सीएम मोहन की कैबिनेट बैठक आज, डिफाल्टर किसानों को मिल सकता है सुरक्षा कवच

Aman Vaishnav | Aug 04, 2026, 08:22 IST
मोहन कैबिनेट बैठक, कैबिनेट बैठक
आज 04 अगस्त को मोहन कैबिनेट होने वाली है। इस कैबिनेट बैठक में लगभग पांच हजार डिफाल्टर किसानों को सुरक्षा कवच मिलने की पूरी संभावना है। ये वो किसान हैं जिन्हें धोखाधड़ी की वजह से मजबूरी में डिफाल्टर घोषित कर दिया गया था।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश के पांच हजार से ज्यादा किसान डिफाल्टर घोषित हैं।
  • इनकी वजह समितियों और प्रबंधकों की गड़बड़ी है।
  • किसानों ने खाद-बीज के बदले जो पैसा जमा किया, वह बैंकों तक नहीं पहुंचा।
  • इस राशि को कई प्रबंधकों और समितियों ने हड़प लिया।
  • अब सरकार इन किसानों को गारंटी का सुरक्षा कवच देने जा रही है।

आज कैबिनेट में बन सकती है सहमति

मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के पांच हजार से ज्यादा डिफाल्टर किसानों को गारंटी का लाभ देने की तैयारी में है। इसे लेकर आज होने वाली कैबिनेट बैठक (मोहन कैबिनेट की बैठक आज) में सहमति बन सकती है।



बता दें कि अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो हजारों किसानों को राहत मिलेगी। ये वही किसान हैं, जिन्हें सालों से सहकारी बैंकों से कर्ज नहीं मिल पा रहा। साथ ही समितियों से खाद-बीज लेने में भी इन्हें दिक्कत हो रही है।



कौन हैं ये डिफाल्टर किसान

दरअसल ये वो किसान हैं जो सहकारी बैंकों से कर्ज नहीं ले पा रहे हैं। इसके अलावा समितियों से खाद-बीज लेने में भी इन्हें रोका जा रहा है। वजह है इनका डिफाल्टर होना, लेकिन असल गड़बड़ी किसानों की तरफ से नहीं हुई।



बात तो यह है कि वर्षों पहले इन किसानों ने खाद-बीज खरीदा था। इसके बदले जो राशि उन्होंने जमा की, वह बैंकों में दर्ज ही नहीं हुई। किस्तों से जुड़ा पैसा भी सहकारिता के रिकॉर्ड में नहीं पहुंचा। यही चूक बाद में किसानों पर भारी पड़ी।



समितियों और प्रबंधकों की गड़बड़ी

किसानों ने जो राशि जमा की थी, वह कई प्रबंधकों और समितियों ने हड़प ली। यह पैसा बैंक के खाते तक कभी नहीं पहुंचा। लंबे समय तक किसानों को इस गड़बड़ी की जानकारी ही नहीं थी। वे अपने खेती के काम में लगे रहे और इस ओर ध्यान नहीं गया।



जब किसानों को नया खाद-बीज लेने से रोका गया, तब असली मामला सामने आया। पता चला कि उनकी जमा राशि बैंक में दर्ज ही नहीं हुई है। इसी वजह से उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया गया है। यह गलती किसानों की नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक थी।



दोषी प्रबंधकों पर हो चुकी है कार्रवाई

इस पूरे मामले में कई प्रबंधक और समितियां जांच के दायरे में आईं। इनमें से कई पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इससे किसानों को सीधी राहत नहीं मिली। उनका डिफाल्टर टैग अब भी बरकरार है।



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