एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब बेसिक गणित वाले भी ले सकेंगे 11वीं में मैथ्स
News In Short
- अब 11वीं में छात्र अपनी पसंद का कोई भी विषय चुन सकेंगे।
- बेसिक गणित वाले छात्र भी अब 11वीं में मैथ पढ़ पाएंगे।
- स्टैंडर्ड मैथ्स की अनिवार्यता वाला पिछला आदेश अब खत्म हुआ।
- इस साल परीक्षा देने वाले 9 लाख छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
- ये नियम इसी शैक्षणिक सत्र से सभी स्कूलों में प्रभावी होंगे।
News In Detail
भोपाल. माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने छात्रों को बड़ी खुशखबरी दी है। अब दसवीं पास छात्र 11वीं में अपनी पसंद का कोई भी विषय ले सकेंगे। बोर्ड ने विषय चुनने से जुड़ी पुरानी पाबंदियां अब पूरी तरह खत्म कर दी हैं। प्रदेश में इस साल करीब नौ लाख छात्रों ने दसवीं की परीक्षा दी है। ये सभी छात्र अब नए नियमों का पूरा लाभ उठा सकेंगे।
खत्म हुई विषय चुनने की पुरानी पाबंदी
नए नियमों के अनुसार बेसिक गणित वाले छात्र भी मैथ ले पाएंगे। पहले 11वीं में गणित पढ़ने के लिए स्टैंडर्ड मैथ्स लेना जरूरी था। अब छात्र अपनी रुचि के हिसाब से विषय का चुनाव कर सकते हैं।
छात्र अब मैथ्स, कॉमर्स या आर्ट्स में से कुछ भी चुनेंगे। मंडल की करिकुलम समिति ने अब इस पुरानी रोक को हटा दिया है। यह फैसला इसी शैक्षणिक सत्र से सभी स्कूलों में लागू होगा। बोर्ड ने इस संबंध में सभी जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
क्यों बदले गए पुराने नियम?
पिछले साल तक बेसिक गणित वालों को मैथ की पात्रता नहीं थी। पुराने नियमों के कारण छात्रों को विषय चयन में दिक्कत होती थी। नवंबर 2024 में स्कूलों को विषय संबंधी कड़े निर्देश दिए गए थे।
उन पुराने आदेशों को अब विभाग ने पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अब स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया नए नियमों के तहत होगी। गर्मियों की छुट्टियां खत्म होते ही नए नियम प्रभावी हो जाएंगे। स्कूलों को अब छात्रों की पसंद को प्राथमिकता देनी होगी।
छात्रों और अभिभावकों को मिलेगी राहत
अब दसवीं के बाद छात्र अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। नियमों में सरलता आने से प्रदेश के लाखों बच्चे खुश हैं। अब बेसिक और स्टैंडर्ड मैथ्स का भेदभाव पूरी तरह खत्म है। छात्र अपनी क्षमता के अनुसार अपना भविष्य खुद तय करेंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग ने छात्रों के हित में यह फैसला लिया। अब प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा नहीं आएगी। छात्रों को बस अपनी रुचि के हिसाब से आवेदन करना होगा।
भविष्य की राह हुई और भी आसान
यह बदलाव मध्य प्रदेश की शिक्षा नीति को और बेहतर बनाएगा। अभिभावकों ने भी एमपी बोर्ड के इस नए फैसले का स्वागत किया। अब बच्चों पर नौवीं कक्षा से ही विषयों का बोझ नहीं होगा।
दसवीं के परिणाम के बाद ही सही फैसला लिया जा सकेगा। प्रदेश के सभी निजी और सरकारी स्कूल इसे जल्द अपनाएंगे। अब छात्रों को गणित पढ़ने से कोई नियम नहीं रोकेगा। बोर्ड ने छात्रों के करियर की राह अब आसान कर दी। यह जानकारी सभी छात्रों तक पहुँचाना बहुत जरूरी है।
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