बीजेपी में “छोटे पर गाज, बड़े को नोटिस? शक्ति प्रदर्शन पर कार्रवाई ने खड़े किए संगठन के दोहरे मापदंड पर सवाल

Ramanand Tiwari | May 14, 2026, 22:44 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश भाजपा में "शक्ति प्रदर्शन" और "दोहरे मापदंड" को लेकर विवाद छिड़ गया है। पीएम मोदी पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील कर रहे हैं, लेकिन भाजपा नेताओं के काफिले जारी हैं। सवाल है कि क्या पार्टी छोटे पदाधिकारियों और बड़े नेताओं पर समान कार्रवाई करेगी?

मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों “शक्ति प्रदर्शन राजनीति” और “दोहरे मापदंड” को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ईंधन बचाने और अनावश्यक काफिलों से बचने की अपील कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश में भाजपा नेताओं के वाहन रैली और शक्ति प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे।



सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि पार्टी कार्रवाई केवल छोटे पदाधिकारियों पर कर रही है या बड़े नेताओं और विधायकों पर भी समान मापदंड लागू होंगे? भिंड में भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को 120 गाड़ियों के काफिले पर पद से हटा दिया गया, जबकि दूसरी ओर भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी, पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर और लघु उद्योग विकास निगम अध्यक्ष सतेंद्र भूषण सिंह जैसे नेताओं के मामलों में संगठन का रवैया अलग दिखाई दे रहा है।



पीएम मोदी की अपील बनाम बीजेपी नेताओं का शक्ति प्रदर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों से पेट्रोल-डीजल बचाने और फिजूल वाहन उपयोग कम करने की अपील कर चुके हैं। भाजपा संगठन भी समय-समय पर सादगी और अनुशासन की बात करता रहा है। लेकिन मध्य प्रदेश में हाल के घटनाक्रमों ने संगठन की कथनी और करनी के बीच बड़ा अंतर खड़ा कर दिया है।



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प्रीतम सिंह लोधी का 300 गाड़ियों वाला काफिला चर्चा में

शिवपुरी से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी मंदिर विवाद में संतों के समर्थन के नाम पर करीब 300 गाड़ियों का काफिला लेकर करैरा पहुंचे। इस दौरान पूरे इलाके में शक्ति प्रदर्शन जैसा माहौल बना रहा। राजनीतिक गलियारों में इसे प्रशासन और एसडीओपी स्तर पर अपनी ताकत दिखाने से जोड़कर देखा गया। प्रीतम लोधी का बयान भी काफी आक्रामक रहा, जिसमें उन्होंने “संतों के सम्मान” और “मैदान में उतरने” जैसी बातें कहीं।



अब सवाल यह है कि जब एक विधायक खुले तौर पर इतना बड़ा काफिला निकालता है, तो क्या संगठन उसके खिलाफ भी वही सख्त कार्रवाई करेगा जो छोटे पदाधिकारियों पर की जाती है?



सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस, लेकिन पद बरकरार

मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष बने सौभाग्य सिंह ठाकुर भी विवादों में आ गए। उज्जैन से भोपाल तक कथित तौर पर सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे सौभाग्य सिंह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने आनन-फानन में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।



नोटिस में उन्हें निगम की बैठकों, फैसलों, कार्यालय और प्रशासनिक अधिकारों से अस्थायी रूप से दूर रहने के निर्देश दिए गए। लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि उन्हें तत्काल पद से नहीं हटाया गया। यहीं से भाजपा संगठन पर “दोहरे मापदंड” के आरोप तेज हो गए हैं।



सज्जन सिंह यादव पर सबसे तेज कार्रवाई

भिंड में भाजपा किसान मोर्चा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव 120 लग्जरी वाहनों के काफिले के साथ शहर पहुंचे थे। वीडियो वायरल होते ही भाजपा संगठन ने तेजी दिखाते हुए उनकी नियुक्ति ही निरस्त कर दी। सिर्फ अल्प समय में पद छिन जाना यह संकेत देता है कि संगठन छोटे पदाधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करने में बिल्कुल देर नहीं करता। अब यही तुलना राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।



सवाल: छोटे पर कार्रवाई, बड़े पर सिर्फ “कारण बताओ”?

प्रदेश की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है -



  • क्या भाजपा संगठन अलग-अलग नेताओं के लिए अलग नियम चला रहा है?
  • क्या प्रभावशाली नेताओं को सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
  • क्या विधायक और बड़े निगम अध्यक्ष संगठनात्मक अनुशासन से ऊपर हैं?
  • क्या पीएम मोदी की अपील सिर्फ छोटे कार्यकर्ताओं और जिलाध्यक्षों के लिए है?

सतेंद्र भूषण सिंह का मामला भी चर्चा में

मध्य प्रदेश लघु उद्योग विकास निगम के अध्यक्ष बने सतेंद्र भूषण सिंह भी अपने समर्थकों और काफिले के साथ पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वे भी लाव लश्कर के साथ आए और बाद में पार्टी कार्यालय भी पहुंचे। इसके बाद वे रिक्शे से रवाना हुए। अब संगठन के भीतर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या उनके मामले में भी कोई नोटिस या कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला बिना शोर-शराबे के ठंडा कर दिया जाएगा।



संगठन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

भाजपा हमेशा अनुशासन आधारित संगठन होने का दावा करती रही है। लेकिन हालिया घटनाओं ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कार्रवाई समान रूप से नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि संगठन में “छोटे नेताओं के लिए अलग कानून और बड़े नेताओं के लिए अलग व्यवस्था” चल रही है।



बीजेपी के सामने सबसे बड़ा संकट क्या?

इस पूरे विवाद ने भाजपा संगठन को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी सादगी, ईंधन बचत और जिम्मेदार राजनीति की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्रदेश में भाजपा नेताओं के शक्ति प्रदर्शन वाले काफिले लगातार वायरल हो रहे हैं।



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अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि

  • क्या विधायक प्रीतम लोधी पर कार्रवाई होगी?
  • क्या सौभाग्य सिंह ठाकुर को पद से हटाया जाएगा?
  • क्या सतेंद्र भूषण सिंह को भी नोटिस मिलेगा?
  • या फिर कार्रवाई केवल छोटे पदाधिकारियों तक सीमित रहेगी?
  • पीएम मोदी ने ईंधन बचत और सादगी की अपील की थी
  • प्रीतम सिंह लोधी 300 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे
  • सौभाग्य सिंह ठाकुर पर सीएम कार्यालय ने नोटिस जारी किया
  • सज्जन सिंह यादव को 120 गाड़ियों के काफिले पर पद से हटाया गया
  • सतेंद्र भूषण सिंह का नाम भी शक्ति प्रदर्शन विवाद में चर्चा में
  • भाजपा संगठन पर “दोहरे मापदंड” के आरोप तेज


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