MP सिविल सेवा के नियम 2026 जारी: 2 से ज्यादा बच्चे तो सरकारी नौकरी नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- MP सरकार ने नए सिविल सेवा नियम 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।
- दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी की अपात्रता बरकरार रखी गई है।
- प्रोबेशन खत्म होने के 6 माह में कोई एक्शन न हो तो ऑटो परमानेंट होंगे।
- एफआईआर (FIR) लंबित होने पर जॉइनिंग रुकने के नियम पर विवाद उठा है।
- 15 जून तक सुझाव मांगे गए, जुलाई से नियम लागू हो सकते हैं।
24 साल पुराना नियम फिर बरकरार
मध्य प्रदेश सरकार अपने सिविल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 2026 का नया मसौदा जारी किया है।
इस ड्राफ्ट में सबसे चर्चित बात यह है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी की पाबंदी को हटाया नहीं गया है। यह नियम मूल रूप से 2001 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था। पिछले साल खुद जीएडी ने इस पाबंदी को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। साथ ही, मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। वहीं, नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई है।
दो बच्चों का नियम क्या कहता है?
नए ड्राफ्ट के नियम पांच और छह के तहत पात्रता और अपात्रता की शर्तें तय की गई हैं। जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हुआ हो, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी राहत नहीं है। यदि पहले से एक बच्चा हो और अगली डिलीवरी में दो या ज्यादा बच्चे हों, तो वह उम्मीदवार अपात्र माना जाएगा।
प्रोबेशन में बड़ा बदलाव
नए नियमों में प्रोबेशन (Probation - परिवीक्षा काल) को लेकर एक अहम प्रावधान जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वतः स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का फायदा अब कर्मचारी को मिलेगा।
भर्ती दो माध्यमों से होगी। सीधी भर्ती और पदोन्नति (Promotion)। वयस्क होने पर नियुक्ति से पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहमति ली जाएगी। सीधी भर्ती से आए कर्मचारियों को प्रोबेशन पर रखा जाएगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।
सीनियरिटी का नया फॉर्मूला
एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति से लोग आते हैं तो सीनियरिटी का क्रम इस तरह होगा। पहले सीधी भर्ती वाले, फिर अनुकंपा नियुक्ति वाले और आखिर में पदोन्नति वाले।
वहीं, यदि तीनों का नियुक्ति आदेश एक ही तारीख को निकले, तो प्रमोटेड कर्मचारी सबसे सीनियर माना जाएगा। हर साल 01 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List - वरिष्ठता सूची) अपडेट की जाएगी।
इन 4 स्थितियों में भी नौकरी नहीं मिलेगी
नए ड्राफ्ट में चार और कारण जोड़े गए हैं जिनमें उम्मीदवार अयोग्य माना जाएगा।
पहला, एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर (विशेष मामलों में छूट संभव)।
दूसरा, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट पाए जाने पर।
तीसरा, नैतिक अधोपतन या चारित्रिक मामलों में दोषी होने पर।
चौथा, केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय निकाय से पहले बर्खास्त हो चुके कर्मचारी भी अपात्र होंगे।
इसके अलावा ड्राफ्ट में पांच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का भी प्रावधान है: उपयुक्त शासकीय सेवक न पाए जाने पर, जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर, विभागीय परीक्षा पास न करने पर और नियुक्ति के समय झूठी जानकारी देने पर।
FIR वाले नियम पर उठा सवाल
ड्राफ्ट के एक नियम पर विवाद खड़ा हो गया है। प्रावधान है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित हो तो अंतिम फैसला आने तक जॉइनिंग रोक दी जाएगी। मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
उनके मुताबिक देश में झूठी एफआईआर दर्ज कराना आसान है। साथ ही, कोर्ट से फैसला आने में सालों लग जाते हैं। ऐसे में निर्दोष व्यक्ति भी लंबे समय तक नौकरी से वंचित रह सकता है।
15 जून तक दें सुझाव
जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि इस मसौदे पर कर्मचारी संगठनों और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं। 15 जून तक जीएडी की वेबसाइट पर राय दी जा सकती है। सुझावों के बाद फाइनल ड्राफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा। इन नियमों के जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना है।
FAQ
- MP के नए सिविल सेवा नियम 2026 में दो बच्चों की शर्त क्या है?
नए ड्राफ्ट के मुताबिक जिस उम्मीदवार की दो से अधिक जीवित संतानें हों और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ हो, वह मध्य प्रदेश सरकारी नौकरी के लिए अपात्र होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी कोई राहत नहीं है। यह नियम 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था जो अब नए ड्राफ्ट में भी बरकरार है। - प्रोबेशन में ऑटो परमानेंट का नया नियम क्या है?
नए नियम के तहत अगर किसी कर्मचारी की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के 6 महीने के भीतर विभाग उसके स्थायीकरण या सेवा समाप्ति पर कोई फैसला नहीं लेता, तो उस कर्मचारी को स्वतः उस पद पर स्थायी मान लिया जाएगा। यानी विभागीय देरी का नुकसान कर्मचारी को नहीं उठाना पड़ेगा। - नए सिविल सेवा नियम 2026 कब लागू होंगे और सुझाव कहां दें?
जीएडी की वेबसाइट पर 15 जून 2026 तक आम जनता और कर्मचारी संगठन अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके बाद फाइनल ड्राफ्ट कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाएगा। इन नियमों के जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना है।
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