BJP जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा: 17 हजार किमी, 53 जिले और 700 कार्यक्रम; अब असर पर सवाल
कौन रखेगापरिणाम का हिसाब?
भाजपा सेवा यात्रा (BJP Seva Yatra) करीब 18 दिन, 17 हजार किलोमीटर, 53 जिले, 393 पड़ाव और 700 से ज्यादा कार्यक्रम किए गए। भाजपा की जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा का रिपोर्ट कार्ड आंकड़ों में बड़ा दिखाई देता है।
रक्तदान से पौधरोपण और नदी-तालाब सफाई तक कई काम हुए। अब यात्रा खत्म होने के बाद असली सवाल शुरू होता है। इन गतिविधियों में से कितनी अगले महीने भी जमीन पर दिखाई देंगी और इनके परिणाम का हिसाब कौन रखेगा?
यात्रा पूरी, अब ‘आउटकम’ की बारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में भाजपा के सेवा संकल्प अभियान (Social Campaign) के तहत युवा मोर्चा ने यह यात्रा निकाली। मध्यप्रदेश में 18 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चली यात्रा के समापन पर पार्टी की ओर से करीब 17 हजार किलोमीटर और 53 जिलों का आंकड़ा सामने आया।
यात्रा 14 मार्गों से गुजरी। कुल 393 पड़ावों में 139 रात्रि विश्राम और 254 अन्य पड़ाव बताए गए हैं। इन दौरान 700 से ज्यादा सेवा और जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित करने का दावा है। आंकड़े अभियान का आकार बताते हैं, लेकिन उसका असर नहीं। यही इस यात्रा के खत्म होने के बाद पड़ताल का अगला बिंदु होना चाहिए।
एक महीने बाद क्या तस्वीर होगी?
यात्रा में रक्तदान, स्वच्छता, पौधरोपण, जल संरक्षण, स्वास्थ्य शिविर, नदी-तालाब सफाई, दिव्यांगजनों को उपकरण, पोषण किट वितरण और नशामुक्ति जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।
ये सभी सामाजिक उपयोगिता के काम हैं। लेकिन पौधरोपण का वास्तविक परिणाम पौधा लगाने के दिन नहीं, उसके जीवित रहने से तय होगा। इसी तरह तालाब या नदी की एक दिन सफाई के बाद वहां दोबारा कचरा न पहुंचे, इसके लिए स्थानीय व्यवस्था चाहिए।
यही वजह है कि अभियान का अगला रिपोर्ट कार्ड कार्यक्रमों की संख्या नहीं, उनके फॉलोअप पर बनना चाहिए।
राहुल कोठारी का दावा- यात्रा खत्म, सेवा नहीं
भाजपा प्रदेश महामंत्री और अभियान के प्रदेश संयोजक राहुल कोठारी ने कहा कि उद्देश्य केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करना नहीं था, बल्कि गांवों और शहरों तक पहुंचकर लोगों को सेवा, जल संरक्षण, स्वच्छता और पौधरोपण जैसी गतिविधियों से जोड़ना था।
कोठारी के मुताबिक यात्रा का समापन सेवा गतिविधियों का अंत नहीं है। पार्टी युवाओं और समाज के बीच सेवा तथा जनभागीदारी को आगे भी जारी रखने की बात कह रही है। यही दावा अब इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी भी बन गया है।
यदि सेवा लगातार जारी रहती है तो यह यात्रा एक दीर्घकालिक सामाजिक अभियान का आधार बन सकती है। यदि गतिविधियां यात्रा समाप्त होने के साथ धीमी पड़ती हैं तो 17 हजार किलोमीटर और 700 कार्यक्रमों के बावजूद स्थायी प्रभाव का सवाल बना रहेगा।
शुरुआत 55 जिलों की, आखिर में आंकड़ा 53 का क्यों?
यात्रा से पहले 15 सितंबर को सामने आई कार्यक्रम संबंधी जानकारी में मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों से यात्रा गुजरने और 13 मार्ग निर्धारित होने की बात कही गई थी। समापन के बाद सामने आए विवरण में 53 जिले और 14 मार्ग बताए गए।
यह अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है, यात्रा का रूट कार्यक्रम के दौरान बदल सकता है। लेकिन सार्वजनिक अभियान का अंतिम रिपोर्ट कार्ड जारी करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि शुरुआती 55 जिलों की योजना 53 जिलों तक क्यों रही और 13 मार्ग 14 कैसे हुए। यही छोटा-सा आंकड़ा इस पूरी यात्रा पर एक अलग तथ्यात्मक सवाल खड़ा करता है।
सेवा के साथ संगठन का सीधा जनसंवाद भी
यात्रा के दौरान ग्रामीणों, युवाओं, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक समूहों से संपर्क किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव देवास में पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हरदा और बैतूल में गतिविधियों में हिस्सा लिया।
इसलिए इसे केवल पर्यावरण या सेवा अभियान के रूप में देखना अधूरा होगा। यह भाजपा और उसके युवा कार्यकर्ताओं के लिए व्यापक जनसंपर्क का माध्यम भी रहा। 'द सूत्र' ने यात्रा शुरू होने से पहले अपनी रिपोर्ट में इसके कमजोर और हारी सीटों से गुजरने तथा जनसंपर्क के राजनीतिक पहलू को भी रेखांकित किया था।
आउटकम का डेटा कहां है?
अभी सामने आए प्रमुख आंकड़े किलोमीटर, पड़ाव और कार्यक्रमों की संख्या बताते हैं; इनके दीर्घकालिक परिणाम का कोई समेकित सार्वजनिक आकलन इन स्रोतों में नहीं दिखता।
योजना और अंतिम आंकड़े अलग हैं। पहले 55 जिले और 13 मार्ग बताए गए, समापन पर 53 जिले और 14 मार्ग सामने आए। इस बदलाव की वजह स्पष्ट की जानी चाहिए। फॉलोअप सबसे बड़ी परीक्षा है। लगाए पौधों की देखभाल कौन करेगा?
साफ किए जलस्रोतों की स्थिति दो-तीन महीने बाद कौन जांचेगा? स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे अभियानों में आगे की गतिविधि क्या होगी? यात्रा के 17 हजार किलोमीटर अपने आप में बड़ी संगठनात्मक कवायद हैं। लेकिन अब कहानी ईकिलोमीटर की नहीं, निरंतरता की है।
700 कार्यक्रमों के बाद अगला सवाल सिर्फ इतना है कि अगले छह महीने में इनमें से कितना काम जमीन पर जीवित दिखाई देगा?
FAQ:
- भाजपा सेवा यात्रा का उद्देश्य क्या था?
भाजपा सेवा यात्रा का उद्देश्य लोगों को सेवा, जल संरक्षण, स्वच्छता और पौधरोपण जैसी गतिविधियों से जोड़ना था, तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में यह अभियान चलाया गया। - भाजपा सेवा यात्रा में कुल कितने कार्यक्रम हुए थे?
भाजपा सेवा यात्रा में कुल 700 से ज्यादा सेवा और जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। - भाजपा सेवा यात्रा के बाद का अगला कदम क्या होगा?
यात्रा के बाद का अगला कदम इन गतिविधियों के फॉलोअप पर आधारित होना चाहिए, जिसमें जांच होनी चाहिए कि पौधों की देखभाल कौन करेगा और जलस्रोतों की स्थिति कैसी होगी।