एमपी में बस किराया बढ़ाने की मांग, संचालक बोले- सालों से झेल रहे घाटा
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी के निजी बस ऑपरेटर्स ने स्टेज कैरिज बसों का किराया बढ़ाने की मांग की है।
- ऑपरेटर्स का कहना है कि साल 2021 के बाद से किराए में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- डीजल के भी बढ़ गए हैं, साथ ही टायर और स्पेयर पार्ट्स भी बहुत महंगे हो गए हैं।
- बस संचालक गाड़ियों का ठीक से मेंटेनेंस नहीं करा पा रहे हैं।
- बस एसोसिएशन ने सरकार को हड़ताल की चेतावनी दी है।
सरकार से बस किराया बढ़ाने की मांग
मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर जल्द ही बोझ बढ़ सकता है। प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्स ने सरकार से बसों का किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है।
ऑपरेटर्स का कहना है कि पिछले पांच सालों से लगातार महंगाई बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमत भी आसमान छू रही है। साथ ही गाड़ियों के रखरखाव के खर्च ने इस पूरे कारोबार को घाटे का सौदा बना दिया है।
हालत यह हो चुकी है कि कई बस मालिक अपनी गाड़ियों का जरूरी मेंटेनेंस तक नहीं करा पा रहे हैं। इसका सीधा असर यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ने लगा है।
मेंटेनेंस के लिए पैसे कहां से लाएं?
बस संचालकों का साफ कहना है कि वे यात्रियों की जान और सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण बसों की सही देखरेख करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। गाड़ियों का सही समय पर काम नहीं होगा तो सुरक्षित सफर करा पाना मुमकिन नहीं रह जाएगा।
एमपी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन और सुरेंद्र तनवानी ने अपना तर्क दिया। उन्होंने बताया कि अकेले मई के महीने में ही डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए हैं। डीजल महंगा होने से बसों को चलाने की लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
बस ऑपरेटर्स की मुख्य मांगें?
एसोसिएशन ने सरकार के सामने किराया बढ़ाने का एक नया फॉर्मूला रखा है। ऑपरेटर्स चाहते हैं कि सामान्य बसों का किराया इस तरह तय किया जाए।
| यात्रा की दूरी | वर्तमान स्थिति और मांग |
| शुरुआती 5 किलोमीटर | न्यूनतम किराया कम से कम 14 रुपए किया जाए। |
| 5 किलोमीटर के बाद | प्रति किलोमीटर किराया 2.50 रुपए बढ़ाया जाए। |
परिवहन मंत्री और अधिकारियों को दी जानकारी
बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हाल ही में प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और परिवहन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने मंत्री को इस पूरे संकट के बारे में विस्तार से समझाया। मुलाकात के बाद मंत्री ने बस ऑपरेटर्स को भरोसा दिलाया है कि सरकार इस मामले पर जल्द ही फैसला लेगी।
5 साल से नहीं बदला किराया
ऑपरेटर्स का दर्द है कि सरकार ने पहले भी उनकी मांगों को पूरा नहीं किया था। साल 2021 में जब किराया तय हो रहा था, तब बस संचालकों ने 1.65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर तय करने की मांग की थी। सरकार ने केवल 1.25 रुपए की दर को ही मंजूरी दी थी।
अप्रैल 2021 के बाद से अब तक बस किराए में कोई संशोधन नहीं हुआ है। इन 5 वर्षों में लागत कई गुना बढ़ गई है। केवल डीजल ही नहीं, बल्कि इंजन ऑयल, यूरिया, टायर, रबर पार्ट्स और दूसरे स्पेयर पार्ट्स के दाम भी लगातार आसमान छू रहे हैं।
हड़ताल करने की चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर बस संचालक इस बार आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। एसोसिएशन ने सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी दे दी है।
संचालकों का कहना है कि किराया बढ़ाने पर कोई फैसला लिया जाए। ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेशभर के बस संचालक सामूहिक रूप से बसों का संचालन बंद कर देंगे। साथ ही हड़ताल पर चले जाएंगे।
बस संचालकों का कहना है कि राज्य के हजारों बस ऑपरेटर लंबे समय से नुकसान उठा रहे हैं। अब उनके पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
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