MP में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त पर बवाल, CM ने नियम खारिज किया
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश सरकार ने 65 साल बाद सिविल सेवा नियम बदलने का ड्राफ्ट जारी किया
- नए ड्राफ्ट में 2001 से चली आ रही दो बच्चों की शर्त फिर बरकरार रखी गई
- सामान्य प्रशासन विभाग ने 15 जून तक सुझाव मांगे थे, लेकिन पहले ही लिंक हटा दी
- CM डॉ. मोहन यादव ने दो बच्चों वाला प्रावधान हटाकर नया ड्राफ्ट जारी करने के आदेश दिए
- द सूत्र ने प्रमुखता से उठाया था यह मुद्दा, इसके बाद हरकत में आई राज्य सरकार
65 साल बाद बदलने की थी तैयारी
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की शर्तें 1961 से चली आ रही थीं। बीच-बीच में छोटे-मोटे बदलाव हुए, लेकिन ढांचा वही पुराना रहा। विभागों को अक्सर सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) से मार्गदर्शन लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय और ऊर्जा दोनों जाया होती थी।
इसी को देखते हुए सरकार ने फैसला किया कि नए सिरे से मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम बनाए जाएं। जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने 4 जून 2026 को एक सार्वजनिक सूचना जारी की। इसमें बताया गया कि 'मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026' का मसौदा तैयार किया गया है। 15 जून 2026 तक नागरिक और कर्मचारी संगठन अपने सुझाव व आपत्तियां sogad1@mp.gov.in पर या gad.mp.gov.in पर भेज सकते थे।
ड्राफ्ट में क्या नया, क्या पुराना?
इस ड्राफ्ट में कई अहम बदलाव थे। प्रोबेशन (Probation - परिवीक्षा काल) को लेकर एक बड़ा प्रावधान जोड़ा गया। अगर प्रोबेशन अवधि खत्म होने के छह महीने के भीतर विभाग कोई फैसला नहीं लेता, तो कर्मचारी स्वतः स्थायी माना जाएगा। यानी विभागीय लापरवाही का खामियाजा अब कर्मचारी को नहीं उठाना पड़ेगा।
वरिष्ठता यानी सीनियरिटी (Seniority) तय करने का फॉर्मूला भी बदला। अब वरिष्ठता पदभार ग्रहण की तारीख से नहीं बल्कि चयन सूची में क्रम के अनुसार तय होगी। हर साल 1 जनवरी की स्थिति में 31 मार्च तक नई ग्रेडेशन लिस्ट (Gradation List - वरिष्ठता सूची) अपडेट होगी। एक ही साल में सीधी भर्ती, अनुकंपा और पदोन्नति तीनों से आए लोगों में सीधी भर्ती वाले सबसे पहले माने जाएंगे।
पुराना नियम बरकरार, यहीं से शुरू हुआ विवाद
ड्राफ्ट जारी होते ही सबसे पहले नजर गई उस प्रावधान पर जो 2001 से चला आ रहा था। 26 जनवरी 2001 के बाद जिस उम्मीदवार के दो से अधिक जीवित बच्चे हों, वह सरकारी नौकरी के लिए अपात्र होगा। जुड़वां बच्चों के मामले में भी कोई राहत नहीं थी। यह नियम मूल रूप से 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार ने लागू किया था।
पिछले साल खुद जीएडी ने इस शर्त को हटाने का प्रस्ताव बनाया था। CM की सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई थी। लेकिन नए ड्राफ्ट में सरकार उस फैसले से पलट गई थी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ऐसा नियम हटाया जा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर 2025 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS - Sample Registration System) बुलेटिन 2023 के अनुसार मध्यप्रदेश की सकल प्रजनन दर 2.4 है, जो राष्ट्रीय दर 1.9 से अधिक है। इस आधार पर नियम हटाने की माँग उठती रही है।
FIR वाले नियम पर भी कर्मचारी संघ की आपत्ति
ड्राफ्ट में एक और प्रावधान था, जिस पर तत्काल विरोध उठा। प्रावधान था कि अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित है तो अंतिम फैसला आने तक उसकी जॉइनिंग रोक दी जाएगी। मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि देश में झूठी एफआईआर (FIR - First Information Report) दर्ज कराना आसान है और कोर्ट से फैसला आने में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में निर्दोष उम्मीदवार भी लंबे समय तक नौकरी से वंचित रह सकता है।
9 जून को ही पोर्टल से लिंक गायब
15 जून की डेडलाइन तय थी। लोग सुझाव देने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन 9 जून को ही पोर्टल से लिंक गायब हो गई। सुबह से शाम तक युवा, कर्मचारी और आम जनता पोर्टल खोलते रहे लेकिन फॉर्म तक नहीं पहुँच पाए। किसी को पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी।
CM यादव ने दिया दखल, ड्राफ्ट किया रद्द
विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद संज्ञान लिया। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया कि मौजूदा प्रारूप को तत्काल पोर्टल से हटाया जाए। साथ ही दो से अधिक जीवित संतानों वाले उम्मीदवारों को अपात्र मानने का प्रावधान नए ड्राफ्ट से हटाया जाए। इसके बाद संशोधित यानी बदला हुआ प्रारूप विधिवत प्रकाशित किया जाए। CM के निर्देश के बाद ही लिंक हटाई गई।
ड्राफ्ट में और क्या था?
