एमपी बीजेपी का नया दांव: केंद्र से समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे सांसद, अटके कामों पर रखेंगे नजर

Arohi Raj | Oct 27, 2026, 13:35 IST
एमपी बीजेपी के सांसदों को केंद्रीय मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलेगी।
मध्यप्रदेश में भाजपा केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पार्टी एक नया प्रयोग कर सकती है। इसके तहत प्रदेश के हर भाजपा सांसद को केंद्र सरकार के एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद प्रदेश से जुड़े प्रस्तावों, योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना है।

इससे केंद्रीय मंत्रालयों में अटके मामलों की निगरानी भी आसान हो सकती है। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है। अभी राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों को कई कामों के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क करना पड़ता है। इनमें योजनाओं की मंजूरी, बजट और परियोजनाओं से जुड़े मामले शामिल हैं। कई बार इन मामलों में फैसला होने में समय लगता है। ऐसे में सांसदों को मंत्रालयों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने से कामकाज में मदद मिल सकती है।



एमपी की सभी 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा

मध्यप्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के पास अपने सभी सांसदों को इस व्यवस्था में जिम्मेदारी देने का अवसर है। वहीं, राज्यसभा में मध्यप्रदेश की एक सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इस स्थिति में पार्टी लोकसभा सांसदों के अनुभव और केंद्र सरकार के मंत्रालयों से उनके संपर्क का उपयोग प्रदेश के कामकाज में करना चाहती है।



अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो सांसदों को अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े कामों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे राज्य सरकार के विभागों को केंद्र के सामने अपनी बात रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किस सांसद को कौन-सा मंत्रालय दिया जाएगा, इस बारे में अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।



सांसदों को मंत्रालय की जिम्मेदारी देने से क्या फायदा होगा?

  • केंद्रीय मंत्रालयों में अटके काम आगे बढ़ेंगे

राज्य सरकार के कई प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालयों में मंजूरी का इंतजार करते हैं। इनमें विकास परियोजनाओं, योजनाओं और आर्थिक सहायता से जुड़े मामले हो सकते हैं। अगर किसी सांसद को संबंधित मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलती है, तो वह इन मामलों की जानकारी ले सकता है। वह अधिकारियों से संपर्क कर प्रस्ताव की स्थिति समझ सकता है। जरूरत पड़ने पर मामले को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत भी कर सकता है। इससे लंबित मामलों की नियमित निगरानी में मदद मिल सकती है।



  • मुख्यमंत्री और अधिकारियों के साथ समन्वय

प्रस्तावित व्यवस्था में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ भी तालमेल रखा जा सकता है। इससे प्रदेश की प्राथमिकता वाले मामलों की जानकारी सांसदों तक पहुंच सकेगी। इसके बाद सांसद संबंधित केंद्रीय मंत्रालय में इन मामलों को उठा सकते हैं। इस तरह राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का एक तय माध्यम बन सकता है। इससे जरूरी परियोजनाओं की समीक्षा करना भी आसान हो सकता है।



  • केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने में मदद

केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ राज्यों को मिलता है। इसके लिए संबंधित विभागों को जरूरी प्रस्ताव और दस्तावेज केंद्रीय मंत्रालयों तक पहुंचाने होते हैं। कई मामलों में बजट, मंजूरी या अन्य प्रक्रियाओं के कारण देरी हो सकती है। ऐसे में सांसद संबंधित मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं और विभागों को जरूरी जानकारी दिलाने में मदद कर सकते हैं। इससे योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



  • हर मंत्रालय के काम की जिम्मेदारी तय होगी

अगर सांसदों को मंत्रालय के हिसाब से जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह पता रहेगा कि किस मंत्रालय से जुड़े मामलों की निगरानी कौन कर रहा है। इसके बाद संबंधित मामलों की प्रगति की जानकारी भी ली जा सकती है। इससे Accountability यानी जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए, किसी मंत्रालय में मध्यप्रदेश की परियोजना लंबित है, तो उसकी स्थिति जानने के लिए संबंधित सांसद से संपर्क किया जा सकता है। इससे मामले की निगरानी के लिए एक तय माध्यम उपलब्ध होगा।



  • अधिकारियों को समन्वय का अतिरिक्त रास्ता मिलेगा

अभी राज्य सरकार के विभागों को केंद्रीय मंत्रालयों से सीधे संपर्क करना पड़ता है। जरूरत के अनुसार अधिकारियों को दिल्ली भी जाना पड़ सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर संबंधित सांसद के माध्यम से समन्वय का एक अतिरिक्त रास्ता मिल सकता है। सांसद मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत कर राज्य के मामलों को सामने रख सकते हैं। हालांकि, इससे अधिकारियों के दिल्ली जाने की जरूरत कितनी कम होगी, यह व्यवस्था लागू होने और उसके काम करने के तरीके पर निर्भर करेगा।



केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश

मध्यप्रदेश में भाजपा का यह प्रस्ताव प्रशासनिक कामकाज में बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। राज्य सरकार को कई विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की मदद की जरूरत होती है। ऐसे में सांसदों को मंत्रालयों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी मिलने से राज्य के मामलों को केंद्रीय स्तर पर उठाने में मदद मिल सकती है।



लेकिन इस व्यवस्था का असली फायदा तभी सामने आएगा, जब जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी। साथ ही, संबंधित विभागों और मंत्रालयों के बीच समय पर जानकारी का आदान-प्रदान भी जरूरी होगा। फिलहाल यह एक प्रस्तावित व्यवस्था है। इसके लागू होने, सांसदों को मंत्रालय बांटने और कामकाज की प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है।



FAQs



  1. मध्यप्रदेश भाजपा क्या नया प्रयोग करने जा रही है?
    भाजपा प्रदेश के हर सांसद को केंद्र सरकार के एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने के सुझाव पर विचार कर रही है।
  2. सांसदों को मंत्रालय की जिम्मेदारी क्यों दी जाएगी?
    इसका उद्देश्य मध्यप्रदेश से जुड़ी योजनाओं, परियोजनाओं और लंबित प्रस्तावों को केंद्रीय मंत्रालयों में आगे बढ़ाने में मदद करना है।
  3. इस व्यवस्था से राज्य सरकार को क्या फायदा हो सकता है?
    इससे केंद्रीय मंत्रालयों में लंबित मामलों की जानकारी लेने, अधिकारियों से संपर्क करने और जरूरी प्रस्तावों की निगरानी में मदद मिल सकती है।
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