एमपी की सड़कों से हटेंगे 10 लाख आवारा मवेशी! NHAI की याचिका पर SC का बड़ा फैसला

Sanjay Dhiman | Sept 21, 2026, 17:33 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की याचिका पर विशेष बेंच बनाई। मध्यप्रदेश की सड़कों से करीब 10 लाख मवेशी हट सकते हैं। NHAI ने शेल्टर बनाने से इनकार किया, खर्च 7000 करोड़ रुपए बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की याचिका पर सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले के लिए विशेष बेंच बनाने की बात कही। इससे मध्यप्रदेश की सड़कों से करीब 10 लाख मवेशी हट सकते हैं। NHAI ने कहा कि यह काम पूरे देश में करना संभव नहीं है। शेल्टर बनाने पर करीब 7000 करोड़ रुपए का खर्च बताया गया है।



SC का ताज़ा फैसला

सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों के लिए शेल्टर बनाने का आदेश पहले दिया जा चुका था। इसी आदेश के खिलाफ NHAI सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई हुई।



कोर्ट ने कहा कि इस मामले को देखने के लिए एक विशेष बेंच बनाई जाएगी। इससे साफ है कि मामला अब गंभीरता से आगे बढ़ेगा। मध्यप्रदेश समेत पूरे देश के लिए यह फैसला अहम है।



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MP में कितने मवेशी सड़क पर

मध्यप्रदेश की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या लाखों में है। सरकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 9 से 10 लाख है। साल 2019 की पशुधन गणना में भी 8 लाख से ज्यादा निराश्रित मवेशी दर्ज किए गए थे।



20वीं पशुधन गणना के अनुसार प्रदेश में कुल 853971 बेसहारा मवेशी थे। यह आंकड़ा 2012 की तुलना में काफी ज्यादा था। इन मवेशियों के कारण सड़कों पर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।



NHAI का पक्ष क्या है

NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच से आग्रह किया। उनकी मांग थी कि जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच यह मामला देखे।



सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि शेल्टर बनाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस काम पर करीब 7000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। उन्होंने जस्टिस नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया वाली बेंच के पुनर्गठन की भी मांग रखी।



सरकार की तैयारी

मध्यप्रदेश सरकार पहले से ही इस दिशा में काम कर रही है। राज्य में गौशालाओं का निर्माण लगातार जारी है। सरकार हर गाय के लिए 40 रुपए प्रतिदिन का अनुदान भी दे रही है।



इसके अलावा राज्य सरकार ने कई विशेष कार्ययोजनाएं भी बनाई हैं। इनका मकसद सड़कों को आवारा मवेशी से मुक्त रखना है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना भी लक्ष्य है।



आगे क्या होगा

अब यह मामला विशेष बेंच के सामने जाएगा। कोर्ट के अगले फैसले पर सबकी नजर रहेगी। अगर शेल्टर बनाने का आदेश बरकरार रहा, तो मध्यप्रदेश की सड़कों की तस्वीर बदल सकती है।



लाखों मवेशियों को सुरक्षित ठिकाना मिल सकेगा। साथ ही सड़क हादसों में भी कमी आने की उम्मीद है। हालांकि खर्च और जिम्मेदारी को लेकर विवाद अभी बना हुआ है।



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