एमपी में सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी कम उम्र में शादी का हो रहे शिकार
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी में कम उम्र में शादी की समस्या अब सिर्फ बेटियों तक सीमित नहीं रही।
- NFHS-6 के ताजा आंकड़ों में यह पहली बार सामने आया है।
- राज्य में 25 फीसद युवक 21 साल की कानूनी उम्र से पहले शादी कर रहे हैं।
- वहीं 20 फीसद से ज्यादा लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है।
- विशेषज्ञ इसे पारिवारिक संकट का संकेत मान रहे हैं।
मध्य प्रदेश में बाल विवाह का चेहरा अब पहले जैसा नहीं रहा है। लंबे समय तक यह मुद्दा सिर्फ बेटियों से जोड़कर देखा जाता रहा।
दूसरी ओर एनएफएचएस (NFHS – नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे) के छठे राउंड के आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। अब लड़कों में भी जल्दी शादी का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों के मुताबिक राज्य में हर चौथा युवक 21 साल से पहले शादी कर रहा है। यह आंकड़ा 25 फीसद तक पहुंच गया है। पहले ऐसा ट्रेंड मुख्य रूप से लड़कियों में देखा जाता था।
वहीं 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों की संख्या भी 20 फीसद से ऊपर बनी हुई है। यानी दोनों तरफ स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
पढ़ाई छूटी, शादी हुई
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधे तौर पर शिक्षा से जुड़ा मुद्दा है। जैसे ही बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ते हैं, परिवार उनकी शादी की तैयारी शुरू कर देते हैं। बच्चों के सामने करियर का विकल्प नहीं रखा जाता।
आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। राज्य में सिर्फ 42 फीसद लड़के ही 10 साल या उससे ज्यादा की स्कूली पढ़ाई पूरी कर पाते हैं। पढ़ाई बीच में छूटते ही परिवार शादी को प्राथमिकता देने लगते हैं।
शहर और गांव में अंतर
शिक्षा के मामले में इंदौर राज्य के अग्रणी जिलों में गिना जाता है। अच्छे स्कूल और कॉलेज होने से यहां हालात अपेक्षाकृत बेहतर हैं।
वहीं शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में स्थिति अलग है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर स्कूल छोड़ने का खतरा ज्यादा रहता है। विशेषज्ञ इन बच्चों पर लगातार निगरानी रखने की सलाह देते हैं।
लड़कियों की स्थिति भी गंभीर
लड़कियों के मामले में शिक्षा से दूरी अब भी बड़ी वजह बनी हुई है। राज्य में सिर्फ 33.7 फीसद लड़कियां ही 10वीं तक की पढ़ाई पूरी कर पाती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और खराब हैं। यहां सिर्फ 26 फीसद लड़कियां ही 10वीं तक पहुंच पाती हैं। इन्हीं इलाकों में 23.4 फीसद लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है।
सुधार के बावजूद खतरा बरकरार
लड़कियों के बाल विवाह के मामलों में पिछले 4 साल में कुछ सुधार जरूर हुआ है। पहले 23.1 फीसद लड़कियों की शादी 18 साल से पहले होती थी। अब यह आंकड़ा घटकर 20 फीसद रह गया है।
इस तरह मध्य प्रदेश अब राष्ट्रीय औसत 20.1 फीसद के करीब पहुंच गया है। लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। आज भी हर 5वीं लड़की की शादी सरकारी तौर पर तय बालिग उम्र से पहले हो रही है।
शिक्षा ही समाधान
विशेषज्ञों के मुताबिक स्कूल छोड़ने की दर को रोकना सबसे जरूरी कदम है। अगर बच्चों को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा तक स्कूल से जोड़े रखा जाए, तो बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि अब बाल विवाह की रोकथाम की रणनीति बदलने की जरूरत है। सिर्फ लड़कियों पर फोकस करने से पूरी तस्वीर नहीं बदलेगी। लड़कों को भी इस दायरे में लाना जरूरी हो गया है।
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