सरकार का दावा- बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवा, कर्मचारियों को सता रहा नौकरी खोने का डर

Sanjay Sharma | Jun 18, 2026, 08:45 IST
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MP सरकार ने रीवा-देवास-गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठेके पर देने का रास्ता खुल गया है। यानी अब इन जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन निजी क्षेत्र की संस्थाएं करेंगी। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • MP सरकार ने 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को ठेके पर देने की मंजूरी दी।
  • रीवा, देवास, गुना जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट।
  • प्रोजेक्ट में शामिल अस्पतालों में निजी संस्था के डॉक्टर- कर्मचारी ही करेंगे उपचार।
  • अस्पतालों के निजीकरण से निशुल्क इलाज की व्यवस्था बंद होने से आशंकित लोग।
  • आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर रहे अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध।

कैबिनेट ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 18 CHC को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली है। आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा ने इसे आउटसोर्स, संविदाकर्मचारी विरोधी व्यवस्था बताया है। इस व्यवस्था से आउटसोर्सकर्मियों ने शोषण का अंदेशा जताया है। वहीं निजीकरण के विरोध में रणनीति बनाने के लिए 28 जून को भोपाल में इकट्ठा होने की तैयारी की जा रही है।



स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण कैबिनेट की मंजूरी

MP कैबिनेट ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को मंजूरी दी। रीवा, देवास, गुना के 18 CHC टेंडर से निजी संस्थाओं को सौंप दिए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट में शामिल इन अस्पतालों में डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति और उपचार के तमाम इंतजाम निजी संस्था करेगी।



मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के निजीकरण का विरोध शुरू हो गया है। आमजन निशुल्क इलाज बंद होने और आउटसोर्सकर्मी नौकरी छिनने की आशंका से नाराज हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी हे। इसके लिए 28 जून को भोपाल में प्रदेशभर के आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों की बैठक भी होने वाली है।



पायलट प्रोजेक्ट के सहारे निजी क्षेत्र की एंट्री

MP की भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की शुरुआत कर दी। कैबिनेट ने रीवा, देवास, गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निजी संस्थाओं को देने का फैसला लिया। टेंडर से चयन होगा। डॉक्टरों की नियुक्ति भी आउटसोर्स होगी। सरकार इसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास बता रही है। वहीं आउटसोर्स कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। लोग भी सरकारी अस्पताल को निजी संस्था को सौंपने से इलाज के लिए फीस वसूली की आशंका जता रहे हैं।



सरकारी अस्पतालों के निजीकरण का विरोध

रीवा, देवास और गुना के 18 CHC में निजी कंपनी ही इलाज और अन्य व्यवस्था संभालेगी। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर पूरे प्रदेश में लागू हो सकता है। साल भर पहले 10 जिला अस्पतालों को ठेके पर देने की तैयारी थी तब विरोध के चलते इसे रोकना पड़ा था।



आउटसोर्स-अस्थाई कर्मचारी मोर्चा अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि निजीकरण से स्वास्थ्यकर्मियों के हजारों पद अब सीधे तौर पर कंपनियों के हाथ में आ जाएंगे। डॉक्टरों की नियुक्ति भी अस्थायी हो जाएगी।



FAQ

  1. कौन से स्वास्थ्य केंद्र ठेके पर दिए जा रहे हैं?
    MP सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट में रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को टेंडर से निजी संस्थाओं को देने की मंजूरी दी है।
  2. निजीकरण से क्या असर पड़ेगा?
    वासुदेव शर्मा के अनुसार सरकारी नौकरियां खत्म होंगी, डॉक्टरों की नियुक्ति ठेकेदार करेंगे, इलाज महंगा होगा और गरीब-मजदूर वर्ग मुफ्त स्वास्थ्य सेवा से वंचित होगा।

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