शक्कर की बढ़ती कीमतों के बीच खुशखबरी, फिर शुरु होगा कैलारस शक्कर कारखाना
शक्कर की आसमान छूती कीमतों के बीच एक खुशखबरी सामने आई है। मुरैना जिले का कैलारस शक्कर कारखाना लंबे समय से बंद पड़ा था। अब सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। 19 अगस्त की कैबिनेट बैठक में कारखाने की जमीन MSME विभाग को सौंप दी गई। MSME विभाग जल्द बड़े शक्कर मिल संचालकों से प्रस्ताव मांगेगा। बची हुई जमीन पर नया औद्योगिक क्षेत्र भी बनाया जाएगा।
सीएम के निर्देश पर बड़ा कदम
मुरैना जिले का कैलारस शक्कर कारखाना कई सालों से बंद है। अब इसे फिर से शुरू करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर लिया गया है।
सरकार ने कारखाने को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए सबसे पहला कदम जमीन का हस्तांतरण था। 19 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में कैलारस कारखाने की जमीन MSME विभाग को सौंप दी गई।
कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने खुद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का पूरा फोकस अब कारखाने को दोबारा शुरू करने पर है। साथ ही क्षेत्र में नए उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
बड़े मिल संचालकों से मांगे जाएंगे प्रस्ताव
कारखाने को चलाने के लिए सरकार को एक अनुभवी संचालक की जरूरत है। इसीलिए MSME विभाग जल्द ही देश के बड़े शक्कर मिल संचालकों से प्रस्ताव मंगाएगा। इसे Expression of Interest यानी EOI (Expression of Interest) कहा जाता है।
इस प्रक्रिया के तहत बड़ी कंपनियां अपने प्रस्ताव विभाग को भेजेंगी। इन प्रस्तावों की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इससे यह साफ होगा कि कारखाने का संचालन कौन करेगा।
सरकार की कोशिश है कि एक मजबूत और अनुभवी कंपनी ही इस काम को आगे बढ़ाए। इससे कारखाना लंबे समय तक ठीक से चल सकेगा। साथ ही क्षेत्र के किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
अतिरिक्त जमीन पर बनेगा औद्योगिक क्षेत्र
कारखाने के संचालन के लिए जितनी जमीन जरूरी होगी, वह अलग रखी जाएगी। इसके बाद जो जमीन बचेगी, उस पर MSME विभाग एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेगा।
इस औद्योगिक क्षेत्र से कैलारस और आसपास के इलाकों में नए उद्योगों को जगह मिलेगी। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।
सरकार का मानना है कि सिर्फ कारखाना शुरू करने से ही क्षेत्र का पूरा विकास नहीं होगा। इसलिए औद्योगिक क्षेत्र बनाकर लंबी अवधि की योजना बनाई जा रही है।
गन्ने की खेती पर भी होगा फोकस
कारखाना शुरू होने के साथ ही गन्ने की उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी हो जाता है। इसके लिए कृषि विभाग विशेष प्रयास करेगा। कृषि मंत्री ने बताया कि कैलारस और आसपास के क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन बढ़ाने पर काम होगा।
इससे किसानों को खेती के नए विकल्प मिलेंगे। साथ ही उन्हें अपनी फसल के लिए स्थानीय स्तर पर ही एक भरोसेमंद बाजार भी मिल जाएगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों और युवाओं को क्या फायदा होगा
सरकार का कहना है कि कारखाना दोबारा शुरू होने से सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय किसानों को होगा। उन्हें गन्ने की फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
इसके अलावा कारखाने और नए औद्योगिक क्षेत्र से क्षेत्र में रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। स्थानीय युवाओं को नौकरी के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी।
लंबे समय से थी यह मांग
कैलारस शक्कर कारखाना कई सालों से बंद पड़ा था। इसे दोबारा शुरू करने की मांग क्षेत्र के लोग लगातार उठाते रहे हैं। किसान और स्थानीय नेता कई बार इस मुद्दे को सरकार के सामने रख चुके हैं।
अब कैबिनेट के फैसले के बाद यह मांग पूरी होती दिख रही है। जमीन MSME विभाग को सौंपी जा चुकी है। साथ ही बड़े मिल संचालकों से प्रस्ताव बुलाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कौन सी कंपनी कारखाने का संचालन संभालती है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि नया औद्योगिक क्षेत्र किस रफ्तार से विकसित होता है।
आदेश की खबर आई, लेकिन विधायक का अनशन जारी
सरकार के इस फैसले से आंदोलन में नया मोड़ आया है। जौरा विधायक पंकज उपाध्याय छह दिन से अनशन पर हैं। उन्होंने 15 अगस्त को कारखाना परिसर में अनशन शुरू किया था। कारखाना दोबारा शुरू कराने की मांग उनकी मुख्य मांग है। गुरुवार शाम प्रशासन ने उनसे बातचीत की कोशिश की। मुरैना के अपर कलेक्टर अश्वनी रावत अनशन स्थल पहुंचे। उन्होंने विधायक से अनशन खत्म करने की अपील की। विधायक ने फिलहाल अनशन खत्म करने से इनकार किया।
लिखित आदेश मिलने तक अनशन नहीं खत्म होगा
पंकज उपाध्याय ने अपनी मांग साफ कर दी है। उनका कहना है कि उन्हें लिखित आदेश चाहिए। विधायक के मुताबिक कलेक्टर खुद आदेश लेकर आएं। इसके बाद ही वह अनशन खत्म करने पर विचार करेंगे। इससे आंदोलन को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ गया है। सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ाने का संकेत जरूर दिया है। लेकिन विधायक अब भी लिखित प्रमाण पर अड़े हैं। यही बात आंदोलन का अगला रुख तय करेगी।
21 अगस्त को जीतू पटवारी भी पहुंचेंगे कैलारस
आंदोलन में शुक्रवार को कांग्रेस का बड़ा चेहरा पहुंचेगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कैलारस पहुंचने वाले हैं। वह पंकज उपाध्याय के अनशन को समर्थन देंगे। आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनके स्वागत की तैयारी की है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के आने की भी जानकारी दी गई है। इससे आंदोलन को राजनीतिक समर्थन और बढ़ सकता है।
कारखाने को लेकर पुराना विवाद फिर सामने आया
कैलारस शक्कर कारखाना लंबे समय से बंद पड़ा है। कारखाने की संपत्तियों को लेकर भी विवाद चल रहा है। सरकार ने पहले संपत्तियां एमएसएमई विभाग को देने का फैसला किया था। उस फैसले को लेकर किसानों में नाराजगी रही है। आंदोलनकारी कारखाना बंद रखने के फैसले का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि कारखाना किसानों के लिए जरूरी है। वे रोजगार और गन्ना खेती से जुड़े लाभ चाहते हैं।
अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
गुरुवार की घोषणा से आंदोलन में नया मोड़ आया है। सरकार ने कारखाना शुरू करने की प्रक्रिया बताई है। एमएसएमई विभाग अब निजी संचालकों से प्रस्ताव मांग सकता है। इसके बाद कारखाने के संचालन की दिशा साफ होगी। दूसरी तरफ विधायक लिखित आदेश की मांग पर कायम हैं। इसलिए गुरुवार को अनशन खत्म नहीं हुआ। अब शुक्रवार की राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर रहेगी।
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