एमपी बोर्ड सिक्योरिटी प्लान: पेपर लीक हुआ तो डाइस कोड खोलेगा स्कूल की पहचान

Aman Vaishnav | Aug 26, 2026, 08:50 IST
एमपी बोर्ड सिक्योरिटी प्लान
MP बोर्ड में 9वीं से 12वीं के पेपर लीक रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब प्रश्न-पत्र के हर पेज पर स्कूल का डाइस कोड, सील या वॉटरमार्क होगा। इससे पेपर लीक होता है तो उस पर छपे कोड से तुरंत पता चल जाएगा कि पर्चा किस स्कूल से बाहर आया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में अब पेपर लीक रोकना आसान होगा।
  • कक्षा 9वीं से 12वीं तक की परीक्षा में पहली बार सख्त इंतजाम किए गए हैं।
  • हर प्रश्न-पत्र के पन्ने पर स्कूल का डाइस कोड, सील या बोर्ड कोड छपेगा।
  • इससे पेपर लीक होने पर तुरंत पता चलेगा कि वह किस स्कूल से बाहर गया।

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए नया कदम उठाया है। इस बार त्रैमासिक परीक्षा के दौरान हर प्रश्न-पत्र पर संबंधित स्कूल की खास पहचान छापी जाएगी। यह व्यवस्था कक्षा 9वीं से 12वीं तक लागू होगी।



डाइस कोड से कैसे पकड़ी जाएगी स्कूल

हर प्रश्न-पत्र के हर पेज पर डाइस कोड, सील या बोर्ड कोड का वाटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा। अगर कोई पेपर लीक होकर बाहर जाता है, तो उसकी फोटो में यही कोड साफ दिखेगा।



इस कोड के जरिए तुरंत पता चल जाएगा कि पर्चा किस स्कूल से लीक हुआ। इससे जिम्मेदार स्कूल पर सीधी कार्रवाई हो सकेगी।



पहले पेपर लीक होने पर स्रोत का पता लगाना मुश्किल होता था। अब यह नई व्यवस्था जांच को आसान बनाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे लीक की घटनाओं में कमी आएगी।



पेपर तैयार करने से लेकर स्कूल तक पहुंचने की प्रक्रिया

सितंबर से शुरू होने वाली परीक्षाओं के लिए प्रश्न-पत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक सख्त प्रोटोकॉल लागू रहेगा। विमर्श पोर्टल पर जारी ब्लूप्रिंट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी और उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य मिलकर प्रश्न-पत्र तैयार कराएंगे।



इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रश्न-पत्र तैयार करने का पूरा काम 2 सितंबर तक पूरा हो जाएगा।



इसके बाद 3 सितंबर तक सभी प्रश्न-पत्र संबंधित स्कूलों तक पहुंचा दिए जाएंगे। यह समय-सीमा तय करने से लीक की आशंका कम रहेगी।



प्रिंटिंग में शिक्षकों की ड्यूटी अनिवार्य

वहीं यदि किसी स्कूल को प्रश्न-पत्रों की फोटोकॉपी या प्रिंटिंग निजी दुकान से करानी पड़े, तो वहां शिक्षक की मौजूदगी अनिवार्य होगी। यह नियम प्राइवेट प्रिंटिंग सेंटर से जुड़ी लीक की घटनाओं को रोकने के लिए बनाया गया है।



छपाई पूरी होते ही कंप्यूटर, प्रिंटर या किसी भी अन्य सिस्टम से पेपर की सॉफ्ट कॉपी डिलीट करानी होगी। इससे डिजिटल कॉपी के गलत हाथों में जाने का खतरा कम होगा। स्कूलों को 25 सितंबर तक परीक्षा परिणाम भी देना अनिवार्य किया गया है।



जानें परीक्षा का पूरा शेड्यूल

त्रैमासिक परीक्षा 7 से 17 सितंबर के बीच दो पालियों में आयोजित होगी। कक्षा 9वीं और 10वीं की परीक्षाएं सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेंगी। कक्षा 11वीं और 12वीं की परीक्षाएं दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होंगी।



इस शेड्यूल से स्कूलों को पेपर वितरण और परीक्षा संचालन में सहूलियत मिलेगी। दोनों पालियों में अलग समय होने से निगरानी भी आसान रहेगी।



नए नियम से क्या बदलेगा

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा जवाबदेही तय करना है। अब तक पेपर लीक होने पर जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता था। डाइस कोड की वजह से अब हर स्कूल की जिम्मेदारी सीधे तौर पर तय होगी।



शिक्षा विभाग की यह पहल आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। अगर त्रैमासिक परीक्षा में यह व्यवस्था सफल रहती है, तो इसे आगे भी लागू किया जा सकता है।



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