MP Board Results 2026: शिक्षकों की कमी ने बिगाड़ा छात्रों का रिजल्ट, जानें कैसे
MPBSE MP Board. एमपी बोर्ड के 10वीं और 12वीं के नतीजे आ गए हैं। पास होने वाले छात्रों के घरों में बहुत खुशी है। लेकिन कुछ विषयों के आंकड़े काफी चिंता देने वाले हैं। इंग्लिश, मैथ्स और साइंस में बहुत छात्र फेल हुए हैं।
इन कठिन विषयों ने छात्रों का रिजल्ट बिगाड़ दिया है। लगभग 4 लाख बच्चे इन विषयों में पिछड़ गए हैं। यह आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दर्शाता है। स्कूलों में बुनियादी संसाधनों की भारी कमी नजर आती है। छात्र आखिर इन विषयों में क्यों फेल हुए? जानिए पूरा मामला...
इंग्लिश और मैथ्स का 'खौफ' बरकरार
हाईस्कूल यानी 10वीं कक्षा के रिजल्ट्स में इंग्लिश और मैथ्स सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं। जहां हिंदी और संस्कृत जैसे विषयों में पास प्रतिशत बेहतर है, वहीं इंग्लिश ने छात्रों को सबसे ज्यादा रुलाया है।
| विषय (Subject) | फेल परीक्षार्थियों की संख्या (Approx) |
| इंग्लिश (English) | 1.97 लाख |
| मैथ्स (Mathematics) | 1.86 लाख |
| साइंस (Science) | 1.47 लाख |
| संस्कृत (Sanskrit) | 51 हजार |
| हिंदी (Hindi) | 47 हजार |
आंकड़ों से स्पष्ट है कि 10वीं का कुल रिजल्ट भले ही 73.42% रहा हो, लेकिन साइंस और मैथ्स में बुनियादी समझ (Conceptual Clarity) की कमी के कारण एक बड़ी आबादी को असफलता हाथ लगी है।
12वीं का रिजल्ट: साइंस और कॉमर्स की चुनौतियां
हायर सेकेंडरी यानी 12वीं का रिजल्ट 76.01% रहा, लेकिन यहां भी 'कोर' विषयों का प्रदर्शन निराशाजनक है। विशेष रूप से साइंस संकाय के छात्र भौतिकी और रसायनशास्त्र में पिछड़ गए हैं।
- इंग्लिश: 78 हजार छात्र फेल।
- रसायनशास्त्र (Chemistry): 48 हजार छात्र असफल।
- भौतिकी (Physics): 41 हजार छात्र फेल।
- अर्थशास्त्र (Economics): 30 हजार छात्र फेल।
- राजनीति साइंस: 18 हजार छात्र फेल।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी
छात्रों की इस विफलता का सीधा संबंध स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता से है। एडुकेशनिस्ट का मानना है कि जब पढ़ाने वाले ही नहीं होंगे, तो छात्र बेहतर प्रदर्शन कैसे करेंगे?
खाली पदों की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के कुल48 हजार पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 21 हजार पदों पर ही शिक्षकों की तैनाती है। आधे से अधिक पद खाली होने का सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों और विभाग का रुख
एडुकेशनिस्ट उषा खरे ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़ी बात कही है। उनका कहना है कि शिक्षकों के बिना पढ़ाई अधूरी है। मुख्य विषयों के टीचर न होना एक बड़ी समस्या है। खाली पदों को भरे बिना सुधार मुमकिन नहीं है।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए टीचर बहुत जरूरी हैं। दूसरी ओर, कमिश्नर अभिषेक सिंह ने बड़ा भरोसा दिया है। वे बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी।
खाली पदों को भरने का काम अब तेज किया जाएगा। विभाग चाहता है कि भविष्य में नतीजे और बेहतर हों।
ऐसा रहा एमपी बोर्ड 2026 रिपोर्ट कार्ड
- 10वीं कुल परीक्षार्थी: 7.87 लाख (पास: 5.78 लाख, फेल: 2.09 लाख)
- 12वीं कुल परीक्षार्थी: 6.13 लाख (पास: 4.66 लाख, फेल: 1.46 लाख)
- सबसे कठिन विषय: इंग्लिश (दोनों कक्षाओं में सबसे अधिक फेल)
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