विभागों की समीक्षा बैठक में सख्त नजर आए सीएम मोहन, दो पीएस की खिंचाई, बोले जवाबदेही तय होना चाहिए

Sanjay Dhiman | May 22, 2026, 10:33 IST
Photograph: (the sootr)
सीएम मोहन यादव ने विभागों की समीक्षा बैठक में लापरवाह अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने साफ कहा कि जनता के काम में कौताही बर्दाश्त नहीं होगी।

पांच पाइंट में समझें पूरा मामला

  • सीएम मोहन यादव ने पांच विभागों की समीक्षा बैठक में जवाबदेही पर जोर दिया।
  • जनजातीय कार्य विभाग में प्रस्तावों पर कार्रवाई में विलंब पर सख्त फटकार लगाई।
  • पशुपालन विभाग में डेयरी विकास योजना को समय पर लागू करने के निर्देश दिए।
  • स्कूल शिक्षा में एआई पाठ्यक्रम, अतिथि शिक्षक भर्ती और भवन मरम्मत करने के निर्देश दिए।
  • पीडब्ल्यूडी और परिवहन में नई सड़कें, बस सेवाएं और सड़क सुरक्षा पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार 21 मई को मंत्रालय में पांच विभागों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने खराब तैयारी और अधूरी जानकारी पर सख्त रवैया दिखाया। दो वरिष्ठ अधिकारियों को सीएम की नाराजगी झेलना पड़ी। सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि परिणाम जमीन पर दिखने चाहिए। इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन भी मौजूद थे।



प्रस्ताव नीचे वालों ने भेजा है, सुनते ही भड़के सीएम

इस पूरी बैठक का सबसे बड़ा घटनाक्रम जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा के दौरान देखने को मिला। जब विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा आगामी कैबिनेट प्रस्तावों की जानकारी दे रहे थे, तब सीएम ने एक प्रस्ताव पर सवाल पूछ लिया। इस सवाल पर प्रमुख सचिव बामरा ने बड़ी सहजता से कह दिया कि यह तो नीचे वालों ने बनाकर भेजा है।



यह सुनते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़े लहजे में कहा कि जब प्रेजेंटेशन आप दे रहे हैं, तो यह गैर-जिम्मेदाराना जवाब क्यों? उन्होंने तुरंत पूछा कि वह नीचे वाला कौन है, उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करो और मेरे सामने लेकर आओ। इस सख्त तेवर को देखकर पूरी बैठक में सन्नाटा पसर गया और अफसरों के पसीने छूट गए।



पशुपालन विभाग की सुस्ती पर भी नाराजगी

इसके बाद बारी आई पशुपालन विभाग की, यहां प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव को भी मुख्यमंत्री की नाराजगी का सामना करना पड़ा। मामला नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) और राज्य सरकार के बीच हुए एमओयू (MoU) से जुड़ा हुआ था। जब मुख्यमंत्री ने पूछा कि डेयरी सेक्टर को मजबूत करने की योजना आगे क्यों नहीं बढ़ी, तो अफसर ने इसके लिए एनडीडीबी को जिम्मेदार बता दिया। उन्होंने कहा कि वहां से अभी तक डीपीआर (DPR) नहीं आई है।



लेकिन बैठक में मौजूद एनडीडीबी के अधिकारियों ने तुरंत पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि डीपीआर और सारी फाइलें तो पहले ही भेजी जा चुकी हैं। इस लापरवाही पर सीएम ने सख्त लहजे में कहा कि कल सुबह ही एनडीडीबी अधिकारियों के साथ बैठिए और शाम तक मुझे वित्त विभाग के सामने पूरा रिजल्ट चाहिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी इस रवैये पर अपनी गहरी नाराजगी जताई।



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स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा में हुए निर्णय

  • कक्षा 8 से 12 तक एआई को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश।
  • ड्रॉपआउट और फेल बच्चों के लिए ओपन बोर्ड से हाईस्कूल पास करने की योजना।
  • 1 जुलाई से पहले अतिथि शिक्षकों की भर्ती पूरी करने का लक्ष्य।
  • स्कूलों में बाउंड्री वॉल और जर्जर भवनों की मरम्मत अनिवार्य।
  • सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को पाठ्यक्रम में जोड़ने के निर्देश।
  • निजी स्कूल खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

पीडब्ल्यूडी और सड़क परियोजनाएं

  • ढाई साल में भोपाल वेस्टर्न बायपास पूरा होगा।
  • जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन रिंग रोड डेढ़ साल में।
  • क्षेत्रीय सड़कें ‘कृषक पथ’, ‘आस्था पथ’ और ‘विकास पथ’ नाम से नई पहचान पाएंगी।
  • किसानों को फल-सब्जी परिवहन में हेलमेट वितरित करने के निर्देश।
  • मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र को नई सड़कों से जोड़ा जाएगा।

परिवहन विभाग का फोकस

  • 1164 रूट पर 5206 बसें चलेंगी।
  • दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट की मैपिंग होगी।
  • एम्बुलेंस सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
  • मप्र राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय की स्थापना।
  • मालवाहनों की जांच के लिए आधुनिक और इंटीग्रेटेड सिस्टम।

जनजातीय और सहकारिता योजनाएं

  • छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा मॉडल का अध्ययन।
  • पैक्स सदस्यता अभियान 30 जून तक।
  • 10 लाख नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य।
  • अगले तीन वर्षों में कमजोर जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को मजबूत किया जाएगा।
  • पिछले दो वर्षों में 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उत्पादन।

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