एमपी में मार्कफेड की 'डिजिटल स्ट्राइक' : चने की बोरी पर लगाया QR कोड, अब बिचौलियों की हेराफेरी पर लगेगा ताला

Sanjay Dhiman | Apr 19, 2026, 20:08 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में QR कोड तकनीक के जरिए चना खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की पहल की गई है। इस नई पहल से किसान की उपज की गुणवत्ता और पहचान बिना बोरी खोले ही हो सकेगी।

किसानों को उनकी फसल की सही कीमत दिलाने और खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए अब राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। अब, चना उपार्जन केंद्रों पर किसानों के चने की बोरी पर QR कोड लगाया जाएगा। इससे न केवल उपज की गुणवत्ता की पहचान हो सकेगी, बल्कि हेराफेरी और भ्रष्टाचार पर भी पूरी तरह रोक लग सकेगी।



कैसे काम करेगा QR कोड?

अब जब किसान अपने चने के बोरों के साथ उपार्जन केंद्र पर पहुंचेगा, तो सबसे पहले उसकी फसल के लिए एक रिसीव आईडी जनरेट की जाएगी। इसके बाद, चने की हर बोरी पर एक यूनिक QR टैग लगाया जाएगा। इस टैग को थंब मशीन के जरिए किसान के डेटा से जोड़ा जाएगा। गोदाम में माल पहुंचने के बाद अधिकारी टैग को स्कैन कर सकते हैं। किसान का नाम, समिति की जानकारी और चने की वैरायटी (जैसे 202, 204 या देशी) का तुरंत पता चल सकेगा।



यह प्रक्रिया इतनी सरल होगी कि बिना बोरी खोले ही, चने की गुणवत्ता और किस्म की पहचान की जा सकती है। इससे न केवल माल की हेराफेरी रोकी जा सकेगी, बल्कि किसानों को उनका सही हक भी मिलेगा।



बिना बोरी खोले पता चलेगी चने की कुंडली

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अब चने की बोरी को बार-बार खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन ने साफ कर दिया है कि चने की वैरायटी-चाहे वो 202 हो, 204 हो या शुद्ध देसी चना-सब कुछ डेटा में दर्ज होगा।



इससे दो बड़े फायदे होंगे:



  1. समय की बचत: गोदामों में लंबी लाइनें नहीं लगेंगी और वेरिफिकेशन फटाफट हो जाएगा।
  2. क्वालिटी का भरोसा: अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी हेराफेरी करने की सोचेगा, तो QR कोड उसे तुरंत पकड़वा देगा।

किसानों ने स्वागत किया नवाचार का

किसानों ने इस नई पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे उनकी उपज की पहचान बनी रहेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या छेड़छाड़ का पता आसानी से हो सकेगा। वे यह भी मानते हैं कि यह पहल किसानों के लिए फायदेमंद होगी, क्योंकि इससे उनका रिकॉर्ड सही रहेगा और उपज की वैरायटी के अनुसार सही खरीदी हो सकेगी।



प्रयोग सफल हुआ तो पूरे प्रदेश का मॉडल

इस नई पहल को फिलहाल नर्मदापुरम में अपनाया गया है। यहां 22 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां अब तक 642 किसानों ने अपनी उपज बेची है और 23,100 क्विंटल चना खरीदी की गई है। सरकार का उद्देश्य इस नवाचार को और भी बढ़ाना है। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में इसे अन्य फसलों के उपार्जन में भी लागू किया जाएगा।



भविष्य में सभी फसलों पर लगेगा QR कोड?

सरकार की मंशा एकदम साफ है। यह चने से शुरू हुआ एक छोटा सा प्रयोग है, जिसे आने वाले समय में गेहूं, धान और अन्य फसलों पर भी लागू किया जा सकता है। यह खरीदी 31 मई तक चलेगी।



अगर यह मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो पूरे देश के लिए यह एक मिसाल बनेगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी बोरी पर टैग नहीं मिला या वह स्कैन नहीं हुआ, तो सीधे FIR दर्ज की जाएगी।



निष्कर्ष:

इस पहल से न केवल किसानों को उनके हक की उपज मिल रही है, बल्कि उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता भी बढ़ेगी। QR कोड का यह प्रयोग न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि प्रशासन के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। यह डिजिटल समाधान भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा दिखा सकता है।



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