इंदौर में भाजपा पदयात्रा से 6 घंटे जाम, जबलपुर में रास्ते बंद; अब भोपाल में आयोजन से पहले उठ रहे सवाल

Ramanand Tiwari | Nov 03, 2026, 24:03 IST
भाजपा की भोपाल में प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Following the disruption of traffic during a BJP padyatra in Indore and the diversion of traffic in Jabalpur, questions are now being raised regarding a proposed padyatra in Bhopal.
मध्य प्रदेश में भाजपा की पदयात्राओं के कारण यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इंदौर में पदयात्रा के दौरान करीब छह घंटे तक लोगों को जाम और बंद रास्तों से परेशानी हुई। वहीं, जबलपुर में सोमवार को आयोजित पदयात्रा के लिए कई रास्तों पर छह घंटे तक यातायात प्रतिबंध लागू रहे।

अब 4 नवंबर को भोपाल में होने वाली भाजपा की पदयात्रा से पहले कांग्रेस ने इसका रास्ता बदलने की मांग की है। त्योहार के चलते बाजारों में खरीदारी बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान आम लोगों को आने-जाने में परेशानी से कैसे बचाया जाएगा।



इंदौर में डेढ़ किलोमीटर की पदयात्रा, छह घंटे तक परेशानी

इंदौर में 30 अक्टूबर को भाजपा ने सुभाष नगर से पाटनीपुरा तक पदयात्रा निकाली थी। यात्रा की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर थी, लेकिन इसके लिए सुबह से ही कई जगह बैरिकेडिंग कर दी गई थी।



स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 50 गलियों के रास्ते बंद होने से आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ था। लोगों को आने-जाने के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ा था। करीब छह घंटे तक आवाजाही में परेशानी बनी रही।



किसी की ट्रेन छूटी तो किसी की मजदूरी

इंदौर में रास्ते बंद होने का असर आम लोगों के रोजमर्रा के काम पर भी पड़ा था। जानकारी के अनुसार, कुछ मजदूर काम पर समय से नहीं पहुंच सके, जिससे उनकी दिहाड़ी छूट गई थी। वहीं, कुछ यात्रियों की ट्रेन छूटने की शिकायतें भी सामने आईं थी।



एक व्यक्ति को अपने तेज बुखार से पीड़ित बच्चे को अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता तलाशना पड़ा था। इन परेशानियों के बाद यात्रा के इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं।



पदयात्रा से पहले मंच लगाने के कारण भी लगा जाम

इंदौर में पदयात्रा शुरू होने से पहले भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। कार्यक्रम के लिए सड़क पर स्वागत मंच लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार शाम को इन मंचों के कारण करीब दो घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। कई वाहन चालक जाम में फंसे रहे। इससे कार्यक्रम की तैयारियों और Traffic Management को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।



जबलपुर में छह घंटे लागू रहा ट्रैफिक डायवर्जन

इंदौर के बाद 2 नवंबर को जबलपुर में भाजपा की पदयात्रा आयोजित हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।



कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक कई रास्तों पर Traffic Diversion लागू किया था। इस दौरान कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रही। हालांकि, यातायात प्रतिबंध लागू होने का मतलब यह नहीं है कि सभी रास्तों पर पूरे छह घंटे जाम लगा रहा।



ढाई किलोमीटर से ज्यादा लंबी यात्रा में 80 स्वागत मंच

भाजपा के मुताबिक, जबलपुर में निकाली गई पदयात्रा ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी थी। इसके रास्ते में नेताओं और कार्यकर्ताओं के स्वागत के लिए 80 मंच बनाए गए थे। पार्टी ने अपने प्रेस नोट में दावा किया कि पदयात्रा में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर साधा निशाना

जबलपुर की पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने देश में आपातकाल के इतिहास का जिक्र करते हुए विपक्ष की आलोचना की।



भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध को लेकर कांग्रेस से सवाल पूछे हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बढ़ाना है।



अब 4 नवंबर को भोपाल में निकलेगी भाजपा की पदयात्रा

इंदौर और जबलपुर के बाद अब राजधानी भोपाल में भाजपा की पदयात्रा प्रस्तावित है। प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार, 4 नवंबर की सुबह यात्रा अटल पथ से शुरू होकर रोशनपुरा चौराहे तक जाएगी। भाजपा नेताओं की ओर से इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की जानकारी भी दी गई है। पिछले दो शहरों में यातायात व्यवस्था को लेकर सामने आई परेशानियों के बाद अब भोपाल में होने वाले कार्यक्रम पर भी लोगों की नजर है।



कांग्रेस ने की पदयात्रा का रास्ता बदलने की मांग

भोपाल में प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया माली ने भाजपा अध्यक्ष को पत्र लिखकर यात्रा का Route Change करने की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहार के समय न्यू मार्केट और जवाहर चौक जैसे इलाकों में खरीदारी करने वालों की भीड़ रहती है। ऐसे में पदयात्रा के कारण व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हो सकती है।



हालांकि, कांग्रेस ने अभी संभावित परेशानी की आशंका जताई है। भोपाल में प्रस्तावित कार्यक्रम के कारण वास्तविक जाम लगने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।



भोपाल पुलिस के सामने यातायात संभालने की चुनौती

भोपाल में पदयात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी। खासकर अस्पताल जाने वाले मरीजों, स्कूल के बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और बाजार आने वाले ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए इंतजाम जरूरी होंगे। लोगों को पहले से यह जानकारी मिलना भी जरूरी है कि किन रास्तों पर प्रतिबंध रहेगा और वैकल्पिक मार्ग कौन से होंगे।



राजनीतिक कार्यक्रम के साथ जनता की सुविधा भी जरूरी

भाजपा अपनी पदयात्रा को लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़े मुद्दों पर जनता से संवाद का अभियान बता रही है। दूसरी तरफ इंदौर में सामने आई यातायात की परेशानियों और भोपाल में कांग्रेस की आपत्ति ने आम लोगों की सुविधा का सवाल खड़ा कर दिया है।



अब देखना होगा कि 4 नवंबर को भोपाल में होने वाली पदयात्रा के दौरान प्रशासन यातायात व्यवस्था को किस तरह संभालता है और लोगों को कितनी राहत मिलती है।

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