पेंशनर्स के लिए खुशखबरी: महंगाई राहत के लिए नहीं करना होगा महीनों इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 4.5 लाख से ज्यादा पेंशनरों को महंगाई राहत (DR) मिलती है।
- अब तक DR बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति जरूरी थी, जिसमें महीनों लग जाते थे।
- यह बाध्यता राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के तहत लागू होती है, जो अब हटाई जाएगी।
- MP के वित्त विभाग ने CG को पत्र लिखकर इस सहमति व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव भेजा है।
- दोनों राज्यों में एक ही दल की सरकार है, इसलिए सहमति बनने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साढ़े चार लाख से ज्यादा पेंशनरों को महंगाई राहत यानी DR बढ़ाने के लिए अब तक दोनों राज्यों की आपसी सहमति जरूरी थी। इसमें महीनों लग जाते थे। MP के वित्त विभाग ने अब CG को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव भेजा है।
यह बाध्यता राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के तहत आती है। दोनों राज्यों में एक ही दल की सरकार है, इसलिए सहमति बनने की उम्मीद है।
25 साल पुरानी है यह परेशानी
साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना था। उस वक्त राज्य पुनर्गठन अधिनियम (State Reorganisation Act) की धारा 49 में यह प्रावधान रखा गया कि वित्तीय मामलों में दोनों राज्यों की सहमति जरूरी होगी।
मकसद था कि किसी एक राज्य पर अचानक वित्तीय बोझ न पड़े। पेंशनरों के मामले में तय हुआ कि 76 प्रतिशत खर्च मध्यप्रदेश और 24 प्रतिशत खर्च छत्तीसगढ़ उठाएगा। यह नियम साल 2000 से पहले के कर्मचारियों पर लागू था।
सहमति में लगते हैं महीने
जब भी केंद्र सरकार पेंशनरों की DR बढ़ाती है, तब MP या CG में से एक राज्य दूसरे को पत्र लिखकर सहमति मांगता है। इसमें समय लगता है। कई बार एरियर भी नहीं मिलता।
पेंशनर संगठन बार-बार यह मांग उठाते रहे हैं कि जिस दिन केंद्र DR बढ़ाए, उसी दिन से राज्य के पेंशनरों को भी लाभ मिले। लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा था।
फॉर्मूला तय है, फिर देरी क्यों
जानकार कहते हैं कि खर्च का फॉर्मूला पहले से तय है। रकम आज नहीं तो कल देनी ही है। ऐसे में सहमति की यह औपचारिकता बेमानी हो गई है। इसी वजह से अब इसे खत्म करने की मांग जोर पकड़ रही है।
MP ने CG को भेजा प्रस्ताव
अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी के निर्देश पर एमपी वित्त विभाग ने छत्तीसगढ़ को आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है। इसमें धारा 49 की बाध्यता खत्म करने की मांग की गई है। दोनों राज्यों में इस समय एक ही दल की सरकार है। इसलिए माना जा रहा है कि सहमति बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।
धारा 49 क्या है ?
साल 2000 में जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना, तो राज्य पुनर्गठन अधिनियम (State Reorganisation Act) में धारा 49 जोड़ी गई।
इस धारा में दोनों राज्यों को वित्तीय मामलों में एक-दूसरे की सहमति लेना जरूरी है। मतलब यह कि अगर MP पेंशनरों की महंगाई राहत (DR) बढ़ाना चाहे, तो पहले CG से पूछना होगा और CG बढ़ाना चाहे तो MP से।
यह नियम इसलिए बना था ताकि बंटवारे के बाद किसी एक राज्य पर अचानक ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े। पेंशन खर्च का फॉर्मूला तय था कि 76 प्रतिशत MP और 24 प्रतिशत CG उठाएगा। लेकिन इस सहमति की प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं, जिससे पेंशनरों को DR का लाभ देर से मिलता है।
पहले भी हुई थी कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब इस नियम को खत्म करने की कोशिश हुई हो। कमल नाथ सरकार के दौरान इस प्रावधान को हटाने की पहल हुई थी। कैबिनेट में निर्णय भी लिया गया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई।
कर्मचारी आयोग ने भी इस बारे में सिफारिश की थी। मुख्य सचिव अनुराग जैन भी इस बदलाव के पक्ष में रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। अब इन सबका असर दिखने लगा है।
केंद्र ने भी दी थी हरी झंडी
पेंशनर्स एसोसिएशन (Pensioners Welfare Association) के संरक्षक गणेश दत्त जोशी के मुताबिक केंद्र सरकार साल 2025 में हाई कोर्ट जबलपुर में एक याचिका में यह कह चुकी है कि दोनों राज्य चाहें तो सहमति की बाध्यता से मुक्त हो सकते हैं। लेकिन इसके लिए भी दोनों की आपसी सहमति जरूरी है।
यानी अब गेंद दोनों राज्यों के पाले में है। MP ने पहल कर दी है। CG की सहमति आते ही 25 साल पुरानी यह बाध्यता खत्म हो सकती है।
पेंशनरों को क्या मिलेगा फायदा
अगर यह बदलाव होता है तो केंद्र के साथ-साथ MP और CG के पेंशनरों को भी समय पर DR का लाभ मिलेगा। एरियर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। महीनों की देरी खत्म होगी। 4.5 लाख पेंशनरों के लिए यह बड़ी राहत होगी।
एक्सपर्ट राय
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार साल 2025 में हाई कोर्ट जबलपुर में यह स्पष्ट कर चुकी है कि दोनों राज्य आपसी सहमति से इस बाध्यता से मुक्त हो सकते हैं।
FAQ
- MP-CG पेंशनरों की DR में देरी क्यों होती है?
राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के तहत MP और CG को वित्तीय मामलों में एक-दूसरे की सहमति लेनी पड़ती है। DR बढ़ाने के लिए भी यही नियम लागू होता है। इसमें कई बार महीनों लग जाते हैं। - धारा 49 क्या है और इसे क्यों हटाया जाएगा?
धारा 49 साल 2000 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम का हिस्सा है। इसमें MP-CG के वित्तीय फैसलों के लिए आपसी सहमति अनिवार्य है। चूंकि DR का फॉर्मूला पहले से तय है, इसलिए सहमति की बाध्यता बेमानी हो गई है और इसे हटाने की मांग उठ रही है। - इस बदलाव से पेंशनरों को क्या फायदा होगा?
धारा 49 हटने के बाद केंद्र सरकार जैसे ही DR बढ़ाएगी, MP और CG के पेंशनरों को भी उसी समय से लाभ मिलेगा। महीनों की देरी खत्म होगी और एरियर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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