नियमों में अपात्रता की शर्तें भी स्पष्ट की गई थीं। एक से अधिक जीवित जीवनसाथी होने पर, शारीरिक या मानसिक रूप से अनफिट होने पर, नैतिक अधोपतन के मामलों में दोषी होने पर और पहले कहीं से बर्खास्त हो चुके व्यक्ति को सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसके अलावा ड्राफ्ट में पाँच परिस्थितियों में सेवा समाप्त करने का प्रावधान था जिनमें जरूरी योग्यता या दक्षता न होने पर, असंतोषजनक प्रदर्शन पर और नियुक्ति के समय गलत जानकारी देने पर सेवा खत्म की जा सकती थी।
अब आगे क्या?
सामान्य प्रशासन विभाग अब एक संशोधित ड्राफ्ट तैयार करेगा जिसमें दो बच्चों की अपात्रता का प्रावधान नहीं होगा। इसे पोर्टल पर दोबारा प्रकाशित किया जाएगा और नागरिकों को फिर से सुझाव देने का मौका मिलेगा। इन नियमों के जुलाई 2026 से लागू होने की संभावना थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती है।
जरूरी FAQ
MP सिविल सेवा ड्राफ्ट 2026 में क्या-क्या नए प्रावधान थे और मुख्य विवाद क्या था?
मध्यप्रदेश सरकार ने 4 जून 2026 को सिविल सेवा नियम 2026 का नया ड्राफ्ट जारी किया था। इसमें प्रोबेशन खत्म होने के छह महीने में फैसला न होने पर कर्मचारी को स्वतः स्थायी मानने का प्रावधान था। सीनियरिटी पदभार की जगह चयन सूची के क्रम से तय होनी थी। लेकिन मुख्य विवाद 2001 से चली आ रही दो बच्चों की शर्त को बरकरार रखने और एफआईआर लंबित होने पर जॉइनिंग रोकने के प्रावधान को लेकर हुआ। इन दोनों बातों पर व्यापक विरोध हुआ।
मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त अब लागू रहेगी या हटेगी?
CM डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद इस शर्त को नए ड्राफ्ट से हटाया जाएगा। मौजूदा प्रारूप रद्द कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग एक संशोधित ड्राफ्ट तैयार करेगा जिसमें दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को अपात्र मानने का प्रावधान नहीं होगा। यह संशोधित प्रारूप पोर्टल पर दोबारा प्रकाशित किया जाएगा। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पहले ही यह नियम हटाया जा चुका है।
15 जून की डेडलाइन से पहले पोर्टल लिंक क्यों हटाई गई और अब नागरिकों को दोबारा सुझाव देने का मौका मिलेगा?
CM के निर्देश के बाद मौजूदा विवादित ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाया गया। यही कारण था कि 15 जून की डेडलाइन से पहले ही लिंक बंद हो गई और दिनभर युवा व कर्मचारी फॉर्म नहीं भर पाए। हालाँकि नागरिकों को पहले से इसकी कोई सूचना नहीं दी गई जो एक बड़ी चूक थी। जब संशोधित ड्राफ्ट पोर्टल पर आएगा तब नागरिकों को दोबारा सुझाव देने का अवसर मिलेगा।
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