एमपी की 30 सरकारी वेबसाइट्स पर मंडराया हैकिंग का खतरा, बिना आईडी-पासवर्ड सरकारी सर्वर पर हमला कर सकते हैं हैकर्स
खतरे में एमपी की सरकारी वेबसाइट्स
बता दें कि यह एडवाइजरी एमपी सर्ट ने जारी की है। यह मध्य प्रदेश सरकार की साइबर सुरक्षा विंग है। एडवाइजरी (MP-CERT advisory ) में प्रदेश के करीब 30 विभागों पर खतरा बताया गया है। यह सभी विभागों और उनकी वेबसाइट संभालने वाली एजेंसियों के लिए है।
इन एजेंसियों को सर्विस प्रोवाइडर कहा जाता है। एडवाइजरी में तुरंत जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया गया है। सभी विभागों और सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने सिस्टम की सुरक्षा अपडेट करने को कहा गया है।
ड्रूपल और जूमला वाली साइटें भी जद में
यह खतरा सिर्फ PHP पर बनी वेबसाइट्स तक ही सीमित नहीं है। वर्डप्रेस, ड्रूपल और जूमला जैसे प्लेटफॉर्म पर बनी साइट्स भी इसकी चपेट में आ सकती हैं। इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई सरकारी और निजी वेबसाइट्स बनाने में होता है।
वेबसाइट हैकिंग कैसे हो सकती है?
बता दें कि यह खामी वेबसाइट के मुख्य सिस्टम की मेमोरी सुरक्षा से जुड़ी है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब सर्वर की मेमोरी का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं होना है। हैकर्स बिना अनुमति रिक्वेस्ट भेजकर इस खामी का फायदा उठा सकते हैं। इसके लिए उन्हें आईडी या पासवर्ड की भी जरूरत नहीं होती। इससे वेबसाइट हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।
डेटाबेस में वेबसाइट से जुड़ी जरूरी जानकारी रखी जाती है। हैकर्स इसकी मदद से डेटाबेस के पासवर्ड और गोपनीय की तक पहुंच सकते हैं। यूजर्स के एक्टिव सेशन टोकन भी खतरे में पड़ सकते हैं। सेशन टोकन एक डिजिटल पहचान होती है, जो लॉग-इन करने के बाद मिलती है।
एआई से कैसे बढ़ा खतरा?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह खामी पुराने वर्जन में करीब 10 साल से मौजूद थी। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने एआई मॉडल की मदद से दिखाया कि इस खामी का फायदा कैसे उठाया जा सकता है। यानी करीब 10 साल पुरानी कमजोरी से अब एआई की मदद से हमले का खतरा सामने आया है। दूसरी ओर असली कहानी इसके बाद शुरू होती है।
अलर्ट से पहले पकड़ी गईं खामियां
एमपी-सर्ट का कहना है कि अलर्ट जारी होने से पहले ही उसकी टीमों ने कुछ खामियां पकड़ ली थीं। एमपी-सर्ट के जॉइंट डायरेक्टर वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि इस अलर्ट से पहले हमारी टीमों ने कुछ खामियां पकड़ ली थीं। साइबर सुरक्षा से जुड़ा यह अलर्ट (cyber security alert ) सभी संबंधित विभागों को भेज दिया गया है।अब सबसे जरूरी है कि विभाग और सर्विस प्रोवाइडर समय पर अपने सिस्टम अपडेट करें।
सरकारी वेबसाइट की सुरक्षा के निर्देश
एमपी-सर्ट ने विभागों को तीन जरूरी काम करने को कहा है। सबसे पहले सर्वर पर पीएचपी का कौन-सा वर्जन चल रहा है, यह जांचना होगा। इसके बाद आधिकारिक सिक्योरिटी पैच इंस्टॉल करना होगा। यह अपडेट सिस्टम की खामी को ठीक करता है।
तीसरा काम अपडेट के बाद बैकएंड सर्विस को रीस्टार्ट करना है। बैकएंड सर्विस यानी वह सिस्टम, जो वेबसाइट के पर्दे के पीछे काम करता है।
विभाग अब क्या करें?
मध्य प्रदेश साइबर सुरक्षा के लिहाज से ये तीनों कदम काफी जरूरी हैं। सरकारी वेबसाइट की सुरक्षा (government website security) का मतलब है, पोर्टल पर मिलने वाली सेवाओं को सुरक्षित रखना। इसके लिए सबसे पहले हर विभाग को अपने सर्वर पर चल रहे PHP के वर्जन की जांच करनी होगी।
अब सवाल यह है कि क्या सभी विभागों की वेबसाइट्स पर समय रहते सिक्योरिटी पैच लग पाएगा? एमपी-सर्ट ने अपनी एडवाइजरी में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और सर्विस प्रोवाइडर्स को दी है।
PHP क्या है और क्यों जरूरी है?
PHP को कार के इंजन के उदाहरण से समझ सकते हैं। जैसे कार चलाने के लिए इंजन जरूरी है, वैसे ही कई वेबसाइट्स चलाने में PHP काम आता है। यह एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जो वेबसाइट के पीछे होने वाले काम संभालती है।
ब्लॉग से लेकर सरकारी पोर्टल तक, कई वेबसाइट्स में इसका इस्तेमाल होता है। फॉर्म भरना, रिजल्ट देखना या ऑनलाइन खरीदारी करना, इन कामों में PHP की भूमिका हो सकती है। दुनिया की करीब 70% वेबसाइट्स में इसका इस्तेमाल होता है। यानी हर 100 में से लगभग 70 वेबसाइट्स इससे जुड़ी हैं।
अब सोचिए, जिस तकनीक पर इतनी सारी वेबसाइट्स चलती हों, उसमें ही सुरक्षा की खामी निकल आए तो कितना बड़ा खतरा हो सकता है।