भाजपा में निष्कासन के बाद पदों की सौगात: नर्मदापुरम से रीवा तक उठे सवाल, श्याम टेलर ने दी सफाई
नर्मदापुरम विवाद में नया मोड़, श्याम टेलर ने दी सफाई
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने कुलदीप रघुवंशी की नियुक्ति पर उठे सवालों का जवाब दिया। टेलर के मुताबिक, जिस नेतृत्व ने निष्कासन किया था, उसी ने बाद में उसे समाप्त किया। उनका कहना है कि कानूनी दोषमुक्ति और पार्टी सदस्यता बहाली के बाद नियुक्ति की गई।
उन्नीस जिलों की सूची में कुलदीप रघुवंशी को जिम्मेदारी
भाजयुमो ने 29 अक्टूबर 2026 को उन्नीस जिलों में नए पदाधिकारियों की सूची जारी की। श्याम टेलर ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से नियुक्तियों की घोषणा की थी। नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी जिलाध्यक्ष और रूपेंद्र साहू जिला महामंत्री बनाए गए। इन नियुक्तियों के बाद पुराना विवाद फिर सामने आया। सवाल है कि संगठन ने रघुवंशी की सदस्यता किस आदेश से बहाल की थी।
मारपीट मामले में छह साल का निष्कासन
इटारसी में 31 मार्च 2023 को नेता अभिषेक निर्मल से मारपीट का मामला सामने आया था। प्रकाशित खबरों में कुलदीप रघुवंशी और उनके साथियों पर मारपीट तथा अपहरण के आरोप थे। रिपोर्टों के अनुसार, जिलाध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने रघुवंशी को छह वर्षों के लिए निष्कासित किया था। टेलर के स्पष्टीकरण के बाद सदस्यता बहाली और कथित कानूनी दोषमुक्ति के दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।
श्याम टेलर की सफाई के बाद भी तीन सवाल अनुत्तरित
पहला सवाल निष्कासन वापस लेने के लिखित आदेश से जुड़ा है। यह आदेश कब जारी हुआ और उस पर किसके हस्ताक्षर थे? दूसरा सवाल आपराधिक प्रकरण में न्यायालय के फैसले और उसकी तारीख की पुष्टि का है।तीसरा सवाल नियुक्ति से पहले सदस्यता जांच और प्रदेश नेतृत्व की मंजूरी की प्रक्रिया पर है।संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने तक टेलर के दावे को प्रमाणित न्यायिक तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
निवाड़ी में महेश केवट की नियुक्ति पर भी विवाद
निवाड़ी के महेश केवट को अप्रैल 2026 में मध्यप्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद 2022 का कथित निष्कासन पत्र सामने आया। इस पत्र के सामने आने से उनकी नियुक्ति पर सवाल उठे।केवट ने इस पत्र को फर्जी बताया था। उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा भी दोहराई थी।
रीवा में निष्कासन के बाद मिला जिला उपाध्यक्ष पद
रीवा के मनीष चंद्र शुक्ला को सितंबर 2025 में जिला उपाध्यक्ष बनाए जाने की खबर आई। अगस्त 2022 में जनपद अधिकारी विवाद के बाद उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया। बाद की नियुक्ति सार्वजनिक है, लेकिन बीच में हुए सदस्यता संबंधी फैसले की जानकारी अस्पष्ट है। यहां भी सवाल नियुक्ति से अधिक सदस्यता बहाली की पारदर्शी प्रक्रिया और रिकॉर्ड का है।
मुरैना में समिति की जिम्मेदारी से बढ़ा असंतोष
मुरैना में धर्मेंद्र श्रीवास्तव को नगर समिति में शामिल करने पर संगठन में विरोध सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी 2024 में उन्हें छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया। पूर्व विधायक रघुराज कंसाना ने चयन पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से इसकी शिकायत भी की थी। यहां भी नियुक्ति से पहले पार्टी की सदस्यता की स्थिति जांच का विषय है।
पन्ना के संजय नगायच की कहानी में बहाली का रिकॉर्ड
संजय नगायच को अप्रैल 2026 में वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। भाजपा ने जुलाई 2015 में उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित करने का निर्णय लिया था। अक्टूबर 2018 में उनके निष्कासन की समाप्ति और भाजपा में वापसी की खबर प्रकाशित हुई थी। उनका उदाहरण बिना बहाली के नियुक्ति का प्रमाण नहीं है। यह पुराने अनुशासनात्मक फैसलों से जुड़ा अलग मामला है।
इंदौर में लिखित पत्र के साथ हुई जीतू यादव की वापसी
भाजपा ने इंदौर के पार्षद जीतू यादव का निष्कासन अगस्त 2026 में औपचारिक रूप से हटाया। प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन ने पुलिस जांच में राहत के बाद लिखित सूचना जारी की। इस मामले में बहाली का आधार और संगठन का फैसला सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट रही। नर्मदापुरम में भी अभिलेख सामने आने पर विवाद के कई महत्वपूर्ण सवाल स्पष्ट हो सकते हैं।
प्रदेश नेतृत्व की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। तत्कालीन क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामबाल और प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब भी नेतृत्व से जुड़े हैं। हालांकि, सरकारी बोर्ड और पार्टी संगठन के पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। फिर भी चयन से पहले पुराने अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और सदस्यता जांच महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं।
अनुशासन और भरोसे की कसौटी पर नियुक्तियां
निष्कासन की घोषणा जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही सार्वजनिक बहाली की प्रक्रिया भी होनी चाहिए। कार्यकर्ता जानना चाहते हैं कि फैसलों की समीक्षा और नियुक्तियों के मानदंड कैसे तय होते हैं। श्याम टेलर ने नर्मदापुरम मामले में अपना पक्ष स्पष्ट किया है। अब संबंधित दस्तावेज सामने आने से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। नेतृत्व के सामने चुनौती केवल आरोपों का जवाब देना नहीं है। नियुक्तियों और सदस्यता बहाली की प्रमाणित जानकारी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।