एमपी बीजेपी का नया नियम: कार्यकर्ता सीधे अब मंत्री से नहीं मिल सकते, सांसद-विधायक का पत्र जरूरी
मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के मंत्रियों तक सीधी पहुंच अब आसान नहीं रही। अब कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने के लिए सांसद, विधायक या जिलाध्यक्ष का अनुशंसा पत्र लाना होगा।
यह नई व्यवस्था 01 अप्रैल 2026 से लागू की गई है। भाजपा प्रदेश संगठन ने पांच माह पहले सहयोग सेल बनाया था। इसमें अब बड़ा बदलाव हुआ है। प्रदेश कार्यालय सचिव श्याम महाजन ने इस संबंध में सभी जिलाध्यक्षों को पत्र जारी किया है।
भाजपा दफ्तर में बैठेंगे मंत्री, बदली पूरी व्यवस्था
अब तक भाजपा के कार्यकर्ता राज्य सरकार के मंत्रियों से सीधे मुलाकात कर अपनी शिकायत और समस्याएं बताते थे। इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कार्यकर्ताओं को मंत्री से मिलने के लिए सांसद, विधायक या पार्टी के जिलाध्यक्ष का अनुशंसा पत्र लाना अनिवार्य होगा। बिना इस पत्र के कार्यकर्ता मंत्रियों से सीधे नहीं मिल सकेंगे।
नई व्यवस्था के तहत मंत्री अब भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठकर पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। यह बैठक हर सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगी। इस दौरान प्रदेश कार्यालय में संबंधित मंत्री मौजूद रहेंगे।
पांच माह पहले बना था सहयोग सेल
बीजेपी प्रदेश संगठन ने पांच महीने पहले यानी 1 दिसंबर 2025 को प्रदेश कार्यालय में सहयोग सेल (Sahayog Cell) का गठन किया था। इसकी व्यवस्था इस तरह थी कि पार्टी के कार्यकर्ता रोजाना दो मंत्रियों से मिलकर सीधे अपनी समस्याएं साझा कर सकें। अब इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है।
बीजेपी प्रदेश कार्यालय सचिव श्याम महाजन की ओर से सभी जिलाध्यक्षों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार्यप्रणाली में यह बदलाव किया गया है। 01 अप्रैल से प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों और पदाधिकारियों की मौजूदगी का नया और संशोधित रोस्टर (roster) भी जारी किया गया है।
अनुशंसा पत्र से क्या होगा फायदा?
इस नई व्यवस्था के तहत कार्यकर्ताओं के लिए अनुशंसा पत्र साथ लाना अनिवार्य कर दिया गया है। सांसद, विधायक या जिलाध्यक्ष के इस पत्र में जिलाध्यक्ष के संज्ञान में आने के बाद कई शिकायतें जिलास्तर पर भी हल हो सकेंगी।
यानी इससे छोटी और स्थानीय समस्याओं का समाधान पहले ही हो जाएगा और मंत्रियों तक सिर्फ जरूरी मामले पहुंचेंगे।
अप्रैल में किस दिन कौन मंत्री मिलेंगे?
नए रोस्टर के मुताबिक अप्रैल महीने में हर सोमवार को अलग-अलग मंत्री प्रदेश कार्यालय में उपलब्ध रहेंगे। 1 अप्रैल को विश्वास सारंग और लखन पटेल, 2 अप्रैल को कैलाश विजयवर्गीय और प्रतिमा बागरी, 3 अप्रैल को विजय शाह और नरेंद्र शिवाजी पटेल की बारी थी। इसी तरह आगे के दिनों में राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार, दादा पटाम सिंह, दिलीप जायसवाल, कृपाराम शर्मा, संपतिया उइके, राजेंद्र शुक्ल, प्रह्लाद सिंह पटेल, निर्मला भूरिया समेत अन्य मंत्री अपनी-अपनी तय तारीखों पर उपलब्ध रहेंगे।
महीने के अंत यानी 27 से 30 अप्रैल तक नागेंद्र सिंह, प्रद्युम्न सिंह तोमर, धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और कृष्णा गौर की बारी रहेगी।
| तारीख | मंत्रियों के नाम |
| 01 अप्रैल | विश्वास सारंग, लखन पटेल |
| 02 अप्रैल | कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी |
| 03 अप्रैल | विजय शाह, नरेन्द्र शिवाजी पटेल |
| 07 अप्रैल | राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार |
| 08 अप्रैल | उदय प्रताप सिंह, दिलीप जायसवाल |
| 09 अप्रैल | करणसिंह वर्मा |
| 10 अप्रैल | संपतिया उइके |
| 13 अप्रैल | राजेन्द्र शुक्ल, नारायण पंवार |
| 15 अप्रैल | प्रहलाद सिंह पटेल, निर्मला भूरिया |
| 16 अप्रैल | गोविन्दसिंह राजपूत |
| 17 अप्रैल | नारायणसिंह कुशवाह |
| 21 अप्रैल | ऐदलसिंह कंसाना |
| 22 अप्रैल | राकेश शुक्ला |
| 23 अप्रैल | चैतन्य कश्यप |
| 24 अप्रैल | इंदरसिंह परमार |
| 27 अप्रैल | नागरसिंह चौहान |
| 28 अप्रैल | प्रद्युम्नसिंह तोमर |
| 29 अप्रैल | धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी |
| 30 अप्रैल | कृष्णा गौर |
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