एमपी में घर बनाना अब आसान: NOC के झंझट खत्म, सिर्फ ऑनलाइन मिलेगी परमिशन
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में भवन अनुज्ञा के लिए अब ज्यादातर NOC जरूरी नहीं होगी।
- आवेदन से मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी।
- अब सिर्फ डिजिटल दस्तावेज ही मान्य किए जाएंगे।
- हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग की NOC जरूरत खत्म हुई।
- एयरपोर्ट और हेरिटेज जैसे खास मामलों में अब भी NOC जरूरी रहेगी।
मध्य प्रदेश के शहरों में अब घर या भवन बनाना पहले से आसान होगा। राज्य सरकार ने भवन अनुज्ञा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। इसे संक्षेप में NOC यानी No Objection Certificate कहा जाता है।
इससे आम लोगों के साथ बिल्डर और निवेशक भी राहत महसूस करेंगे। अब तक इस प्रक्रिया में लगने वाला समय और मेहनत दोनों घटेंगे।
क्या है नया बदलाव
अब आवेदकों को हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग के अलग-अलग चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। भवन अनुज्ञा की पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी। इसमें केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी निकायों को निर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है। साथ ही इसमें पारदर्शिता भी लाई जा रही है।
किन विभागों की राहत मिली
नई व्यवस्था के तहत कई विभागों की NOC अनिवार्यता खत्म हुई है। इनमें सहकारिता विभाग और गृह निर्माण सहकारी समितियां शामिल हैं। नजूल और बिजली विभाग की NOC भी अब जरूरी नहीं होगी।
रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों में भी राहत मिली है। मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के मामलों में भी छूट दी गई है। विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी राहत दी गई है। ऐसे मामलों में अब आवेदकों को खुद NOC नहीं लानी होगी।
7 दिन में भेजा जाएगा मामला
कुछ मामलों में विभाग की राय अब भी जरूरी हो सकती है। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी खुद विभाग से जवाब मांगेगा। आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर प्रकरण संबंधित विभाग को भेजा जाएगा।
इसके बाद विभाग को 21 दिन के भीतर जवाब देना होगा। अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो भी काम नहीं रुकेगा। ऐसी स्थिति में भवन अनुमति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाएगी।
कहां अब भी NOC जरूरी
कुछ खास मामलों में अब भी NOC जरूरी रहेगी। इनमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI से जुड़े मामले शामिल हैं। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण यानी NMA और हेरिटेज क्षेत्र भी इसमें आते हैं।
बता दें कि यह NOC हर जगह जरूरी नहीं होगी। सिर्फ उन्हीं मामलों में यह मांगी जाएगी, जहां जांच जरूरी लगे।
इसके लिए ऑनलाइन GIS आधारित जांच की जाएगी। अगर भूखंड प्रतिबंधित क्षेत्र में मिला, तभी NOC मांगी जाएगी। बाकी मामलों में इसकी जरूरत नहीं होगी।
पर्यावरण-फायर नियम साफ
पर्यावरण से जुड़े नियमों में भी अब स्पष्टता आई है। बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही पर्यावरणीय स्वीकृति जरूरी होगी। पेड़ काटने की अनुमति भी सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही लेनी होगी।
फायर यानी अग्निशमन से जुड़े नियम पहले जैसे ही रहेंगे। ये नियम राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार लागू होते रहेंगे। यानी सुरक्षा से जुड़े मानकों में कोई ढील नहीं दी गई है। सरकार का मानना है कि सुरक्षा और सरलता दोनों साथ चल सकते हैं।
पहले और अब में फर्क
पहले भवन अनुमति के लिए कई विभागों की NOC जरूरी होती थी। अब अधिकांश मामलों में यह बाध्यता खत्म कर दी गई है। पहले हार्ड कॉपी जमा करनी पड़ती थी, अब सिर्फ डिजिटल दस्तावेज मान्य होंगे।
पहले आवेदकों को खुद विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। पहले NOC में देरी से फाइल अटक जाती थी। अब जरूरत होने पर सरकार खुद विभागों से राय लेगी।
अफसर का बयान
इस पूरे बदलाव से जुड़ा आदेश अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने जारी किया है। आदेश के मुताबिक भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना जरूरी था। साथ ही इसमें पारदर्शिता लाना भी मकसद रहा है।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव से आम नागरिकों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।
अब तक भवन अनुमति के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता था। कई बार अलग-अलग विभागों की NOC में ही काफी समय निकल जाता था। नए नियमों के बाद यह इंतजार काफी कम हो जाने की उम्मीद है।
शहरों में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के बीच यह बदलाव अहम है। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही सरकारी दफ्तरों में भी काम का बोझ कम होगा। आने वाले समय में इसका असर जमीनी स्तर पर दिखने की उम्मीद है।
FAQ
- मध्य प्रदेश में भवन अनुज्ञा के नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
राज्य सरकार ने भवन अनुज्ञा के लिए कई विभागों से NOC यानी अनापत्ति प्रमाण-पत्र लाने की बाध्यता खत्म कर दी है। इनमें हाउसिंग सोसायटी, नजूल और बिजली विभाग शामिल हैं। अब आवेदन से मंजूरी तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और सिर्फ डिजिटल दस्तावेज ही मान्य किए जाएंगे। - एमपी में किन मामलों में अब भी NOC जरूरी रहेगी?
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़ी NOC कुछ खास मामलों में ही जरूरी होगी। यह सिर्फ तब मांगी जाएगी जब ऑनलाइन GIS आधारित जांच में भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। बाकी मामलों में इसकी जरूरत नहीं होगी।
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