चॉकलेट-चिप्स बच्चों के लिए खतरा, एमपी में 35 लाख से ज्यादा बच्चे एनीमिया पीड़ित

Aman Vaishnav | Jul 17, 2026, 10:08 IST
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मध्य प्रदेश में हर दूसरा बच्चा एनीमिया से जूझ रहा है। कारण सिर्फ एक है पैरेंट्स आजकर बच्चों को फल-सब्जियों की जगह चॉकलेट, चिप्स, बिस्कुट और पिज्जा ज्यादा खिला रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।
  • दस्तक अभियान के तहत 70 लाख 62 हजार बच्चों की जांच हुई।
  • इनमें से 35 लाख 21 हजार बच्चे एनीमिया से पीड़ित मिले।
  • डॉक्टरों का कहना है, बिस्कुट-चिप्स जैसी चीजें इसकी बड़ी वजह हैं।
  • अब 14 जुलाई से फिर दस्तक अभियान शुरू हो गया है।

हर दूसरा बच्चा बीमार क्यों

दरअसल बच्चों को रोज बिस्कुट, चॉकलेट या पिज्जा खिलाना आसान लगता है। लेकिन यह आदत बच्चों की सेहत बिगाड़ रही है। मध्य प्रदेश में लगभग हर दूसरा बच्चा एनीमिया से पीड़ित पाया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी बड़ी वजह खानपान में बदलाव है।



बच्चों की थाली से फल और सब्जियां गायब हो रही हैं। उनकी जगह पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक ने ले ली है। इससे शरीर को जरूरी आयरन नहीं मिल पाता।



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दस्तक अभियान की शुरुआत

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में दस्तक अभियान चलाया था। इसके तहत डिजिटल हीमोग्लोबिन मीटर से बच्चों की जांच हुई। कुल 70.62 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 35.21 लाख बच्चे एनीमिया से पीड़ित निकले।



वहीं इनमें से तीन हजार 575 बच्चों की हालत गंभीर थी। इन बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन देना पड़ा। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या कितनी बड़ी है।



अब 14 जुलाई से दस्तक अभियान फिर शुरू हुआ है। यह अभियान 31 अगस्त तक चलेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की जांच करेंगी। 5 साल से छोटे बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी।



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जिला स्तर पर निगरानी

समय पर जांच और इलाज से बच्चों की जान बच सकती है। टीमें एनीमिया के साथ कुपोषण की समस्या की भी पहचान करेंगी। दस्त, निमोनिया और जन्मजात बीमारियों पर भी नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा।



डॉक्टर की चेतावनी

इसके लिए बॉम्बे चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. राहुल अग्रवाल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पैकेज्ड फूड बच्चों को बीमार बना रहा है। जितना चॉकलेट-चिप्स खिलाएंगे, बीमारी उतनी ही बढ़ेगी। फल और सब्जियां खिलाने से खून बढ़ेगा।



आहार में बदलाव जरूरी

बच्चा जन्म के समय 15 से 18 ग्राम हीमोग्लोबिन लेकर पैदा होता है। छह महीने में यह घटकर 8 से 9 ग्राम रह जाता है। इसके बाद सिर्फ मां का दूध काफी नहीं होता। इस उम्र के बाद फल, हरी सब्जियां और दालें भी दें।



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आयरन वाला भोजन चाहिए

दूध, चाय, बिस्कुट, नमकीन, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक से आयरन नहीं मिलता। इन चीजों से बच्चों का वजन बढ़ता है। लेकिन शरीर में खून नहीं बनता।



स्नैक्स से भूख खत्म

बता दें कि दिनभर बिस्कुट और टॉफी खाने से बच्चों की भूख कम होती है। इससे वे पौष्टिक खाना ठीक से नहीं खा पाते। नतीजा यह होता है कि एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।



एनीमिया क्यों खतरनाक

शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को एनीमिया कहते हैं। हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में खून की कमी होती है। इससे बच्चों में कमजोरी और थकान बढ़ जाती है। पढ़ाई और शारीरिक विकास पर भी असर पड़ता है।



ब्लड ट्रांसफ्यूजन की नौबत

जानकारी के अनुसार कई बच्चों में एनीमिया इतना गंभीर था कि दवा से ठीक नहीं हुआ। ऐसे बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर ब्लड चढ़ाना पड़ा। यह दिखाता है कि बीमारी कितनी बढ़ चुकी थी। समय पर जांच होती तो शायद यह स्थिति टल सकती थी।



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अभिभावकों की भूमिका

सिर्फ 10% अभिभावक ही बच्चों को समय पर संतुलित आहार देते हैं। बाकी परिवार अब भी पैकेज्ड फूड पर निर्भर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह आदत बदलनी होगी। बच्चों की थाली में फल, सब्जियां और सूप शामिल करें।



अभिभावकों के लिए सुझाव

बच्चों को रोज फल और हरी सब्जियां खिलाएं। पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक कम से कम दें। दस्तक अभियान की टीम आने पर पूरा सहयोग करें। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।



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