मध्य प्रदेश में 60 हजार करोड़ का हिसाब गायब, सरकारी अफसरों ने नहीं दिए सबूत
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के कई विभागों ने बड़ी रकम खर्च की।
- लेकिन 81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्र अब तक नहीं दिए।
- यह रकम 60 हजार 113 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
- कैग ने इसे वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
- सामाजिक न्याय विभाग जैसे कई विभाग जांच के घेरे में हैं।
बड़ा खुलासा
मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों ने वर्ष 2024-25 तक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए 60 हजार 113 करोड़ रुपए निकाले थे। इसके बदले 81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्र पेश नहीं किए गए।
इनमें से 61 हजार 507 प्रमाण-पत्र यानी 76 प्रतिशत सिर्फ 2024-25 से जुड़े हैं। इस दौरान विभागों ने 42 हजाजर 305 करोड़ रुपए खर्च भी कर दिए। बाकी 24 प्रतिशत मामले बीते 10 साल के हैं।
कैग ने इसे वित्तीय नियमों और निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह शासन के कमजोर नियंत्रण तंत्र को दिखाता है। बता दें कि यह खुलासा कैग की 2024-25 राज्य वित्त रिपोर्ट में हुआ है।
सामाजिक न्याय विभाग का मामला
कार्यालय आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के ऑडिट में बड़ी गड़बड़ी मिली है। 2019 से 2024-25 के बीच नशामुक्ति कार्यक्रम पर सात करोड़ 20 लाख रुपए खर्च हुए। अंध-मूक, बधिर शाला और कुष्ठजन कल्याण पर 45 करोड़ 85 लाख रुपए और खर्च किए गए।
कुल मिलाकर विभाग ने 53 करोड़ पांच लाख रुपए खर्च किए। इसके बदले सिर्फ 5 लाख रुपए के उपयोगिता प्रमाण-पत्र दिए गए। विभाग ने जवाब में कहा कि प्रमाण-पत्र जिलों से लेकर पेश किए जाएंगे।
कैग ने यह जवाब स्वीकार नहीं किया। क्योंकि वजह साफ थी मामला पांच साल पुराना था।
5 विभाग, भारी बकाया
मार्च 2025 तक सबसे ज्यादा प्रमाण-पत्र इन पांच विभागों पर बकाया थे।
| विभाग | राशि (करोड़ रुपए) |
|---|---|
| पंचायती राज विकास | 20,453 |
| सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण | 20,045 |
| ग्रामीण विकास | 8,051 |
| नगरीय विकास एवं आवास विभाग | 3,053 |
| खाद्य, नागरिक आपूर्ति | 2,181 |
क्यों जरूरी है सर्टिफिकेट
बता दें कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र यह साबित करता है कि, जारी रकम सही काम में खर्च हुई। यह वित्तीय पारदर्शिता के लिए जरूरी दस्तावेज माना जाता है।
यह सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने में मदद करता है। प्रमाण-पत्र न होने पर केंद्र से मिलने वाला अनुदान भी अटक सकता है।
क्या होगा नुकसान
अगर प्रमाण-पत्र जमा नहीं हुआ तो अगली किस्त रुक सकती है। स्कूलों और दफ्तरों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों की सैलरी तक अटक सकती है।
इससे कई सरकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऑडिट में परेशानी बढ़ेगी और जांच लंबी चल सकती है। गड़बड़ी मिलने पर राशि गबन का केस भी दर्ज हो सकता है।
कैग (CAG report) ने विभागों को स्पष्ट सिफारिश दी है। प्रमाण-पत्र न देने के कारणों की पहचान होनी चाहिए। इसके लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा गया है।
FAQ
- उपयोगिता प्रमाण-पत्र क्या होता है?
यह एक दस्तावेज है जो साबित करता है कि जारी रकम सही काम में खर्च हुई। इससे सरकारी धन का हिसाब पारदर्शी रहता है। - मध्यप्रदेश में कितने प्रमाण-पत्र लंबित हैं?
कैग की रिपोर्ट के अनुसार 81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्र अब तक पेश नहीं हुए। यह रकम 60,113 करोड़ रुपए से जुड़ी है।
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