाई हो चुकी है। इनके वीडियो भी वायरल हुए थे। संगठन ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखने के बाद ऐसे नेताओं की सूची तैयार की और उन्हें तलब किया।



मंत्री लोधी पर चुप्पी क्यों?

इस पूरे मामले में एक नाम जो गायब है, वह है पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी की अपील के बावजूद 15 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला लेकर वे खंडवा दौरे पर गए थे। वहीं, शुक्रवार, 16 मई की शाम तक पार्टी की ओर से उन्हें कोई संदेश नहीं भेजा गया है। संगठन की यह चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।



18 मई को ट्रेनिंग भी

इन नेताओं के लिए 18 मई को भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भी रखा गया है। सुबह 09 बजे से शुरू होने वाली कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 10 से 11 बजे के बीच एक सत्र को संबोधित करेंगे।



अब तक की 63 सरकारी नियुक्तियों के अध्यक्षों को इस प्रशिक्षण में बुलाया गया है। इसमें विभिन्न विभागों की सरकारी समस्याओं, कार्यशैली और विभागीय प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी।



खंडेलवाल का रुख साफ

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा है कि लंबी-लंबी रैलियां निकालने वाले सभी नेताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। साथ ही पार्टी की ओर से उन्हें समझाया भी जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को गंभीर और संवेदनशील मानती है। वहीं, किसी पर भी कार्रवाई करने से पहले उनकी बात सुनी जाएगी।



यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सत्ता और अनुशासन के बीच की खींचतान को सामने लाती है। जब देश के प्रधानमंत्री खुद सादगी की अपील करें और उसी पार्टी के नेता उसकी अनदेखी करें तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का सवाल बन जाता है। जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा व्यवहार डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के लिहाज से भी गलत है। वायरल वीडियो के जरिए आम लोगों ने इस मामले को पकड़ा और पार्टी को एक्शन लेना पड़ा। यह दिखाता है कि सोशल मीडिया आज एक मजबूत जनतांत्रिक हथियार बन चुका है।



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