ईरान-इजराइल युद्ध का असर एमपी पर, एक्शन मोड में सीएम मोहन यादव, कैबिनेट के साथ बुलाई एक और बैठक
News In Short
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज 10 मार्च को प्रदेश के बड़े अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है।
- बैठक में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई की समीक्षा की जाएगी।
- इजराइल-ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल का डर है।
- विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर भी चर्चा की जाएगी।
- जरूरत पड़ने पर सरकार तत्काल नया एक्शन प्लान लागू कर सकती है।
News In Detail
इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश पर भी पड़ सकता है। इसको लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज 10 मार्च को एक समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, गृह सचिव और कई अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि इस युद्ध का राज्य में पेट्रोल, डीजल, LPG और CNG की सप्लाई पर क्या असर हो सकता है।
मुख्यमंत्री बोले- अधिकारी पूरी तैयारी के साथ काम करें
बैठक में पेट्रोल-डीजल और गैस के स्टॉक की समीक्षा की जाएगी, ताकि यदि स्थिति बिगड़ती है तो कोई परेशानी ना हो। साथ ही, मध्य-पूर्व में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इस पर भी चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा है कि वे पूरी तैयारी के साथ काम करें ताकि किसी भी तरह की दिक्कतें न हों।
जरूरत पड़ी तो तत्काल एक्शन प्लान लागू होगा
हालात ऐसे ही लंबे समय तक बने रहे तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही गैस की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सीएम ने कैबिनेट के साथ एक और बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ी तो तत्काल एक्शन प्लान लागू किया जाएगा। इसका मकसद ये है कि आम लोगों पर कम से कम असर पड़े।
आपके लिए जानना जरूरी
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया को परेशान कर दिया है। इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल बन रहा है। इस युद्ध के बढ़ते असर से कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। साल 2022 के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसका असर खासकर उन देशों पर पड़ रहा है, जो कच्चा तेल आयात करते हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में पहले ही हालात खराब हो गए हैं।
सप्लाई बंद करने की धमकी
कुवैत और कतर जैसे देशों ने तेल और गैस की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। ईरान का तेल रिजर्व भी अमेरिका और इजराइल के हमलों से प्रभावित हो गया है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया का 20% तेल का रास्ता प्रभावित हो गया है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ रही है।
भारत पर क्या आसर
भारत, जो कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, अब बढ़ी हुई कीमतों से बचने के लिए अपने पास काफी स्टॉक रखने की बात कर रहा है। अगर तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और भारत का आयात बिल भी ज्यादा हो सकता है।
इसके अलावा, LPG की कमी की वजह से कई शहरों के रेस्तरां को भी परेशानी हो रही है। कई बड़े शहरों में होटल और रेस्तरां को गैस सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने कहा है कि वहां कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग रुक गई है। इसके कारण, बेंगलुरु में 10 मार्च से कई रेस्तरां बंद हो सकते हैं। इससे घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।
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