वन विभाग में घोटाला : DFO-SDO बचे, रेंजर सहित तीन नपे, वन विभाग की कैम्पा योजना में लाखों का फर्जीवाड़ा
News in Short
- ओरछा रेंज कैम्पा योजना में बिना काम भुगतान करने पर तीन वनकर्मी सस्पेंड
- लाखों का भुगतान कराने वाले डीएफओ-एसडीओ पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
- कमीशन के लालच में कैम्पा के बजट से कराया गया था ठेकेदारों को भुगतान
- घोटाले की जांच को लेकर वन मुख्यालय पहुंची वनकर्मियों की शिकायत
- लाखों रुपए के घोटाले में जिम्मेदारों को बचाने चढ़ाई जा रही मातहतों की बलि
News in Detail
लाखों के बजट में सेंधमारी के लिए बदनाम वन विभाग की कैम्पा योजना फिर चर्चा में है। मामला बिना काम कराए भुगतान और मजदूरी बांटने का है। निवाड़ी की ओरछा फॉरेस्ट रेंज में रेंजर, डिप्टी रेंजर और वन रक्षक को निलंबित कर दिया गया है। जबकि भुगतान का आदेश करने वाले डीएफओ और एसडीओ को बचाया जा रहा है। इससे असंतुष्ट वनकर्मियों ने वन मुख्यालय तक शिकायत पहुंचा दी है।
यह पहला मौका नहीं है पिछले साल अशोकनगर जिले में भी पौधरोपण के नाम पर अफसर लाखों रुपए डकार गए थे। वनों की क्षतिपूर्ति के नाम पर कैम्पा में ऐसी ही सेंधमारी हो रही है।
क्षतिपूर्ति वनीकरण के बजट में सेंध
कैम्पा योजना के तहत 2024-25 में क्षतिपूर्ति वनीकरण की स्वीकृति दी गई थी। जिसके तहत वन क्षेत्र, रोपणियों में सीसी रोड सहित अन्य काम कराए जाने थे। इसी बजट में मजदूरी भुगतान की राशि शामिल थी। डीएफओ टीकमगढ़ ने इन कामों के लिए तकनीकी स्वीकृति जारी की थी।
हांलाकि आदेश के बाद भी सीसी सड़क नहीं बनाई गई। भौतिक सत्यापन के बिना ही निर्माण राशि का भुगतान कर दिया गया। निर्माण कार्य, सामग्री और मजदूरी के भुगतान की अनुशंसा टीकमगढ़ और निवाड़ी रेंज के अधिकारियों द्वारा की गई थी।
अफसरों के आदेश पर हुआ भुगतान
टीकमगढ़- निवाड़ी वन क्षेत्र में कैम्पा योजना के तहत निर्माण और भुगतान अफसरों के आदेश पर किया गया। डीएफओ ने इसके लिए आदेश क्रमांक/व्यय/2024/929 दिनांक 9 नवंबर 2024 को जारी किया था। इसी आदेश के आधार पर निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन वन मंडल और अनुभाग अधिकारी द्वारा किया जाना था। अधिकारियों ने ऐसा करना जरूरी ही नहीं समझा और मार्च 2025 में भुगतान करा दिया। वन मुख्यालय के आदेश पर दिसम्बर 2025 में हुई जांच में ये काम मौके पर नहीं मिले।
कार्रवाई में पक्षपात से नाराजगी
वनकर्मियों में सीसीएफ नरेश यादव के स्तर पर की गई कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। वन कर्मचारी संघ ने वन मुख्यालय से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है निर्माण की स्वीकृति और भुगतान वन रक्षक या रेंजर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
डीएफओ द्वारा स्वीकृति दी गई जबकि निगरानी क्षेत्र के एसडीओ के स्तर पर होती है। कार्रवाई से पहले इन अधिकारियों को भी आरोप पत्र दिए जाने थे। पीसीसीएफ मनोज अग्रवाल और सीसीएफ नरेश यादव से इन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
फर्जी वाउचर पर डकार गए लाखों
कैम्पा योजना को वन विभाग के अफसरों ने कमाई का जरिया बना लिया है। बीते साल अशोकनगर जिले में 3 लाख से ज्यादा पौधों का गोलमाल हुआ था। पौधरोपण में 6.97 लाख पौधे रोपने का दावा किया गया था। जब शिकायत पर जांच कराई गई तो वन क्षेत्र और रोपणियों में केवल 3.99 लाख पौधे ही मिले थे।
पौधरोपण, पशुओं को रोकने के लिए खंती खुदाई के नाम पर फर्जी वाउचर के जरिए 61 लाख रुपए की हेराफेरी तब सामने आई थी। इसको लेकर कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी सरकार से शिकायत की थी।
यह खबरें भी पढ़ें...
300 करोड़ के घाटे में डूबे एमपी के पोषण आहार प्लांट, सप्लायरों ने रोका राशन
एमपी बोर्ड 5वीं-8वीं की दोबारा परीक्षा का शेड्यूल जारी, ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
एमपी में 1 मई से लागू होंगे जीएसटी ऑडिट के नए नियम, जानकारी न देने पर होगी कार्रवाई
एमपी के नर्सिंग होम में बड़ा फर्जीवाड़ा: डॉक्टर बने सुपरमैन, एक ही वक्त में 7 अस्पतालों में दे रहे सेवाएं!